अंतर्राष्ट्रीय

के.पी. ओली का दावा- नेपाली है राम और नकली है भारत की अयोध्या!! बनाया खुद का मज़ाक !!

इसमें कोई नयी बात नहीं है कि नेपाल के प्रधानमंत्री, kp ओली अपनी राजनीतिक बयानबाज़ी मे भारत को हमेशा से शामिल करते आएं हैं. इस बार तो उन्होंने बिना सिर-पैर की टिप्पणी कर के, अपने ही घर में घिर चुके हैं. दरअसल 13 जुलाई, सोमवार को कवि भानुभक्त आचार्य की 206वीं जयंती पर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास ब्लूवाटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री kp ओली ने यह बेतुका दावा किया है कि, “भगवान् श्री राम नेपाली हैं और भारत की अयोध्या नकली है.”

यही नहीं, प्रधानमंत्री ओली का आरोप है कि भारत ने नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से अत्याचार किया और उनके इतिहास को तोड़-मरोड़ कर नया चेहरा दिया है. उनका कहना है कि, “हम अब भी यही मानते है कि हमने भारत के राजकुमार को सीता दी है. जबकि ऐसा नहीं है, हमने तो भारत देश को नेपाल का  राजकुमार दिया है. अयोध्या नेपाल मे एक गाँव है जो बीरगंज के थोड़ा पश्चिम में स्थित है उन्होंने कहा है की भारत का अयोध्या वास्तविक नहीं है और ज्ञान-विज्ञान की उत्पत्ति भी यही हुई थी”. इसके साथ ही ओली ने भारत से अप्रत्यक्ष रूप से सवाल किये हैं कि, “अगर राम भारत की अयोध्या के होते तो उस दौर मे जब वाहन उपलब्धि नहीं हुई थी,  तो सीता से शादी करने जनकपुर कैसे आते?”

हालांकि, इनकी इस बेतुकी बातों का दोनों ही देशों ने ना सिर्फ मज़ाक बनाया बल्कि, सोशल मीडिया के ज़रिये बड़े नेताओं ने भी जमकर जवाब दिया है. जहाँ नेपाल के पूर्व प्रधानमन्त्री, बाबू राम भट्टराई ने पी.एम ओली को व्यंगतर्क मे ट्वीट करते हुए लिखा हैं, “आदि-कवि ओली द्वारा रचित कल युग की नई रामायण सुनिए, सीधे बैकुंठ धाम की यात्रा करिए.”

वहीँ दूसरी ओर नेपाली लेखक और पूर्व विदेश मंत्री, रमेश नाथ पांडे ने भी अपनी आपत्ति को ज़ाहिर करते हुए लिखा है, “धर्म राजनीति और कूटनीति से ऊपर है, यह एक बड़ा भावनात्मक विषय है ऐसी तर्कहीन बयानबाज़ी से आप केवल शर्मिंदगी महसूस करते. अगर असली अयोध्या बीरगंज के .हैं  पास है तो फिर सरयू नदी कहाँ है?”

बता दें, इससे पहले भी पी.एम ओली ने एक बयान में कहा था कि उनको कुर्सी से हटाने की साजीशे दिल्ली मे बैठे कुछ लोगों द्वारा रची जा रही है. उस वक़्त भी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) और नेपाल के पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्प दहल कमल प्रचंड ने पी.एम्. ओली को उनके जुबां कंट्रोल कर के तर्क से भरे बयां देने की हिदायत दी थी. लेकिन एक बार फिर प्रधानमंत्री ओली ने भारत को अपने निशाने पर रखा है. इससे तो ऐसा लग रहा है जैसे के.पी ओली अपनी जाती हुई सत्ता देख पूरी तरह से बौखला गए हैं और खुद की सरकार बनाए रखने के उद्देश्य से ही लोगों का ध्यान बाटने कि कोशिश कर रहे हैं. इसके साथ ही ख़बरों कि माने तो नेपाली सरकार चीन के राजदूतों से लगातार मीटिंग्स कर रही हैं.

खैर, आपको क्या लगता है, क्या नेपाल भी अब पाकिस्तान और चीन  समान भारत के खिलाफ़ साजिश रच रहा है? क्या नेपाल भारत से कुर्तीक रिश्ते खराब कर चीन को किसी तरह के अंतराष्ट्रीय फायदे देना चाहता है?

रितेशु सिंह जैसवार – मीडिया दरबार

देश-विदेश की तमाम ख़बरों के लिए जुड़े रहे मीडिया दरबार के साथ.

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