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ऑस्ट्रेलिया में आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक आपदा नहीं, ये है कारण !

ऑस्ट्रेलिया में आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक आपदा नहीं, ये है कारण !

ऑस्ट्रेलिया
Source Social Media

पूरी दुनिया अभी कोरोना महामारी के कहर से पूरी तरह बाहर निकल भी नही पाई थी कि ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर से प्राकृतिक आपदा ने अपना कहर मचा दिया है। साल 2019 में ऑस्ट्रेलिया के भीतर पहले जंगल में लगी भीषण आग में लाखों जानवर औऱ प्राकृतिक संपदा को क्षति पहुँची, फिर कोरोना का कहर, औऱ इऩ सबके बीच अभी ऑस्ट्रेलिया में कोरोना ने मुँह भी नहीं मोड़ा था कि अचानक ऑस्ट्रेलिया पानी में डूबता नज़र आ रहा है। बीते कुछ सालों से ऑस्ट्रेलिया को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा रहा है।

सिडनी इस समय सबसे खतरनाक स्तर पर है

ऑस्ट्रेलिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाले शहर सिडनी जो न्यू साउथ वेल्स की राजधानी है। यह शहर पूरा पानी में डूब चुका है।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी सिडनी के पश्चिम में बाढ़ प्रभावित उपनगरों से सोमवार को हजारों लोगों को निकालने की तैयारी कर रहे। बता दें की ऑस्ट्रेलिया के ये इलाके भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और इसे पिछले 60 सालों में सबसे खतरनाक स्तर पर आई बाढ़ बताया जा रहा है। सबसे ज्यादा आबादी वाले न्यू साउथ वेल्स में पिछले तीन दिनों में बेमौसम बारिश ने नदियों का प्रवाह बढ़ा दिया, जिससे वहां काफी नुकसान हुआ और लोगों को अपने घर तक छोड़ने पड़े। न्यू साउथ वेल्स की आपातकालीन सेवाओं ने रविवार देर शाम एक ट्वीट में कहा, नवंबर 1961 के बाद से ये अब तक की सबसे खतरनाक बाढ़ हो सकती है।

लगभग 2 हज़ार लोगों को इलाके से निकाला जा चुका है

अधिकारियों को आशंका है कि मौसम की ये मार आने वाले बुधवार तक जारी रह सकती है। टेलीविजन और सोशल मीडिया फुटेज में दिखाया गया है कि तेजी से बढ़ते बाढ़ के पानी ने घरों को तबाह कर दिया है, वाहनों और खेत के जानवरों को बहा दिया गया है, और कई सड़कें, पुल घर और खेत जलमग्न हो गए है। आपातकालीन सेवाओं ने कहा कि लगभग 2,000 लोगों को पहले ही निचले इलाकों से निकाला जा चुका है। मौसम विभाग ने कहा कि देश के पूर्वी तट के बड़े हिस्से को सोमवार से ज्यादा भारी बारिश का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मौसम विज्ञान ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि सोमवार को और ज्यादा बारिश और तूफान आएगा।

सरकार सभी ज़रुरी कदम उठा रही है

न्यू साउथ वेल्स और पड़ोसी क्वींसलैंड के बड़े हिस्से के लिए एक गंभीर बाढ़ चेतावनी जारी की गई है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सोमवार को रेडियो स्टेशन को 2GB बताया, “ये बहुत, बहुत गंभीर और बहुत भयंकर तूफान और बाढ़ हैं, और ये बहुत जटिल मौसम प्रणाली भी है, इसलिए ये एक परीक्षा का समय है। सरकारी आंकड़ों ने दिखाया कि सिडनी में रविवार को लगभग 111 mm (4.4 इंच) बारिश के साथ साल का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया है। जबकि न्यू साउथ वेल्स के उत्तरी तट के कुछ क्षेत्रों में पिछले छह दिनों में लगभग 900 mm बारिश हुई, जो मार्च के औसत से तीन गुना से ज्यादा है।

सरकार और प्रशासन की ओर से सबी ज़रुरी कदम उठाए जा रहें है , न्यू साउथ वेल्स की एक कार्यकर्ता बेरजिकलिन  और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि यह घटना केवल एख प्रकृतिक आपदा ही है , इसके पीछे बाँध के टूट जाने का कोई कारण नहीं है। सराकार की ओर से रेस्क्यू टीम को भेज दिया गया है , जिससे मौके पर टीम द्वारा जायज़ा भी लिया जा रहा है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में 60 लाख लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगवाने का फैसला लिया गया था। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में इस भीषण बाढ़ के पीछे सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया है।

अमेरिका में संदिग्ध ने की गई फायरिंग

पहली सुर्खी – अमेरिका के एक सुपरमार्ट में फायरिंग की वारदात से लोग दहशत में आ गए है। दरअसल कोलोराडो के एक बॉल्डर इलाके में एक संदिग्ध ने फायरिंग की है। इस फायरिंग में 10 लोगों के मौत की भी पुष्टि हुई है। जानकारी के अनुसार संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है।

सीमा सामंत का इस्तीफा एक बार फिर सुर्खियों में

दूसरी सुर्खी – ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की पहली भारतीय महिला स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष सीमा सामंत का इस्तीफा एक बार फिर से सुर्खियों में है। भारतीय संसद में रश्मि सामंत के इस्तीफे की बात उठते ही एक बार फिर से ब्रिटिश पुलिस और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी ने पूरे मामले की जाँच शुरु कर दी है।

दक्षिण चीन सागर में अमेरिका ने विमान गश्त के लिए भेजा

तीसरी सुर्खी – ताइवान को लेकर चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना ने दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर से अपने विमानों की गश्त बढ़ा दी है। दरअसल अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपना जासूसी विमान RC 135 U चीन के सबसे करीब भेजा है। यह जासूसी विमान मंगलवार को चीन की सीमा से 25 समुद्री मील की दूरी पर था। अमेरिका ने इस बीच साउथ चाइना सी में अपनी गश्त बढ़ा दी है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें,

मीडिया दरबार

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