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एक ऐसा साइको डॉक्टर जिसे मौत बांटने में मजा आता है!.. जानिए क्या है उसके 100 मर्डर करने का राज?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देशभर में रोजाना कई लोगों की हत्याएं होती है, जिनमें कारण अलग-अलग होते है, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो हर किसी को अचरज कर देगा कि ये क्या और क्यों ऐसा किया गया?

दरअसल, दिल्ली पुलिस ने बीते बुधवार, 29 जुलाई को एक ऐसे डॉक्टर को हिरासत में लिया, जिस पर 50 से ज्यादा लोगों की हत्या करने का आरोप है। इस संबंध में पुलिस ने 62 वर्षीय देवेंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया है।

मीडिया दरबार को मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि देवेंद्र 100 से अधिक हत्याओं में शामिल हो सकता है, लेकिन एक निश्चित संख्या के बारे में बताया नहीं जा सकता है, क्योंकि उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हत्या और अपहरण के कई मामले दर्ज किए गए हैं।

देवेंद्र शर्मा एक हत्या के मामले में जयपुर की सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और 16 साल जेल में बिताने के बाद वह इस साल जनवरी में 20 दिनों के लिए पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन वह मौके का फायदा उठाकर  भागकर दिल्ली आ गया। इस दौरान वह दिल्ली में मोहन गार्डन में कुछ समय तक रहा, इसके बाद वह नजफगढ़ के एक छोटे से गांव बापरौला चला गया। पुलिस को कुछ समय पहले ही उसके वहां पर छुपे होने की खबर मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

 

आरोपी डॉक्टर देवेंद्र ने बिहार के सिवान से स्नातक करने के बाद 1984 में जयपुर में एक क्लिनिक खोला, लेकिन वह ज्यादा देर चला नहीं, जिसके बाद उसने अलीगढ़ में ही 1995 में एक नकली गैस की एजेंसी खोल ली, लेकिन उसने 1994 से ही अपराध की दुनिया में अपने कदम जमाने शुरु कर दिए थे। वह गुड़गांव, जयपुर और बल्लभगढ़ से एक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के रैकेट में शामिल था, जहां से उसे एक ट्रांसप्लांट के लिए 5 से 7 लाख रुपये मिलते थे, लेकिन 2004 में पुलिस को खबर लगी और पुलिस ने देवेंद्र के साथ इस रैकेट में शामिल कई डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, देवेंद्र को मौत बांटने का शोक था, वह साइको किलर है। सन 2003 से उसने गुड़गांव, फरीदाबाद, रेवाड़ी, बल्लभगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, अलवर और जयपुर में टैक्सी चालकों को शिकार बनाना शुरु कर दिया। वह टैक्सी को अलीगढ़ के लिए बुक कराता और रास्ते में रुकवाकर उनका रस्सी से गला घोंटकर उन्हें मार डालता। इसके बाद उनके शव को हजारा नहर में फेंक देता था। पुलिस को देवेंद्र पर शक था कि वह टैक्सी चालकों को मारकर उनकी किडनी निकाल लेता था और इस संबंध में फरवरी 2004 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था, लेकिन इन हत्याओं के पीछे आखिर क्या कारण है, वो पुलिस पता नहीं लगा पाई। इसके बाद फरीदाबाद की अदालत ने उसे 2008 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

यहां पर एक सवाल उठता है कि ऐसा शातिर अपराधी बार-बार अपराध करता गया और पुलिस उसे पकड़ती रही और वह फिर अपराध में लग गया। तो यह क्या कोई खेल चल रहा था, जो पुलिस और वो अपराधी साथ में मिलकर खेल रहे थे? वहीं, एक बात और कि अपराध करने में इतना माहिर अपराधी आखिर बार-बार पुलिस के हाथों से बचकर कैसे निकल जाता था?

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अमित कुमार, मीडिया दरबार

 

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