धार्मिक

कुम्भ मेला, अंतरिक्ष से नज़र आने वाला सबसे साफ़ दृश्यात्मक नज़ारा

कुम्भ मेला-विश्व के सबसे बड़े मेले में कुम्भ मेले को एक माना जाता है जिसकी अंतरिक्ष से तस्वीरे सार नज़र आ सकती है ।

कुम्भ के मेले में बिछड़े भाइयों की कहानी काफी बार सुनी होगी आपने लेकिन असलियत में जब दुनिया के इस सबसे बड़े मेले में कोई गुम होता है तो कैसे वापस मिलता है ये जानने की कोशिश अगर आपने अभी तक नहीं की है तो आज मैं ये आपको बताउंगी।  यही नहीं कुम्भ का मेला क्यों इतना ख़ास है, असल वजह क्या है इस बात की जानकारी भी आने वाले कुछ मिनटों में मैं आपको दूंगी।

110 मिलियन  श्रद्धालुओं के साथ 49 दिन तक उत्तरी भारतीय शहर अलाहाबाद में कुम्भ का मेला लगता है।  लेकिन लाखों की भीड़ में गुम हुए हज़ारों लोगों का गुम होना भी इस मेले में आम बात है।  इस मेले में “भूले भटके शिविर” नामक एक कैंप हमेशा लगा होता है।  इस कैंप के आयोजक के अनुसार गुम हुए लोगों में सबसे ज्यादा 60 साल की महिलायें होती हैं।  इस कैंप में अभी तक लगभग 1.5 मिलियन परिवारों को एक साथ मिलाया है।  “मेरा नाम एक और भार पुकारिए न” यह विनती गुम हुए परिवार बार बार करते हैं।  आयोजक के अनुसार, इस कैंप में एक सुबह लगभग 560 लोग गुम हुए और उनमें से 510 लोगों को उनके परिवारों से वापस मिलवा दिया गया।

इस कैंप से जुड़े लगभग 25 वोलेंटियर्स पूरे मेले में तैनात रहते हैं और जहाँ कोई गुमशुदा व्यक्ति मिलता है उसे उसके परिवार से मिलवाने की पूरी कोशिश की जाती है। इस मेले में न सिर्फ “भूले भटके शिविर” के सहारे लोग अपने परिवार को ढूंढ पाते हैं बल्कि पुलिस द्वारा भी एक कैंप चलाया जाता है जिसका नाम है खोया पाया केंद्र।

इस मेले का मुख्य उद्देश्य और आधार गंगा यमुना सरस्वती के संगम में स्नान करना है जिस से मोक्ष की प्राप्ती हो पाए।  यह इकलौता ऐसा मेला है जहाँ श्रद्धालुओं की अदृश्यात्मक भीड़ को अन्तरिक्ष से देखा जा सकता है।  वर्ष 2019 में भारत के उच्च संकल्प पृथ्वी इमेजिंग उपग्रह ने अन्तरिक्ष से दिखने वाले इस भव्य मेले के दृश्य को कैद किया जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा प्रदर्शित किया गया।  जिसे देखकर किसी की भी आँखें फटी की फटी रह जाएगी।  104 सेटेलाईट की मदद से त्रिवेणी संगम और यमुना ब्रिज आसानी से नज़र आता है।  इस मेले की ये तस्वीर सेटेलाईट तस्वीर की सबसे पहली हाई रेसोल्यूशन तस्वीर है।  यह मेला रोम के वेटिकेन शहर से बड़े क्षेत्रफल पर यानी 32 स्क्वायर किलोमीटर तक फैला हुआ है।  वहीँ स्नान गृह लगभग 5 किलोमीटर के क्षेत्रफल पर फैले हुए हैं।  सरकार के अनुसार लगभग 7 करोड़ रुपये की धनराशी इस मेले की आधारिक संरचना पर खर्च की गयी है।  इसके अलावा 2019 में सरकार ने इस मेले पर कुल 4 हज़ार 236 करोड़ की धनराशी खर्च की है।  कुम्भ के मेले को अर्ध कुम्भ मेले के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसे 6 साल के अंतराल पर मनाया जाता है और 12 साल के अंतराल पर मनाये जाने वाले कुम्भ के मेले को महा कुम्भ का मेला कहा गया है।  इस भव्य मेले के सुन्दर दृश्य किसीको भी मनमोहित कर देंगे।  भारत देश में यह एकमात्र ऐसा मेला है जो विश्वभर में प्रसिद्ध है।  न सिर्फ भारत से संतों और साधुओं की टोली मोक्ष के स्नान के लिए इस मेले में आती है बल्कि विदेशों से भी कई लोग इस भव्य दृश्य को देखने के लिए उत्सुकता के साथ भारत के इस भव्य मेले में कदम रखते हैं।  इस कुम्भ मेले को अधिकतर संत महागुरुओं की अदृश्यात्मक भीड़ से ही जाना गया है जिसका महत्व जानने के लिए दुनिया के कोने कोने से श्रद्धालुओं की टोली आस्था और मोक्ष पाने की आस लिए इस महा मेले में प्रवेश करते हैं।  2028 में अगले कुम्भ मेले का दृश्य, इन जानकारियों को जानने के बाद आप ज़रूर देखना चाहेंगे।  पर सावधानियों के साथ इस दृश्य को देखने का लुफ्त उठाइएगा। क्योंकि इस मेले में न गुम होने का उपाय एकमात्र सावधानी ही है, वरना सावधानी और हटी दुर्घटना घटी।

जयन्ती झा

मीडिया दरबार

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