विचार

किसान आन्दोलन 96 दिन बाद क्या बढती गर्मी से पड़ने लगा हैं ठंडा ?

किसान आन्दोलन पे पड़ने लगी मौसम की मार

जब मैं छोटी थी तो मेरे दादाजी एक बात कहा करते थे की बेटा ये सर्दी न अमीरों की होती हैं और गर्मी गरीबों की लेकिन जैसे जैसे मैं बड़ी हुई और खुद से चीज़ों को देखना और फिर उन्हें अपनी समझ से समझना शुरू किया तो पता चला की चाहे सर्दी हो या गर्मी सब कुछ अमीरों की होती हैं गरीबों का तो हर मौसम में एक सा हाल होता हैं गर्मी में लू से मरो और सर्दी में ठंढ से|

अब आप सोच रहे होंगे की मैं देश में अमीरी गरीबी की बढती खाई के बारे में आज आपसे बात करने वाली हूँ तो नहीं ऐसा नहीं हैं अमीरी गरीबी की खाई की बाते राजनेताओं और उनकी राजनीती के लिए ही रहने देते हैं|

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क्यों किसी का रोजगार छीनना वैसे ही कुछ खास अच्छे दिन नहीं चल रहे रोजगार के  हाल में नया काम मिला था ट्विटर पर लेकिन अब तो बिचारे का ट्विटर पर ट्रेंड भी बंद हो गया हैं|

किसान आन्दोलन का ट्रेंड हैं जारी

किसान आन्दोलन
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अरे ट्रेंड से याद आया हमें तो देश में शुरू हुए किसान आन्दोलन की बात करनी थी हां तो मुद्दे पे आते हैं आज से लगभग 96 दिन पहले शुरू हुआ ये आन्दोलन अभी तक ट्रेड में बना हुआ हैं भाई मानना पड़ेगा इतने दिनों तक तो रसोड़े में कौन था वाला विडियो भी चला गया उसे तो छोड़ों अब तो पावरी भी पुरानी हो गई लेकिन ये किसान आन्दोलन का मुद्दा हैं की ख़त्म ही नहीं होता|

या यू कहे की इसे ख़त्म होने नहीं दिया जा रहा क्युकी अगर ये ख़त्म हो गया तो इसके बलबूते पर जो राजनीतिक ट्रेंड चलाये जा रहे हैं उनका क्या होगा अब ये कोई मीम बनाने जितना आसन थोड़े ही हैं की रोज़ बदल दे देखो भैया इसमें लगती हैं मेहनत, दिमाग, मतलब अब इतने दिनों की प्लानिंग को ऐसे कैसे हाँथ से जाने दे कोई?

तो इसलिए अब जब किसान अन्दोलान में लोगों का इंटरेस्ट कम होने लगा तो इस आन्दोलन के संचालको ने भी अब एक से एक नायब तरीके निकालने शुरू कर दिए हैं भीड़ जुटाए रखने के जिन्हें सुन कर आप भी दंग रह जाएँगे दरसल सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों की घटती तादात से परेशान इस आन्दोलन के नेताओं ने पहले तो यहाँ होने वाले लंगरों की संख्या बढ़ा दी|

किसान आन्दोलन में भीड़ बनाये रखने के लिए बढाई गई लंगरों की संख्या

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पहले जहा 50 मीटर के दायरे में एक लंगर चलाया जाटा था अब वहाँ ऐसे 4 लंगर लगाये जा रहे हैं और वो भी हलवा पूरी और सब्जी वाले लंगर नहीं यहाँ के इन लंगरों में आपको चाय काफी, ड्राई फ्रूट्स, जलेबी, दूध, बर्गर, पिज़्ज़ा, कोल्डड्रिंकस, मतलब यूं समझ लीजिये की आप जिसकी डिमांड करे सब यहाँ हाज़िर हैं|

और अगर ये सब खा के आपका वजन बढ़ जाए तो उसका भी पूरा इंतज़ाम हैं यहाँ जिम के साथ आपको यहाँ प्रोटीन शैक भी मिलता हैं तो मतलब पहले जैम के खाइए फिर जिम कर के फीट हो जाइये मतलब जो करना हैं करिए लेकिन बस यहाँ बैठे रहिये और ऐसा भी नहीं हैं की आपकों सड़क पर धुप में बदन जलाना हैं यहाँ आपको मुलायम गद्दे, एसी सब दिया जाता हैं मतलब फ्री में यहाँ आपका Unlimited Night And Days का हॉलिडे पैकेज चल रहा हैं एन्जॉय करिए|

किसान आन्दोलन में क्यों कम हुए किसान

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इतने के बाद भी दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानो की संख्या अब दिन पर दिन घटती ही चली जा रही हैं मतलब इतने राजसी सुख के बाद भी इन लोगों से सीमा पर नहीं बैठा जा रहा| और ये हाल सिर्फ दिल्ली के सिंघु बोर्डर का नहीं हैं हरियाणा के कुंडली बोर्डर यूपी के और गाजीपुर बोर्डर का हाल भी कुछ ऐसा ही हैं|

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किसान आन्दोलन के नेताओं की तमाम कोशिशो के बाद भी अब ये सरे बोर्डर पहले के मुकाबले खाली नज़र आने लगे हैं, अब ऐसे में इस आन्दोलन के नेताओं से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उनका इपर क्या कहना हैं वो भी आपको बता देते हैं|

किसान आन्दोलन के नेताओं से इस बारे में पूछे जाने पर पहले तो उन्होंने इसे अपनी नई रणनीति का हिस्सा बताया उन्होंने कहा की उन्हें पता है कि किसान आंदोलन लंबा चलना है दूसरी तरफ हमें खेती भी करनी है इसलिए किसान रोटेशन में आकर किसान आन्दोलन में हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन जब भी जरूरत होगी तो एक आवाज पर सभी किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंच जाएंगे|

नरेश टिकैत के बेटे ने बताया ये कारण

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इसे लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के बेटे गौरव टिकैत का कहना है कि संख्या के बल पर किसान आंदोलन का आंकलन नहीं करना चाहिए, किसान खेत, पंचायत और आंदोलन हर जगह ध्यान दें रहे हैं इसलिए शिफ्ट में काम कर रहे हैं|

अब जो भी हो इसके पीछे का असली कारण लेकिन इतना तो तय हैं की बढती गर्मी और बढ़ते चुनावी पारे के कारण कही न कही इस किसान आन्दोलन का का रंग और ढंग दोनों ही बदलता नजर आ रहा हैं अब भाई बात ऐसी हैं गर्मी पर तो अब किसी का जोर हैं नहीं और रही बात चुनाव की तो राजनीतिक पार्टिया अब चुनाव प्रचार में लगी हैं|

तो अब कुल मिलाकर किसान आन्दोलन का सारा दारोमदार अब यहाँ चलने वाले लंगरों और आरामदायक एसी वाले टेंटों पर निर्भर करता हैं शायद इसे से बची कुछ भीड़ टिक सके बाकि तो जो होगा वो पता लगिए जाएगा|

और हमको पता लगेगा तो हम आपको तो जरुर बताएगे लेकिन  फिलहाल अपना ध्यान रखियेगा इस बार गर्मी सुन रहे हैं ज्यादा पड़ने वाली हैं और तो और अब सबके पास एसी की सुविधा तो हैं नहीं तो पुराना वाला कूलर निकल के पेंट वेंट कर लीजिये|

 

रिपोर्ट – पूजा पाण्डेय 

मीडिया दरबार 

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