राष्ट्रीय

कानपुर हत्याकांड पर बोले योगी, फास्ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

 कानपुर हत्याकांड में एक 6 साल की मासूम की चढ़ाई गयी बलि, मुख्यमंत्री ने आर्थिक मदद का किया ऐलान

कल उत्तरप्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई. जिसे सुनकर दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल उठ सकता है की आखिर ये हो कैसे सकता है? क्या अभी भी रूढ़िवादी विचारधारा का अस्तित्व हमारे समाज में मौजूद है? कल कानपुर में घाटमपुर के बदरस में 6 साल की बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गयी, धारदारहथियारों से बच्ची को काटकर उसकी ह्त्या कर दी गयी. बच्ची के शरीर से अंदरूनी अंग गायब थे. बच्चीकी नानी ने बताया की तंत्र मन्त्र में बच्ची की ह्त्या को अंजाम दिया गया है. हालांकि इस बात की औपचारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी है. उस क्षेत्र के काली मंदिर के पास बच्ची का शव बरामद हुआ है. पुलिस ने जानकारी यह दी है की बच्ची की ही बिरादरी के लोगों ने उसकी ह्त्या की है, जिन्हें पुलिस ने आरोपी करार दे दिया है. बच्ची की नानी ने बताया की, उनकी नतनी की बलि चढ़ाई गयी है क्योंकि जिस दिन उसकी ह्त्या की गयी उस दिन अमावस्या थी. जबकि बच्ची के साथ बलात्कार होने का भी आरोप लगाया जा रहा है. लेकिन बलात्कार से जुडी किसी जानकारी की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है इसलिए अभी इस बात की सिर्फ आशंका जताई जा रही है. इसपूरी वारदात से गाँव में तनाव का माहौल बना हुआ है और सभी गाँववासी काफी आक्रोश में हैं. इसपूरे मामले पर दुःख जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार को 5 लाख की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. इसी के साथ साथ इस मामले की सुनवाई फास्ट्रैक कोर्ट में की जाएगी. इससे पहले के कुछ दिनों में भी उत्तर प्रदेश से ऐसे कई मामले सामने आ चुकेहैं. जिनमें हाथरस मामले ने पूरे देश में बवाल मचा दिया था. उस मामले की सुनवाई भी अभी तक जारी है पर सवाल यही है की सुनवाई से न्याय तक का सफ़र इतना लंबा क्यूँ है? क्यों समय सीमा के अंतर्गत न्याय नहीं मिलता.अगर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्योरो की एक रिपोर्ट की बात की जाए तो महिलाओं के साथ सबसे अधिक अपराध के मामलोंकी सूची में राजस्थान और उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर आते हैं. हर 16 मिनट में एक लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आता है जिनमें उत्तर प्रदेश को सबसे अव्वल स्थान दिया गया है. लेकिन अब सोचने वाली बात यह है की ये मामले महिलाओं तक सीमित न रहकर छोटी मासूम बच्चियों तक पहुँच गए हैं. 6 साल की बच्ची के साथ इस प्रकार सुलूक करके उसकी निर्मम ह्त्या, इस बात को सोंचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. पर बलात्कार को मानसिकता के साथ जोड़ने का प्रयास हमेशा किया गया है, लेकिन कानपुर में जो हुआ, एक बच्ची को बहला फुसला के ले जाना और उसकी बलि देना. हमारी नज़र में उस बच्ची का कोई कुसूर नहीं था लेकिन शायद एक कुसूर उसका था और वो यह की उसने ऐसी पुरानीविचारधारा से परिपूर्ण समाज में जन्म लिया जो अपनी संतुष्टता के लिए उसकी बलि तक चढाने को तैयार बैठे हैं. कब तक उत्तरप्रदेश का नाम इन मामलों से जुडा रहेगा, क्यों अभी तक इन मामलों के खिलाफ कोई उचित कार्यवाही नहीं की गयी, क्यों इन मामलों में कमी नहीं आती ? क्या परिवार की आर्थिक मदद से उस बच्ची को वापस लाया जा सकता है ? इस मामले को कोर्ट तक तो ले जाया जा चुका है पर क्या हर रोज़ आने वाले ऐसे मामलों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास कोई सुझाव है ? क्या अभी भी सरकार के पास इन मामलों की संख्या को छुपाने के लिए कोई दूसरा विकल्प है या फिर वही जवाब सुनने को मिलेगा, की तहकीकात अभी भी जारी है…..|

जयन्ती झा

मीडिया दरबार

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