अंतर्राष्ट्रीय

कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान ने चली नापाक चाल, जानिए अब भारत कैसे देगा इसका करारा जवाब!

पाकिस्तान की जेल में पिछले चार सालों से बंद कुलभूषण जाधव मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के लिए भारत की ओर से की गई दो सलाहकार मुहैया कराने की मांग को मान लिया, लेकिन जब पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास से दो अधिकारी कुलभूषण जाधव से मिलने गए तो पाकिस्तान ने अपनी नापाक चाले चलनी शुरु कर दी।

गुरुवार, 16 जुलाई को कुलभूषण जाधव से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान ने दो भारतीय अधिकारियों को जाधव से अकेले में नहीं मिलने दिया। पूरी मुलाकात में उनके साथ पाकिस्तान के अधिकारी भी मौजूद रहे। यहां तक की जिस जगह पर अधिकारियों और जाधव की मुलाकात हुई, वहां मुलाकात की रिकॉडिंग के लिए कैमरे तक लगाए गए थे।

इससे पहले पाकिस्तान ने सशर्त सिर्फ एक ही सलाहकार को जाधव से मिलने की मंजूरी दी थी, जिस पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया था। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से यह मांग की थी कि बिना किसी शर्त के जाधव से दो भारतीय अधिकारियों को मिलने के लिए अनुमति प्रदान की जाए। इसमें पाकिस्तान ने एक नया पैंतरा खेलते हुए जाधव से दो सलाहकारों को मिलने की मंजूरी तो दे दी, परंतु भारत सरकार की अन्य मांगों को स्वीकार नहीं किया।

आइए समझते हैं कि किन मायनों में यह मुलाकात महत्वपूर्ण और बेहद ही जरुरी थी-

कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने साल 2017 में जासूसी के आरोप लगाते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। यहां पर ध्यान देने वाली बात अब यह है कि इसके खिलाफ रिव्यू पिटिशन दायर करने के लिए जाधव के पास अब केवल 20 जुलाई तक का ही समय है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने जाधव मामले में कहा था कि जाधव ने अपनी फांसी की सजा के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने से इनकार कर दिया है। जाधव नहीं चाहते हैं कि उन्हें फांसी देने से रोका जाए। तो वहीं, इसके जवाब में भारत सरकार ने कहा था कि जाधव पर दबाव बनाया गया और उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है। ऐसे में भारतीय अधिकारियों की जाधव से यह मुलाकात जरूरी थी। ताकि जाधव को किसी भी तरह से फांसी के फंदे से बचाया जा सकें, लेकिन गुरूवार की मुलाकात के बाद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि मुलाकात के दौरान जाधव काफी परेशान दिख रहे थे।

आइए जानते हैं कि कैसे कुलभूषण जाधव से मुलाकात में पाकिस्तान ने अटकाए रोड़े-

सबसे पहला रोड़ा कि जाधव से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के अधिकारी भी मौजूद रहे, जिसका दोनों भारतीय अधिकारियों ने कड़ा विरोध किया। इसके बाद भी पाकिस्तान के अधिकारी उस जगह से नहीं गए। फिर मुलाकात वाली जगह पर बातचीत की रिकॉडिंग तक हो रही थी, जिस पर भारतीय अधिकारियों ने ऐतराज किया, इसके बाद भारतीय अधिकारियों ने मीटिंग को बीच में ही छोड़कर जाना ज्यादा उचित समझा, क्योंकि पाकिस्तान के द्वारा इस तरह का इंतजाम किया गया था कि भारतीय अधिकारी जाधव से सही से बात ही नहीं कर पा रहे थे। साथ ही पाकिस्तान के अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों को जाधव से किसी भी तरह की कानूनी सहमति और लिखित में बयान तथा हस्ताक्षर लेने से रोक दिया। इस पूरे मसले पर पाकिस्तान में भारतीय दूतावास में प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, आईसीजे के फैसले को पूरी तरह से लागू नहीं किया और मुलाकात के दौरान अपनी मर्जी चलाई, जो सरासर अनुचित है।

वहीं, जाधव मामले पर आईसीजे ने पिछले साल जुलाई में कहा था कि पाकिस्तान को जाधव को दोषी ठहराए जाने और सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करना चाहिए तथा उसे बिना देरी किए भारत को राजनयिक पहुंच प्रदान करानी चाहिए। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से 12 बार काउंसलर एक्सेस की मांग की, लेकिन पाकिस्तान ने भारत की मांग को लंबे समय तक ऐसे ही लटकाए रखा।

आइए जानते हैं कि अब भारत के पास क्या विकल्प बचे हैं-

पाकिस्तान ने ऐसा करके अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, आईसीजे के फैसले का उल्लंघन किया है। इससे साफ है कि पाकिस्तान इस मसले पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और भारत की जाधव को बचाने की कोशिशों में लगातार अड़ंगे लगा रहा है। ऐसे में भारत जल्द ही आईसीजे की ओर रुख कर सकता है, क्योंकि अब जाधव को खुद को फांसी की सजा से बचाने के लिए 20 जुलाई तक का ही रिव्यू पिटिशन दायर करने का समय बचा है। ऐसे में समय काफी कम है और मामला बहुत गंभीर है।

साथ ही पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच हुई 1961 की वियना संधि का भी उल्लंघन किया है। इसी वियना संधि के तहत भारत संधि के आर्टिकल 36 के पैरा 1ए के हिसाब से बिना किसी रोक-टोक के काउंसलर एक्सेस की मांग कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत, पाकिस्तान के खिलाफ इसी आर्टिकल को अपना प्रमुख हथियार बनाएगा और पाकिस्तान को घेरने की कोशिश करते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। भारत आईसीजे में वियना संधि के आर्टिकल 36 से मिलने वाले फ्री यानि की बिना किसी रोक-टोक के काउंसलर एक्सेस मिलने की बात रखेगा, जबकि पाकिस्तान ने ऐसा नहीं होने दिया। इस तरह से जाधव के अधिकारों का हनन हुआ और पाकिस्तान ने भारत के साथ वादाखिलाफी की, जिसका अंजाम पाकिस्तान को आईसीजे में भुगतना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि भारत इस गंभीर मसले पर क्या रुख अपनाता है? और कितनी जल्दी इस पर निर्णय लेता है? ताकि जाधव को बचाने में देर न हो जाए।

अमित कुमार, मीडिया दरबार

देश और दुनिया की ताज़ातरीन मामलो के लिए जुड़े रहिये- मीडिया दरबार

शेयर करें
Live Updates COVID-19 CASES