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गृह विभाग का बड़ा फैसला, जल्द लाएगी पुख्ता क़ानून

गृह विभाग का बड़ा फैसला,लव जिहाद पर कानून बनाने के मामले में अब तकरीबन सभी राज्यों में लागू होगा कानून. गृह विभाग जल्द जारी करेगी मसौदा ।

हरियाणा में निकिता तोमर के साथ हुई घटना के बाद अब लव जिहाद मानो एक संजीदगी भरा मुद्दा होता जा रहा है। गृह विभाग ने इस सन्दर्भ में जल्द ही कई राज्यों में एक सख्त कानून को बनाने के ऊपर विचार किया है।  मध्य प्रदेश के साथ साथ अब लव जिहाद के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार भी कदम उठाने जा रही है।  उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही लव जिहाद के लिए धर्मांतरण प्रतिषेध अध्यादेश 2020 लाने वाली है।  जिसके अंतर्गत ज़बरन दर्मांतरण के मामले में 5 साल की सज़ा का प्रावधान होगा और सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 10 साल की सज़ा का प्रावधान होगा।  इस कानून में सबसे बड़ा प्रावधान यह है की यह अपराध गैरज़मानती होगा।  इस कानून को जारी करने के लिए गृह विभाग द्वारा मसौदा तैयार कर दिया है।  बता दें की योगी आदित्यनाथ ने 30 अक्टूबर को ही ऐसा कानून बनाने का संकेत दे दिया था।  जिसके बाद इलाहाबाद कोर्ट ने भी यह निर्णय लिया है की शादी के लिए धर्म परिवर्तन ज़रूरी नहीं है।  गृह विभाग के द्वारा बनाए गए मसौदे में, “ज़बरन या कोई प्रलोभन देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराये जाने या विवाह के ज़रिये एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखने की बात कही गयी है”।उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक में लव जिहाद के कानूनों का अध्ययन करने के बाद गृह विभाग ने अपने मसौदे में कुछ ख़ास प्रावधान शामिल किये हैं।

  1. यदि किसी लड़की का धर्म परिवर्तन, एक मात्र प्रयोजन विवाह के लिए किया गया है तो विवाह को अमान्य करार कर दिया जाएगा।
  2. धर्म परिवर्तन पर रोक सम्बन्धी कानून बनाने के लिए राज्य विधि आयोग ने फ्रीडम ऑफ़ रीज़नल बिल उपलब्ध करवाया है।
  3. इस कानून के अंतर्गत अपराध गैरज़मानती होगा।
  4. इस कानून के अंतर्गत ज़बरन विवाह करने को लेकर पांच वर्ष तक की सज़ा और 15 हज़ार का जुर्माने का प्रावधान है।
  5. नाबालिक लड़की, अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के साथ इस प्रकार का अपराध करने पर 2 साल की सज़ा का प्रावधान है और अधिकतम 7 साल की कैद के साथ 25 हज़ार के जुर्माने का प्रावधान शामिल है।
  6. जो संगठन यह अपराध करेगा उसे सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं दी जाएगी।
  7. सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 10 साल की सज़ा और कम से कम 50 हज़ार रुपये जुर्माने का प्रावधान होगा।
  8. धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर तय प्रारूप पर जिला मजिस्त्रते को एक महीने पहले सूचना देना अनिवार्य है। अगर इस प्रावधान का उल्लंघन किया गया तो 6 महीने से 3 साल की सज़ा तक का प्रावधान शामिल है।

उत्तराखंड में यह कानून और सख्त होने वाला है।  गृह विभाग की इस घोषणा को सुनकर कई राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानूनों को और सख्त बना दिया जाएगा।  कानपुर में लव जिहाद को लेकर एसआईटी ने जिन 14 मामलों में जांच की है उस रिपोर्ट में निकाह को अवैध बताया गया है। जांच में स्पेशल मेरिज एक्ट के तहत जांच की गयी जिसके अंतर्गत किसी भी निकाह में पूर्ण रूप से शादी नहीं हुई है।

लव जिहाद को लेकर न केवल कई राज्यों में कानूनों को लागू करना शुरू कर दिया गया है तो कई राज्य इसे राजनीति का मुद्दा बनाकर पेश कर रहे हैं।  लेकिन सवाल यही है की क्या लव जिहाद एक धर्म आधारित विचारधारा से जुडा कानून है? या सच में इसे महिलाओं की भावी पहलुओं से जुडा हुआ समझा जा सकता है।  ये दोनों ही सवाल समाज में उठ खड़े हुए हैं।  फिलहाल इन दोनों का जवाब दे पाना मुश्किल है क्योंकि केंद्र सरकार ने इस कानून को जारी नहीं किया है।  जारी होने के साथ साथ सभी सवालों के जवाब अपने आप मिल जाएंगे।

जयन्ती झा

मीडिया दरबार

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