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उईगर मुस्लमानों के विषय पर क्यों भड़का तुर्की ?

उईगर मुस्लमानों पर तुर्की और चीन में तनाव

दुनिया भर में उईगर मुस्लमानों के विषय पर चीन पर लगातार ऊँगलियां उठ रही है। कई देशों द्वारा बार बार चीन के खिलाफ आवाज़ उठाने की भी बात की जा रही है।

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अब इस बीच एक बार फिर से तुर्की और चीन के बीच तनातनी का माहौल नज़र आ रहा है। अब दोनो देशों के बीच एक तरह का ट्विटर वॉर छिड़ गया है। क्या है पूरी खबर चलिए हम बताते है आपको-

उईगर मुस्लमानों के विषय पर छिड़ी ट्विटर वॉर

उईगर मुस्लमानों
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दरअसल चीन ने ट्विटर से कहा है कि वह तुर्की के दो नेताओं पर एक्शन लें जिन्होंने बीते दिनों चीन की आलोचना उईगर मुस्लमानों के विषय पर की थी।

तुर्की के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस ट्विटर वॉर की जानकारी देते हुए , इस बात की भी पुष्टि की है कि, बीते मंगलवार से पहले ही चीनी दूतावास के एक राजदूत को तुर्की बुलाया गया था।

जिसके बाद से ही यह मामला गर्माया हुआ है। क्या है वह ट्विटर वॉर अब यह भी जान लिजिए-

दरअसल बीते मंगलवार को चीन ने अपने अधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया था जिसमें चीन ने लिखा था कि चीन के अपने अधिकार है, वो क्या करता है, यह उसका अपना अधिकार क्षेत्र है, चीन द्वारा किऐ गए इस ट्वीट को तुर्की के नेताओं के खिलाफ देखा गया। जिसके बाद से ही चीन और तुर्की के बीच सोशल मीडिया पर मानो जंग ही छिड़ गई हो।

तुर्की ने की थी उईगर मुस्लमानों की हत्या पर टिप्पणी

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दरअसल तुर्की के दो नेताओं ने साल 1990 में चीन में उईगर मुस्लमानों की हत्या पर टिप्पणी करते हुए चीन को इन मुस्लमानों के प्रति क्रूर करार दिया था। जिसके जवाब में चीनी दूतावास ने जवाब दिया था।

चीनी दूतावास ने कहा था कि चीन की अखण्डता बहुत अमूल्य है और तुर्की के ये नेता उस अखण्डता पर चोट करने की कोशिश कर रहें है। चीन अपने सभी दुश्मनों के खिलाफ सख्त कदम उठाऐगा।

चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उईगर मुस्लमानों पर होते अत्याचार को देखते हुए तुर्की ने ट्वीट कर उनके हित में आवाज़ उठाई थी और चीन से उन्हें एक चीनी नागरिक के रुप में देखने को कहा था। यहां तक की तुर्की की एक समिति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में इस मुद्द्दे को उजागर किया था।

ना केवल तुर्की बल्कि संयुक्त राष्ट्र महासभा और दूसरे देशों का भी यही मानना है कि चीन प्रशासन देश में अन्य अल्पसंख्यकों की तरह ही उन्हें भी देश के सभी अधिकार प्रदान करे और उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक भवनाओं की रक्षा करे।

अब यह चीन की ज़िम्मेदारी है कि वह चीन में रह रहें सभी नागरिकों पर हो रहें अत्याचारों का खात्मा कर उनकी रक्षा करें और उईगर मुस्लमानों को सभी अधिकार दें। अगर आप सोच रहें है कि

इस्लामिक देशों को उईगर के हित में सवाल उठाना चाहिए 

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कौन है ये उईगर मुस्लमान तो बतां दें कि उईगर मुस्लमान मूल रुप से तुर्की के मुस्लमान है, जिनमें से इनकी अधिक जनसंख्या शिनजिंयाग क्षेत्र में रहती है लेकिन, बीते सालों में चीन में उईगर मुस्लमानों पर हो रहें अत्याचार पर तुर्की ने कई बार सवाल उठाया है, पर चीन के साथ बने अच्छे आर्थिक संबंधो के कारण तुर्की ने अब उईगर मामलों पर बोलना कम कर दिया है।

चीन के झिनझियांग क्षेत्र में रह रहें मूल रुप से तुर्की के मुस्लमान हैं जो तज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, और उज़्बेकिस्तान में रहते है। यहां उईगर मुस्लामानों की हालत कुछ कुछ तिब्बत के नागरिको जैसी ही है।

उईगर अपने क्षेत्र पर स्वशासन रखने का दावा करते है तो वहीं चीन उन जबरन कब्ज़ा करने की चाल चलता है और यही कारण है जो चीन हमेशा उईगर मुस्लमानों को खत्म करने की साज़िश रचता आया है।

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लेकिन हैरानी वाली बात तो यह है कि उईगर के साथ होती नाइंसाफी को देख कोई भी इस्लामिक देश कुछ क्यों नहीं कहता, उईगर मुस्लमानों के हक में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आवाज़ क्यों नहीं उठाता।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डे

मीडिया दरबार

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