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कोरोना से जंग हारने के बाद इस देश के नेता के साथ जो हुआ वो आप सोच भी नहीं सकते !!

कोरोना से जंग हारने के बाद इस देश के नेता के साथ जो हुआ वो आप सोच भी नहीं सकते !!

इटली के इतिहास से। बात है सन् 64 ईस्वी की जब जुलाई का महीना था इटली में अभी की राजधानी रोम में भयंकर आग लग गई। लगी इस भयंकर आग से लोगों का घर तहस नहस हो गया। लोग दरदर भटकने को मजबूर हो गए। लेकिन तत्कालीन राजा नीरो को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। नीरो अपने ऐशो आराम में अपने महल में व्यस्त था। नीरो जिसने केवल 17 साल की उम्र में ही रोम की राजशाही गद्दी को हथिया लिया था। नीरो को अगर कोई भी व्यक्ति लोगों की मदद करने की सलाह देता तो नीरो उसे काल कोठरी में बंद करवा दिया करता। उसकी हत्या करवा दिया करता था।

रोम में राजा नीरो अपने भोगविलास में लीन था

रोम जलता रहा और नीरो रोम से दूर अपनी आराम की ज़िंदगी में लीन था , दिन बीते नीरो वापस लौटा ,तब नीरो ने लोगों के बीच साम्प्रदायिक भावना का दुष्प्रचार करवा कर लोगों के बीच फूट डाल दी, और आगजनी की आड़ में खेला लोगों की मौत का खूनी खेल। नीरों ने जलकर खाक हुई जगहों पर लोगों के उजड़े आशियाने नहीं, बल्कि अपना ही महल बनवाया। ये बात तो है रोम के इतिहास की पर आज भी बहुत से ऐसे शासक और नेता आज देखने को आसानी से मिल सकते है। आज हम आपको कई देशों के बहुत से शासकों के बारे में बताऐंगे जिन्होंने जनता के हित की अनदेखी कर खुद को भोग विलास में लीन कर लिया, और बाद में खामियाजे के तौर पर उन्हें इस्तिफा तक देना पड़ा।

रोम में राजा नीरो अपने भोगविलास में लीन था

दुनिया में फैले कोरोना वायरस को एक साल पूरा हो गया है। करोड़ो संक्रमण , मौते, और गिरती अर्थव्यवस्था को हम अब तक झेल रहें है। फैली इस तबाही का ज़िम्मेदार कौन है। लाखों लोग जिनकी मृत्यु हो रही है उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है। लेकिन अगर कोई नेता सत्ता के नशे में लीन अपनी ही मनमानी करें  तो तो क्या उसका सत्ता की कुर्सी पर बैठना सही होगा। कई देशों ने अब जवाब मांगना शुरू कर दिया है। भारत में भी हमें इसी प्रकार से लोग मांग करते सोशल मीडिया पर नज़र आ रहें है। इसी श्रेणी में सबसे

– पहला, देश है ब्राज़ील , जहाँ उपरी सदन  यानी सेनेट ने राष्ट्रपति बोल्सोनारो के खिलाफ जाँच की मांग की है। यहां कोरोना से मरने वालों की संख्या में रोज़ाना इज़ाफा देखा जा रहा है, स्थिति बेकाबू होती जा रही है। बोल्सोनारो की कौन सी गलतियों के कारण कोरोना बेकाबू हुआ , राष्ट्रपति की कौन कौन सी गलतियां है। अब इन सब पर जाँच की जा रही है।

स्वीडन, ब्राज़ील और साउथ अफ्रिका के नेताओं को मिली लापरवाही की सज़ा

– दूसरा  देश है स्वीडन जहां प्रधानमंत्री स्टीफ़न लाफवेन से अब सवाल पूछे जा रहें है। संसद की कमिटी ने अब उनपर कुप्रशासन का आरोप लगा दिया है। कुछ नेता ऐसे भी थे जिन्हें लापरवाही करने की सज़ा में उनसे इस्तीफा दिलवाया गया।

स्वास्थ्य मंत्री विक्टर कोस्तोचे को भी छोड़ना पड़ा अपना पद

रोमानियां में महामारी अपने चरम पर है। कोरोना के मामले बढ़ने लगे। अस्पतालों में अव्यवस्था फैली थी और देश में टेस्टिंग की कमी , दवा की कमी और पीपीई किट्स की कमी ने उनके खिलाफ सवाल खड़े कर दिए। देश में खराब हालत देखते हुए मेडिकल सप्लाई की ज़रुरत पड़ी। अप्रैल 2020 में स्वास्थ्य मंत्री विक्टर कोस्तोचे ने अपना पद त्याग दिया।

 

इस महामारी की लहर में अगर कोई भी शासक या नेता अपना काम ठिक से सफलतापूर्वक कर नहीं  सकता तो उसे कोई हक नहीं है, कुर्सी पर बनें रहने की, और इसलिए आज भारत में भी ऐसी मांग उठ रही है। जो उठना लाज़मी भी है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

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