अंतर्राष्ट्रीय

आसियान- भारत सम्मेलन की सह अध्यक्षता करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

10 दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संगठन जिसे आसियान के नाम से भी जाना जाता है, आज इन आसियान देशों के बीच डिजिटल शिखर बैठक होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर वियतनाम के प्रधानमंत्री गुएन युआन फुक आज यानी गुरुवार को 17वें India ASEAN summit यानी आसियान-भारत सम्मेलनकी सह अध्यक्षता करेंगे।कयास लगाए जा रहें है कि इस सम्मेलन द्वारा रणनीतिक साझेदारी के दर्जे की समीक्षा की जाएगी।

आसियान क्या है ,यह संगठन कैसे कार्य करता है।

आसियान का पूरा नाम Association of Southeast Asian Nations है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन एक क्षेत्रीय संगठन है जो एशिया-प्रशांत के उपनिवेशी राष्ट्रों के बढ़ते तनाव को खत्म करने और राजनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधो के सुधारने के लिए इसकी स्थापना की गई थी। इस संगठन में शामिल सदस्य देशों में इंडोनेशिया , मलेशिया, फिलीपींस, संगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम , लाओस, म्यामांर , कंबोडिया कुल 10 देश शामिल है। आसियान ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी’ का विचार रखता है। इस संगठन की स्थापना 8 अगस्त 1967 में थाइलैंड की राजधानी बैंककॉक में की गई थी। बता दें की आज 17वां आसियान-भारत शिखर बैठक है।

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे सह अध्यक्षता

प्रधानमंत्री मोदी इस 17वें आसियान-भारत शिखर की बैठक की वियतनामी प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक के साथ सह-अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक कोरोना वायरस महामारी के कारण आए आर्थिक संकट से उबरने और रणनीतिक संबंधों को व्यापक बनाने पर आधारित है। विदेश मंत्रालय के अऩुसार इस शिखर बैठक में आसियान-भारत रणनीतिक साझेदारी की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की जाएगी। साथ ही इस बैठक में संपर्क, समुद्री मार्ग संबंधी सहयोग, व्यापार एवं वाणिज्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए विकास पर भी विचार किया जाएगा।

आसियान क्षेत्र सबसे प्रभावशाली समूह

दक्षिणपूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन आसियान को क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली समूह माना जाता है तथा भारत, चीन, जापान और आस्ट्रेलिया इसके संवाद साझेदार यानी मिडियेटर के रुप में कार्य करते है। आसियान सदस्य नेता आसियान- भारत योजना 2021-2015 जिसके अनुसार  आसियानऔर भारत की भागीदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की जाए इस पर भी धायान देंगे। कोविद -19, महामारी के बाद की आर्थिक सुधार और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की जाएगी।

इंडो-पैसिफिक समुद्री डोमेन की समीक्षा

बैंकाक में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन मेंमोदी ने भारत की भारत-प्रशांत महासागरों की पहल को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक समुद्री डोमेन के भारत-प्रशांत विजन को लागू करने के लिए शुरू किया था। जिसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए,स्थायी रूप से समुद्री संसाधनों का दोहन, क्षमता निर्माण और संसाधनों के बंटवारे पर सहयोग बढ़ाना, आपदा जोखिम में कमी और प्रबंधन सुनिश्चित करना, विज्ञान,प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और कनेक्टिविटी, समुद्री व्यापार और परिवहन को बढ़ाना।

आसियान और भारत भूमि और समुद्री सीमाओं को साझा करते हैं, साथ ही भारत और आसियान भूमि, वायु और समुद्र के माध्यम से कनेक्टिविटी को बढ़ाने में भी अपनी अपनी भूमिका निभाते है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सड़क संपर्क बढ़ाने की ही एक कोशिश है। बता दें की भारत और कई आसियान देशों जैसे थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच अच्छी वायु-कनेक्टिविटी है।

भारत और आसियान के बीच व्यापारिक संबंध

यह शिखर बैठक उस वक्त हो रही है जब दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में चीन का आक्रामक व्यवहार देखने को मिल रहा है। इससे यकिनन चीन से चल रहें विवाद में शामिल देशों को मदद मिलेगी। कई आसियान देशों का दक्षिणी चीन सागर में चीन के साथ सीमा विवाद है। इसमें बता दें की प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल नवंबर में बैंकॉक में हुई 16वीं आसियान-भारत शिखर बैठक में शामिल हुए थे। भारतऔरआसियान भारत के बीच स,बंधो की बात करें तो भारत आसियान का का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। आसियान के साथ भारत का अनुमानित व्यापार भारत के कुल व्यापार का लगभग 10.6% है। भारत के कुल निर्यात का आसियान से निर्यात लगभग 11.28% है। अब ऐसे में यह कयास लगाए जा रहें है कि इस बैठक से भारत और आसियान देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत ही होगे।

रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES