राजनीति

कांग्रेस-AIUDF गठबंधन से BJP की क्यों बढ़ी चिंता?

कांग्रेस-AIUDF गठबंधन से क्यों घबराई बीजेपी

असम में विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने यहाँ 40 उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है।

असम में 27 मार्च से पहले चरण की वोटिंग होने जा रही है। एक दिन पहले शुक्रवार को बीजेपी ने पहले और दूसरे चरण के लिए 70 प्रत्‍याशियों के नामों की घोषणा कर दी थी।

गौरतलब है कि उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट आने से पहले ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्‍यक्ष सुष्मिता देव की नाराजगी सामने आई थी। उनका आरोप है कि उम्‍मीदवारों का चयन करने में उनके कोई राय नहीं ली गई। यहां तक कि बैठकों में भी उनको नहीं बुलाया गया। हालांकि इस बात से कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपनी नाखुशी जताई है।

महिला कांग्रेस अध्‍यक्ष की नाराजगी आई थी सामने

कांग्रेस
Image Source-Social Media

असम में भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 126 विधानसभा सीटों में से 100 से ऊपर का टारगेट रखा है। लेकिन, कांग्रेस और मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के बीच हुए गठबंधन ने उसकी परेशानी बढ़ा दी है।

इसे भी पढ़े:-राज्यसभा में भी बीजेपी हासिल करेगी बहुमत का आंकड़ा ?

उधर, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध से जन्मी असम जातीय परिषद और रायजोर दल असमिया बहुल इलाकों में भाजपा के खिलाफ लोगों को एकजुट करने में जुट गई हैं।

इस बीच शनिवार को बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF ने भी भाजपा गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया। इससे भाजपा की चिंता और बढ़ गई है। मौजूदा माहौल से लग रहा है कि असम में इस बार का मुकाबला चुनाव पार्टियों के गठबंधन के बीच होगा।

एक तरफ असम गण परिषद (AGP) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) पार्टी को साथ लेकर BJP चुनाव में उतरेगी वहीं कांग्रेस ने 6 राजनीतिक दलों के साथ महागठबंधन बनाया है। इस महागठबंधन में AIUDF समेत CPI, CPM, CPM (ML) और CAA के खिलाफ बने क्षेत्रीय आंचलिक गण मोर्चा हैं। असम जातीय परिषद और रायजोर दल ने भी अपना मोर्चा बनाया है।

असम में इस बार का मुकाबला होगा दिलचस्प

कांग्रेस
IMAGE SOURCE-SOCIAL MEDIA

ऐसे में असम में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। हालांकि असम बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत दास का मानना है कि उनकी पार्टी अपनी उपलब्धियों और सुशासन के बल पर सत्ता बरकरार रखेगी।

वहीं असम की राजनीति को करीबी से समझने वाले जानकारों का कहना है कि कांग्रेस-एआईयूडीएफ गठबंधन का मध्य असम पर प्रभाव पड़ेगा। असम की कुल साढे तीन करोड़ आबादी में 34% मुसलमान हैं और 33 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटें है जहां इनकी भूमिका निर्णायक होती है।

कांग्रेस और AIUDF में सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बन पाई

कांग्रेस
IMAGE SOURCE-SOCIAL MEDIA

वहीं बंगाली मुसलमान परंपरागत रूप से पहले कांग्रेस को वोट दिया करते थे, लेकिन 2005 में AIUDF बनने के बाद इन वोटों में विभाजन हो गया। AIUDF के नेता भरोसा जताते है कि महागठबंधन BJP को शासन से हटाने में कामयाब होगा।

हालांकि, अभी कांग्रेस और AIUDF में सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बन पाई है। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हाल ही मे कहा था कि असम विधानसभा चुनाव में BJP को राज्य की सत्ता से बाहर करने के लिए वे कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सीटों की कुर्बानी देने को तैयार हैं।

तरुण गोगोई ने कभी गांधीवादी और नेहरूवादी परम्परा से समझौता नहीं किया हैं लेकिन असम में उन्होंने 15 साल सत्ता भी चलायी लेकिन अब कांग्रेस को मात्र 5 साल की भी सत्ता धुरी रास न आई और उन्होंने AIUDF के साथ गठबंधन कर लिया|

इसे भी पढ़े:-सुशांत के फैंस के लिए बड़ी खुशखबरी, यहां बना उनका पहला स्टैच्यू

सवाल यहां ये है कि कही इस तरह के गठबन्धनो से कांग्रेस अपना विश्वाश लोगो के बीच कम नहीं कर रही हैं। क्या इस तरह के गठबन्धनो से कांग्रेस गाँधी और नेहरु की विचारधारा को दरकिनार तो नहीं कर रही हैं। क्या सत्ता के लोभ में कांग्रेस अपने सिधान्तो से समझौता करने के लिए भी तैयार हैं|

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES