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आखिर FIR के बाद भी क्यों नहीं बंद होगा भारत में Twitter?

आखिर FIR के बाद भी क्यों नहीं बंद होगा भारत में Twitter?

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माइक्रोब्लोगिंग प्लेटफ़ॉर्म ट्विटर और सरकार के बीच काफी दिनों से विवाद चलता आ रहा था| सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन्स को ट्विटर मानने को तैयार नहीं था जो की अब मान गया है | ट्विटर से जुडी भारतीय एक्ट की धारा 79 के तहत मिली सुरक्षा का अधिकार छिन गया है|

इसके तहत अब ट्विटर पर कोई गैरकानूनी या भड़काऊ पोस्ट किसी यूजर की ओर से पोस्ट किया जाता है तो उस सम्बन्ध में भारत के प्रबंध निदेशक समेत शीर्ष अधिकारियों से पुलिस अब पूछताछ जार सकेगी| मामला शुरू हुआ उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ट्विटर के खिलाफ वायरल  विडियो को लेकर| पुलिस की तरफ से गाजियाबाद के मामले में टिटर के खिलाफ धार्मिक भावना का आरोप लगाया है|

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सूत्रों ने कहा की 15 जून तक ट्विटर महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफोर्म के बीच एकमात्र मंच था, जिसने सरकार से आदेश के बावजूद अनुपालन अधिकारी नियुक्त नहीं किया था| इसी मामले को लेकर ट्विटर पर fir दर्ज की गयी| एफ आई आर में इस बात का जिक्र है कि प्रेस विज्ञप्ति जारी होने के बाद संबंधित वीडियो डिलीट कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले और अफवाह फैलाने वालों ने ऐसा नहीं किया।

वीडियो जमकर रिट्वीट किया जा रहा था।इस पर ट्विटर ने भी कोई कार्यवाही नहीं की। ना ही ट्विटर ने इस वीडियो को मैनिपुलेटेड न्यूज़ का नाम दिया जो आमतौर पर अफवाह वाली झूठी खबरों को दिया जाता है। जाहिर है इसमें टि्वटर की भी पूरी जिम्मेदारी बनती थी,कि सबके सामने सही सच लाया जाए।

इसलिए मुख्य रूप से ट्वीट करने वाले आरोपियों और twitter inc. और टि्वटर कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है इसी वजह से केंद्र की चेतावनी के बावजूद इंटरनेट मीडिया के नए नियमों का पालन नहीं करने पर सरकार ने आईटी ऐक्ट के तहत प्राप्त सुरक्षा का अधिकार ट्विटर से वापस ले लिया है।

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यानी किसी प्रकार की शिकायत मिलने पर ट्विटर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, सरकार की इस कर्रवाई के बाद ट्विटर के तेवर नरम पड़ गए हैं। ट्विटर ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह नए नियमों को मानने के लिए तैयार है। पांच जून को सरकार ने नियमों का पालन के लिए दी थी अंतिम चेतावनी|

ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा है कि हम प्रक्रिया के हर चरण की प्रगति से सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को अवगत करा रहे हैं। अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी को बरकरार रखा गया है और विवरण जल्द ही सीधे मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। ट्विटर नए दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

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आपको बता दे की ट्विटर मेनस्ट्रीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ऐसा अकेला प्लेटफॉर्म है जिसने नए कानूनों का पालन नहीं किया| नए आइआइटी नियमों का पालन नहीं करने की वजह से ट्विटर ने भारत में इंटरमिडरी प्लेटफॉर्म का दर्जा खो दिया है| इसका मतलब की अब यूजर की गैर-कानूनी और भड़काऊ पोस्ट के लिए ट्विटर को जिम्मेदार माना जाएगा।

अगर कथित गैरकानूनी सामग्री के लिए ट्विटर के खिलाफ कोई आरोप है तो इसे एक प्रकाशक के रूप में माना जाएगा, इंटरमीडरी नहीं और आईटी अधिनियम, साथ ही देश के दंड कानूनों सहित किसी भी कानून के तहत दंड के लिए उत्तरदायी होगा।

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 5 जून को कहा था कि उसने सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित नए नियमों का पालन करने के लिए ट्विटर को एक आखिरी नोटिस दिया है।

मंत्रालय ने पत्र में कहा कि नए मध्यस्थ दिशानिर्देश नियम 26 मई से प्रभावी हो गए हैं, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय होने के बाद भी लेकिन ट्विटर ने इन नियमों के प्रावधानों का पालन करने से इनकार कर दिया है।

 

रिपोर्ट-नेहा परिहार

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