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कामाख्या मंदिर

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कामाख्या मंदिर

मां भगवती नौ स्वरुप नौ के नौ अद्भुत है। माता भगवती अपने सभी भक्तों के कष्टों को हर लेती है। और उनके पापों का नाश करके उनको दोषमुक्त करती हूं। मां के नौ दिन नवरात्रि बस आने वाली है और नवरात्रि में नौ दिन मां की पूजा अर्चना की जाती है।  असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर स्थित कामाख्या मंदिर का भारत का प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है और इसका तांत्रिक महत्व भी है. आज हम आपको इस अलौकिक मंदिर यानी कामाख्‍या मंदिर की 14 खास बातों को बताऐंगे जिसमें सबसे पहली बात ये है की

1 कामाख्या मंदिर के  गर्भ गृह में देवी की कोई तस्‍वीर या  मूर्ति  नहीं है। कामाख्या मंदिर  में किसी भी प्रकार की मूर्ति नहीं है। केवल मां की एक योनी की प्रतिरुप अध्दभुत सुंदर प्रतिमा है।

  1. तांत्रिक सिद्धि के लिए है ये बेहतर स्‍थान माना जाता है। यह मंदिर तांत्रिक सिध्दि के लिए भी मुख्य रुप से पूजा जाता है।
  2. देवी के 51 शक्तिपीठ में है ये शामिल है। यह माता के 51 शक्ति पीठों मे शामिल है। मान्यता के अनुसार यह मंदिर देवी के लिए पूज्य माना जाता है।
  3. गर्भगृह में सिर्फ योनि के आकार की एक प्रतिमा है।
  4. मां भगवती के योनि रूप का है ये अनूठा मंदिर
  5. दुनियाभर के तांत्रिकों का है ये पूज्‍य स्‍थान है।
  6. यहां देवी की योनि रूप में पूजा होती है।
  7. यहपूरे ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु माना जाता है।
  8. यह हर महिने तीन दिनों के लिए बंद होता है।
  9. मान्यता है कि कामाख्या देवी माता सती माता की योनि यहां गिरी थी।
  10. दस महाविद्या, काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की पूजा भी कामाख्या मंदिर परिसर में ही की जाती है।
  11. यहां बलि चढ़ाने की भी प्रथा है. इसके लिए मछली, बकरी, कबूतर और भैंसों के साथ ही लौकी, कद्दू जैसे फल वाली सब्जियों की बलि भी दी जाती है।

अब आप अगर इस मंदिर के दर्शन करना चाहते है तो बता दें की कामाख्या मंदिर के दर्शन का समय भक्तों के लिए सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और फिर दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक शुरू होता है। सामान्य प्रवेश नि: शुल्क है, लेकिन भक्त सुबह 5 बजे से कतार बनाना शुरू कर देते हैं, इसलिए यदि किसी के पास समय है तो इस विकल्प पर जा सकते हैं। आम तौर पर इसमें 3-4 घंटे लगते हैं। वीआईपी प्रवेश की एक टिकट लागत है, जिसे मंदिर में प्रवेश करने के लिए भुगतान करना पड़ता है। कामाख्या मंदिर में आते ही भक्त एक अलग अलौकिक शक्ति का अनुभव करता है। कामाख्या मंदिर में दर्शन करने के लिए कई मार्ग जैसे रेल मार्ग, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग भी उपलब्ध है।

रूचि पाण्डेय

मीडिया दरबार

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