विचार

चुनाव आयोग को आज क्यों हैं दूसरे टी.एन शेषन कि जरुरत ?

चुनाव आयोग फिर सवालों के घेरे में

आज देश के पश्चिम बंगाल समेत 4 राज्यों और एक केद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी हैं एक तरफ जहा पश्चिम बंगाल और असम में चुनाव का तीसरा चरण हैं तो वही तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव महज़ एक चरण में होने हैं|

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लेकिन सवाल यहाँ ये हैं कि इस बार के चुनाव में देश में जो सबसे अधिक चर्चा का विषय हैं वो ये नहीं हैं कि किस राज्य में कितने प्रतिशत वोटिंग हुई या फिर किस राज्य में किस पार्टी का पलड़ा भारी हैं|

इस बार के चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा हैं EVM के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ कि खबरे और लगतार उनकी अनदेखी और इन सब से ऊपर इन सभी को ख़बरों पर चुनाव आयोग का रवैया और इसके कारण चुनाव आयोग कि घूमिल होती छवी |

चुनाव आयोग कि एक के बाद एक लापरवाहियों से घूमिल हुई छवि

खैर चुनाव आयोग कि छवि के बारे में बात करने से पहले आप को बता दे कि बीते दो चरणों के चुनावो में चुनाव आयोग किस तरह सवालों के घेरे में रहा हैं|

बीते दिनों असम में दुसरे चरण के मतदान के दौरान खबर सामने आई कि बीजेपी विधायक कि गाड़ी से EVM बरामद हुई जिसपर कार्यवाही करते हुए यहाँ दुबारा चुनाव कराए जाने का फैसला करते हुए चुनाव आयोग ने 4 अधिकारीयों को सस्पेंड किया और अपनी ओर से एक बेहद हास्यपद सफाई भी पेश कि थी|

लेकिन बात यही तक रुक जाती तो क्या ही बात थी वो कहते हैं न बात निकली हैं तो दूर तलक जाएगी ऐसे ही एक के बाद एक लगातार ऐसी खबरे सामने आती गई |

असम के दीमा हसाओ जिले से सामने आई चुनाव आयोग कि बड़ी लापरवाही

सबसे ज्यादा चौकाने वाली खबर तो असम के दीमा हसाओ जिले के एक मतदान केंद्र से आई जहा कुल 171 वोट पड़े, नहीं, हैरान करने वाली खबर ये नहीं हैं हैरान तो आप ये जान कर होने कि इस केद्र पर मतदान के लिए महज़ 90 ही मतदाताओं के नाम रजिस्टर्ड थे|

इस घटना के बाद भी हमेशा कि तरह चुनाव आयोग ने अधिकारीयों को ससपेंड कर दिया बस फर्क इतना सा था कि इस बार ससपेंड किये गए अधिकारीयों को संख्या में एक का इजाफा कर दिया गया पिछली बार 4 को निलंबित किया था तो इस बार ज्यादा सिरिअस होकर 5 को निलंबित कर दिया|

दूसरी तरफ लगतार बढती निलंबन कि संख्या देख कर निर्वाचनकर्मी इस हद तक डरे हुए हैं कि पुदुचेरी में तो निर्वाचनकर्मी मतदान समय से एक दिन पहले ही अपने मदतान केन्द्रों पर जाकर बैठ गए|

लेकिन इन पांच राज्यों के चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल में तो चुनाव का अलग ही माहौल हैं यहाँ राजनेता खुद बूथ में बैठ कर मतदान करवाते हैं अपने कीमती वोटो कि रक्षा के लिए ममता दीदी तो बिचारी वील्चैर पर अपने टूटे पैर पर पैर चढ़ा कर बैठी थी|

अब ममता दीदी कि मेहनत देख कर कह लीजिये या फिर असम में बीजेपी विधायक कि ढीठपनी देख कर कैसे भी लेकिन कम से कम पश्चिम बंगाल में किसी भी वजह से सभी कांग्रेस भी लगता हैं अपनी कुंभकर्णी नींद से जागी|

