धार्मिक

केदारनाथ धाम से पांडवो का क्या है संबंध ?

केदारनाथ धाम से पांडवो का क्या है संबंध ?

केदारनाथ

 

कोरोना काल के बीच भी बाबा केदारनाथ धाम को खोल दिया गया है। हिन्दू धार्मिक आस्था में केदारनाथ बहुत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता के अनुसार, केदारनाथ धाम को भगवान शिव का आवास माना जाता है। कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने करवाया था। इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी सुनने को मिलती है जो कुछ इस प्रकार है-

कथा के अनुसार जब महाभारत का युध्द समाप्त हो गया था तब पाँचो पांडव और श्रीकृष्ण साथ बैठकर युध्द की समीक्षा कर रहें थे। उस समय श्रीकृष्ण ने पांडवों से कहा था कि भले ही इस युध्द में तुम्हारी जीत हुई हो पर ये भी सच है कि तुम सभी अपने भाई बंधुओ की हत्या के लिए पाप के भागी हो और अब इस पाप से मुक्ति पाना मुश्किल है। तब श्रीकृष्ण की बात सुन कर पांडवों ने विचलित हो कर पाप से मुक्ति पाने का समाधान पूछा। पांडवो द्वारा समाधान पूछने पर श्रीकृष्ण ने जवाब दिया था कि तुम्हें इस पाप से केवल महादेव ही मुक्ति दिला सकते है। तुम सभी महादेव की शरण में जाओं तब पाँचो पांडव महादेव से मिलने निकले। जब भगवान शिव को ये पता चला कि पाँचो पांडव उनसे मिलने आ रहें है तो महादेव ने अपना स्थान बदल लिया क्योंकि वे पाँचो पांडवो पर क्रोधित थे, क्योंकि वे शुरु से ही नहीं चाहते थे कि पांडव अपने भाई बंधुओं का वध करें।

पर पाण्डव भी मन ही मन ये ठान चुके थे कि हर हाल में उन्हें महादेव को पाना है और उनसे अपनी मुक्ति का मार्ग जानना है। महादेव का पीछा करते हुए पाण्डव केदरानाथ पहुंचे। महादेव ने देखा कि पाण्डव केदरानाथ आ गये हैं तो उनसे बचने के लिए उपाय ढूंढने लगे, तब महादेव की दृष्टि पशुओं के झुण्ड पर गई और वह अपनी पहचान छुपाने के लिए बैल बनकर झुण्ड में शामिल हो गऐ।

जब पाँचो भाई महादेव को ढूंढ पाने में असफल होने लगे तो भीम ने विशालकाय रुप में दो पडाड़ों के बीच अपना पैर रख दिया जिससे डर के मारे सभी जानवर इधर उधर भागने लगे। लेकिन महादेव को भीम के पैरो से निकलना ठिक ना लगा और वो अपने स्थान पर ही खड़े रहें। और पाँचो पांडवो ने महादेव को पहचान लिया। बस फौरन महादेव बैल के रुप मे ही धरती में समाने लगें, तब भीम ने फौरन उन्हें रोकने के लिए उन्हें कूल्हें से पकड़ लिया। महादेव को विवश होकर प्रकट होना पड़ा और पाण्डवों की भक्ति और इच्छाशक्ति को देखते हुए उन्हें पाप से मुक्त करना पड़ा। आज भी इस घटना के प्रमाण शुरू केदारनाथ का शिवलिंग बैल के कुल्हे के रूप में मौजूद है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

 

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