राजनीति

असम में गूँजा हिंदुत्ववाद का डंका !!

असम में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का चुनावी बिगुल

2021 में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं, भाजपा इस बार किसी भी राज्य में अपनी पकड़ में ढील नहीं देना चाहती। एक तरफ जहाँ बंगाल में भाजपा के बड़े से बड़े नेता ने अपनी ऐड़ी चोटी का बल झोंक दिया हैं तो वहीं दूसरी तरफ असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते गृहमंत्री अमित शाह राज्य के दौरे पर हैं।

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असम में कोकराझार में अमित शाह ने भाजपा की विजय संक्लप सामवेश रैली को संबोधित किया। अमित शाह ने अपनी रैली में बोडो क्षेत्र के रोड नेटवर्क पर बात करते हुए कहा कि भाजपा द्वारा असम के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं|

असम में 500 करोड़ रु सिर्फ बोडो क्षेत्र के विकास के लिए ही दिए गए हैं। अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इस रोड की मदद से पूरे बोडो क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाया जाऐगा, औऱ आने वाले सालो में बोडो क्षेत्र विकास के रास्ते पर आगे चल पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में हुआ था BTR क्षेत्र का शांति समझौता

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कोकराझार में अमित शाह ने यह भी कहा कि आज से ठीक एक साल पहले देश के प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बोडो शांति समझौता हुआ और बोडो शांति समझौते हुआ था साथ ही प्रधानमंत्री ने अपने नेताओं को यह संदेश भी दिया था कि उत्तर पूर्व में जहां-जहां अशांति है|

वहां बातचीत कीजिए और शांति का मार्ग प्रशस्त कीजिए। बतां दें की प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जो BTR क्षेत्र का शांति समझौता हुआ, उसको आज एक साल आज पूरा हो गया हैं। भाजपा के अनुसार अब यहाँ शांति के एक नए युग की शुरुआत हुई है.’जो अब तक कांग्रेस कायम रखने में विफल ही रही थी।

असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस करेगी महागठबंधन

गौरतलब हैं कि इस बार असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने महागठबंधन का सहारा लेने की रणनीति पर काम शुरु कर दिया हैं इसी पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि 5 साल में असम में जो विकास हुआ है|

वो पिछले 70 साल में नहीं हुआ। असम में अगर भ्रष्टाचार, घुसपैठ और आतंकवाद मुक्त सरकार कोई बना सकता है तो वो है केवल भाजपा।

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हालांकि अभी असम चुनाव में बहुत वक्त है लेकिन राजनीतिक दलों के बीच जिस प्रकार से आरोप प्रत्यारोप करना शुरु कर दिया है और रणनीतियाँ जिस प्रकार से बनाई जा रही है उससे चुनाव की महत्वता साफ ज़ाहिर होती है।

अब रही बात राजनीतिक दलों द्वारा कि जाने वाली तैयारी की तो कांग्रेस द्वारा इस बार 5 पार्टियों के साथ गठबंधन कर असम में कांग्रेस भाजपा को हराने की रणनीति बैठा रही है|

लेकिन यह रणनीति कुछ खास कारगर साबित होती नहीं लग रही है , और कांग्रेस की अगुवाई में किया जाने वाला महागठबंधन विफल होता दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पिछला चुनाव है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस बार असम में भाजपा की जीत

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असम में पिछला चुनाव 2016 में हुआ था जिसमें भाजपा को भारी बहुमत हासिल हुआ था। फिलहाल असम में भाजपा से मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल हैं। पिछले चुनाव की बात करें तो 2016 में भाजपा ने 89 सीटों पर चुनाव लड़ा था|

जिसमें से 60 सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी। तो वहीं कांग्रेस ने 122 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से केवल 26 सीटों पर ही कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। वहीं अगर अन्य क्षेत्रिय पार्टीयों की बात करें तो असम गण परिषद 30 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 14 पर सफलता हासिल की थी|

वहीं बदरुद्दीन अजमल की AIUDF  ने 74 सीटों पर अपनी किस्मत आज़माई और 13 सीटों पर उन्हें सफलता मिली थी। विधानसभा चुनाव में CPI  15 सीटों पर चुनाव लड़ी था लेकिन खाता नहीं खुला। CPM  और CPI (ML) भी अपना खाता नहीं खोल सकी थी।

कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान तो कर दिया पर अभी तक मुख्यमंत्री को चेहरा कौन होगा यह साफ नहीं किया हैं|

और यह दर्शाती हैं कि मुख्यमंत्री के चेहरे के लिए राजनीतिक दलों के बीच मनमुटाव भी हो सकता है। अब बात करें की इस बार के बदलते चुनावी समीकरण की तो राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस बार भी भाजपा के ही दोबार सत्ता में आने के आसार है।

बोड़ो क्षेत्र समझौता , सर्वानंद सोनोवाल की महत्वपूर्ण भूमिका और भाजपा द्वारा लगातार आयोजित की जाने वाली रैलियाँ और सभाऐं भाजपा को एक बार फिर जीत दिला सकती है।

अब रही बात कांग्रेस के द्वारा किए जाने वाले महागठबंधन की तो बिहार विधानसभा चुनाव विपक्ष के महागठबंध की विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण हैं|

और ऐसा ही कुछ असम में भी हो सकता है क्योंकि असम में AIUDF और असम गण परिषद को छोड़कर कोई भी दूसरी पार्टी असम में अपनी इतनी मजबूत पकड़ नहीं रखती की उससे कांग्रेस को फायदा हो सकें।

वहीं भाजपा को इसका फायदा भी मिल सकता है, क्योंकि असम में भाजपा जनता के बीच अपनी एक अलग ही छाप छोड़ती है। इस आधार पर अभी कांग्रेस के द्वारा की गई घोषणा को हम केवल एक ट्रेलर मान सकते हैं।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

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