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अफगानिस्तान के किस क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा चाहता है तुर्की ?

अफगानिस्तान के किस क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा चाहता है तुर्की ?

अफगानिस्तान
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तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप्प एर्दोगन और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच बीते दिनों एक अहम मुलाकात हुई। इस बीच अफगानिस्तान और तालिबान को लेकर दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका के नेटो सैनिकों की अफगानिस्तान से हुई वापसी के बाद से ही तुर्की यहां अपने सैनिकों की तैनाती में जुट गया। अब यहां इस मुद्दें को लेकर कई सवाल खड़े हो रहें है जैसे –

  1. तुर्की अपनी सीमा पर सैकड़ों किलोमीटर लंबी दीवारें क्यों बना रहा है ?
  2. अफगानिस्तान में तालिबान की बढती ताकत की वजह क्या है ?

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अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन के अनुसार तुर्की और अमेरिका के बीच इस बात पर सहमति बनी की,  दोनो ही देश काबुल के हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा में अहम रोल निभाएगा। इस मुलाकात के बाद तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ये थी कहा कि अगर तुर्की अफ़ग़ानिस्तान में अपने सैनिक तैनात रखता है तो अमेरिका की ओर से वित्तीय, कूटनीतिक और अन्य किस्म की मदद का मिलना महत्वपूर्ण होगा।

काबुल एयरपोर्ट पर कब्ज़ा चाहता है तुर्की

दरअसल अफगानिस्तान में तुर्की का मुख्य प्लान काबुल एयरपोर्ट पर अपनी पकड़ बनाना है, क्योंकि काबुल एयरपोर्ट ही अफगानिस्तान को दुनिया के बाकी देशो से जोड़ता है। इसके लिए बहुत ज़रुरी है, कि काबुल एयरपोर्ट की सेवाएं दोबारा से शुरु की जाऐं।

तुर्की की एक न्यूज़ बेवसाइट के मुताबिक अगर तुर्की काबुल में अपनी पैठ बना लेता है तो बाकि देशों के लिए यहां कदम रखना भी मुश्किल हो जाऐगा और तुर्की यहां अपना एकाधिकार साबित कर देगा।

तुर्की की रक्षा मंत्री हुलुसी अकर ने बीते दिनों अपने एक बयान में साफ किया था कि काबुल एयरपोर्ट अगर बंद हो गया तो अफगानिस्तान से बाकि देशों को अपने कूटनीतिक मिशन को वापस लेना पड़ेगा। आने वाले दिनों में समस्या ज्यादा ना बढ़े इसके लिए बहुत ही संघर्ष करने की आवश्यकता है।

पिछले छह साल से तुर्की काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा और इसके ऑपरेशन से जुड़ा रहा है. लगभग 500 तुर्की  सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हैं। हालांकि उनकी भूमिका लड़ाई वाली गतिविधियों से नहीं जुड़ी है। वे नेटो मिशन के तहत अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग भी देते हैं।

भविष्य को देखते हुए तुर्की और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है। दोनों देशो के बीच वित्तीय, लॉजिस्टिक सपोर्ट पर खासा ज़ोर दिया गया है। तुर्की के राष्ट्रपति ने हंगरी और पाकिस्तान के सपोर्ट  के बारे में भी बहुत बातें कही है। लेकिन अब तक कुछ भी साफ नहीं हो पाया है। यहां ये भी कहा गया कि अभी कुछ समय तक यहां तुर्क सैनिकों की तैनाती नहीं की जाऐगी।

तुर्की करेगा तालिबान से बातचीत करने की पहल 

राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि तुर्की तालिबान के साथ बातचीत करना चाहेगा। तुर्की तालिबान का विरोधी नहीं है, इसलिए उसे पूरी आशा है कि तालिबान तुर्की के साथ सहजता पूर्वक बात करेगा। अपने कई कड़े बयान के बावजूद तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने तुर्की के साथ बात करने पर सहमति ज़ाहिर की है।

यहां तुर्की और अफगानिस्तान के पाकिस्तान के साथ अपने भविष्य. की योजनाओं को लेकर भी कई मुद्दों पर बात हो सकती है। लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में जिस तरह से उपद्रव की स्थिति बनी हुई है उसे देख कर तो ऐसा ही लगता है कि तालिबान अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है, काबुल एयरपोर्ट के भविष्य पर आख़िरी फ़ैसले को लेकर समय तेज़ी से निकल रहा है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

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