राष्ट्रीय

केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट पर विमान हादसा….

साल 2020 भारत और विश्व के लिए कुछ खास नही चल रहा है, आये दिन कही ना कही से कुछ ना कुछ बुरी खबर आती ही रहती है. अगर भारत कि बात करे तो देश के लोग कई तरह की समस्याओ से जूझ रहे है, पहले कोरोना वायरस का कहर फिर देश के अलग अलग राज्यों में बाढ़ कि समस्या और उस बाढ़ से लाखो एकड़ फसलो का ख़राब हो जाना और कल फिर दुःख भरी खबर केरल से आई जहा केरल के कोझिकोड में कालीकट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान लैंडिंग करने के दौरान फिसल गया और खाई में गिर गया। इस भीषण हादसे में दो पायलट समेत 18 लोगों की मौत हो गई, हालांकि राहत वाली बात ये रही कि हादसे में सभी क्रू मेम्बर सुरक्षित बच गए। इस विमान के पायलट कैप्टन दीपक वसंत साठे और कैप्टन अखिलेश कुमार थे. डीजीसीए के मुताबिक एअर इंडिया एक्सप्रेस AXB1344, बोइंग 737 दुबई से कालीकट आ रहा था. विमान में 190 लोग सवार थे. भारी बारिश के कारण रनवे पर उतरने के बाद विमान फिसल गया और घाटी में गिर गया. फिर विमान दो हिस्सों में टूट गया. विमान में 190 लोग सवार थे. इनमें 184 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे. साथ ही यात्रियों में 10 बच्चे भी शामिल थे.  नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि  एयर इंडिया की दुबई-कालीकट उड़ान (AXB -1344) शुक्रवार की शाम 7.41 बजे लैंडिंग करते वक्त फिसल गया क्यूंकि  रनवे पर विजिबिलिटी कम थी और रनवे पर पानी भरा हुआ था। फिसलने के बाद विमान 35 फीट की खाई में जा गिरा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए कोझिकोड में हुए विमान हादसे को लेकर दुख जताया है। साथ ही बताया कि ये हेल्पलाइन नंबर हफ्ते के सातों दिन चौबीस घंटे खुली रहेंगी। जारी हेल्पलाइन नंबर आपकी स्क्रीन पर फ़्लैश हो रहे है. हेल्प लाइन नंबर हैं- 1800 118 797, +91 11 23012113, +91 11 23014104, +91 11 23017905, Fax: +91 11 23018158.  दुबई में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, नंबर हैं- 056 546 3903, 0543090572, 0543090572, 0543090575. केरल का कोझिकोड एअरपोर्ट एक टेबल-टॉप एअरपोर्ट है जहा बड़े विमानों कि लेंडिंग हमेशा चुनौतीपूर्ण रहती है इसलिए इन एअरपोर्ट से हादसों कि खबर आती रहती है. लेकिन सरकार को इन हादसों को कम करने के लिए सभी सुरक्षा मानको का इस्तेमाल करना चाहिए. जिस से कि इस तरह के दुखदायी हादसों को कम करने में मदद मिले.

अब हम आपको बताते है कि क्या होते है टेबल – टॉप एअरपोर्ट?

टेबलटॉप रनवे उन एअरपोर्ट को कहा जाता है, जिन एअरपोर्ट का निर्माण पहाड़ी क्षेत्र में किया जाता हैं, यह रनवे आम एयरपोर्ट के रनवे से काफी छोटा होता  हैं. इन रनवे पर प्लेन उतराने वाले पायलट खास तरह से प्रशिक्षित होते हैं. क्योंकि इन रनवे के दोनों तरफ या एक तरफ गहरी खाई होती है, जिससे यहां हादसे की आशंका काफी ज्यादा रहती है. बारिश और धुंध के मौसम में ऐसे रनवे पर दुर्घटनाओं की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है.

अब हम आपको बताते है भारत में प्रमुखत: कहा-कहा है टेबल टॉप रनवे?

भारत में टेबलटॉप रनवे यानि पहाड़ियों पर बने एयरपोर्ट कि संख्या मुख्य तौर पर तीन है.जिनमें केरल का कालीकट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (कोझिकोड) जहा ये हादसा हुआ, मंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट कर्नाटक और मिजोरम में लेंगपुई एयरपोर्ट शामिल है.

आईये जानते है कि क्या इस से पहले भी किसी टेबल टॉप रनवे पर कोई विमान दुर्घटना ग्रस्त हुआ है या यह पहला मामला है ?

इससे पहले साल 2010 मंगलोर इंटरनेशल एयरपोर्ट पर दुबई से आ रहा एयर इंडिया का विमान रनवे पर फिसल कर गहरी खाई में जा गिरा था. इस हादसे में 158 लोग मारे गए थे. विमान में क्रू मेंबर्स समेत 166 लोग सवार थे.

आईये समझते है कि टेबल टॉप रनवे के लिए तय सुरक्षा मानक क्या है ?

टेबल टॉप रनवे के लिए लगभग 240 मीटर लम्बा बफर होना जरूरी है, और रनवे के दोनों तरफ लगभग 100 मीटर जगह होनी चाहिए.

अब थोडा सा ये जानने कि कोशिश करते है कि क्या कोझिकोड के कालीकट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सभी सुरक्षा मानको का पालन हो रहा था?

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री द्वारा गठित सेफ्टी एडवाइजरी कमेटी के सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन ने जून 2011 में सिविल एविएशन सेफ्टी एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन को चिट्ठी लिखी थी. रंगनाथन के मुताबिक- कालीकट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (कोझिकोड) में टेबलटॉप रनवे है, जिसमें ढलान है, रनवे के अंत में जो बफर जोन है, वह भी छोटा है. रंगनाथन के अनुसार टोपोग्राफी के हिसाब से रनवे के बाद 240 मीटर का बफर जोन होना चाहिए, पर कोझिकोड में कालीकट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में 90 मीटर ही है। हालांकि, इसे डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने ही परमीशन दी थी। इसके अलावा रनवे की साइड में भी 75 मीटर की जगह थी, जबकि इसमें 100 मीटर की अनिवार्यता होती है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि DGCA ने परमिशन दी थी ? क्यों नही एडवाइजरी कमेटी के सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन कि बात सुनी गयी?

मीडिया दरबार हादसे में हता-हत हुए सभी लोगो के परिजनों के साथ अपनी संवेदना व्यक्त करता है और सरकार से गुहार लगता है कि सभी एअरपोर्ट पर सुरक्षा मानको का सही से पालन हो इसके लिए जवाबदेही तय कि जाये. जिस से लोगो के जीवन को बचाया जा सके और भविष्य में इस तरह के हादसे ना हो.

राकेश मोहन सिंह – मीडिया दरबार

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