कांग्रेस उम्मीदवार ने कि चुनाव आयोग से शिकायत

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के बाघमुंडी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नेपाल चंद्र महतो ने शनिवार को अपनी आधिकारिक शिकायत में अपनी सीट से ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरे एक घंटे से अधिक समय तक बंद रहने का आरोप लगाया है|

साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार का कहना हैं कि उनकी शिकायत वावजूद रविवार को भी EVM स्ट्रॉन्ग रूम के सीसीटीवी कैमरे रविवार को भी बंद रहे|

खैर कांग्रेस उम्मीदवार नेपाल चंद्र महतो कि शिकायत पर चुनाव आयोग कि तरफ से जवाब आया और चुनाव आयोग ने माना कि ऐसा तकनीकी गड़बड़ी कि वजह से हुआ था|

मतलब कही इनकी गाड़ी खराब कही इनके CCTV कैमरे खराब कही अधिकारीयों कि नीयत खराब अब कही ऐसा न हो कि इस चुनाव के साथ देश का भविष्य भी खराब हो जाये|

आज चुनाव आयोग कि जो हालत है उसे देख कर एक सख्सियत कि कमी बेहद महसूस हो रही हैं और मुझे यकीन हैं कि आपने भी कभी न कभी किसी न किसी से इनके बारे में जरुर सुना होगा|

चुनाव आयोग के दसवे चुनाव आयुक्त टीएन शेषन, 1955 बैच के IAS अधिकारी रहे टी.एन.शेषण 12 दिसम्बर 1990 को देश का दसवा चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था|

टी.एन.शेषन चुनाव आयोग के दसवे आयुक्त

चुनाव आयोग
Image Source-Social Media

टी.एन शेषन के बारे में कहा जाता हैं कि भारत में शायद ही किसी नौकरशाह ने अपने कार्यकाल में उनके जितना नाम कमाया हो, टी.एन.शेषन के कार्यकाल के दौरान एक मजाक भी बेहद प्रचलित था कि भारतीय राजनेता सिर्फ़ दो चीज़ों से डरते हैं, एक खुदा और दुसरे टी.एन.शेषन|

शेषन के आने से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त एक आज्ञाकारी नौकरशाह होता था जो वही करता था जो उस समय की सरकार उससे चाहती थी और आज चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के हालत पर तो क्या ही कहना|

अपने पद को राजनीती और राजनेताओं से कैसे दूर रखना हैं इसका सबसे बेहतर उदाहरण थे टी.एन.शेषन|

उनकी प्रसिद्धि का कारण ही यही था कि उन्होंने जिस भी मंत्रालय में काम किया उस मंत्री की छवि अपने आप ही सुधर गई. लेकिन 1990 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद शेषन ने उन सभी मंत्रियों से मुँह फेर लिया|

बल्कि उन्होंने बक़ायदा एलान किया था  “आई ईट पॉलिटीशियंस फॉर ब्रेक फ़ास्ट.” और न सिर्फ उन्होंने ये एलान किया था बल्कि इसको करके भी दिखाया था| तभी तो उनका दूसरा नाम रखा गया था , “अल्सेशियन|”

उनसे एक बार एक पत्रकार ने पूछा था, “आप हर समय कोड़े का इस्तेमाल क्यों करना चाहते हैं?” शेषन का जवाब था, “मैं वही कर रहा हूँ जो कानून मुझसे करवाना चाहता है. उससे न कम न ज़्यादा. अगर आपको कानून नहीं पसंद तो उसे बदल दीजिए. लेकिन जब तक कानून है मैं उसको टूटने नहीं दूँगा|”

आज देश में जिस पहचान पत्र के आधार पर आप वोट देने जाते हैं उसे देश में लाने का श्रेया भी इन्ही टी.एन.शेषण को जाता हैं चुनाव आयोग में आचार संहिता लेकर आने वाले भी शेषन ही थे|

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एक टी.एन.शेषन का दौर था और एक आज के हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा का दौर हैं अब राजनीती तो चीरस्थाई हैं वो न तब बदली थी और न अब बदलेगी लेकिन महज़ अपने पद पर बैठा एक शख्स कितना कुछ बदल सकता है ये टीएन शेषन ने साबित कर दिया था|

रिपोर्ट-पूजा पाण्डेय 

मीडिया दरबार 

 

 

 

 

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