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जानिए महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने क्या कहा!.. क्या इल्तिजा का बयान कश्मीर की हकीकत बयां करता है?

शुक्रवार, 31 जुलाई को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती का एक बड़ा बयान सामने आया, उन्होंने कहा कि 5 अगस्त का दिन हमारे लिए ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि हमारे लिए 5 अगस्त एक काला दिन है। जम्मू-कश्मीर में हर तरफ खौफ का वातावरण बनाया जा रहा है, यहां पर किसी को भी बोलने की आजादी नहीं है।

महबूबा मुफ्ती की बेटी, इल्तिजा मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटे हुए लगभग एक साल पूरा होने ही वाला है। वहीं, इल्तिजा ने गृह मंत्रालय के द्वारा महबूबा मुफ्ती की हिरासत को तीन महीने और बढ़ाने के संबंध में सवाल उठाए कि आखिर पता नहीं क्यों केंद्र सरकार मेरी मां के मामले को नजीर बनाना चाह रही है।

इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के खिलाफ सामूहिक संघर्ष की जरुरत है। उन्होंने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में कोई आजाद नहीं है, सब लोग जेल में है। वसीम बारी की हत्या इस बात का सबूत है कि अनुच्छेद-370 हटा देने से आतंकवाद खत्म नहीं हो जाता है।

उधर, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की हिरासत को शुक्रवार, 31 जुलाई  को तीन महीने तक के लिए और बढ़ा दिया गया। उन्हें जन सुरक्षा कानून यानी की PSA के तहत नजरबंद रखा गया है। महबूबा मुफ्ती पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के समय से ही हिरासत में हैं।

इस साल मई की शुरुआत में PSA के तहत मुफ्ती की हिरासत को तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। यह तारीख आने वाले समय में खत्म हो रही थी। वहीं, कोरोना संकट को देखते हुए मुफ्ती को अस्थायी जेल से उनके घर में शिफ्ट कर दिया गया है।

इससे पहले, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को सरकार ने बीते शुक्रवार, 31 जुलाई को रिहा कर दिया। सज्जाद लोन को भी अनुच्छेद-370 हटाए जाने के समय ही हिरासत में लिया गया था। लोन ने रिहा किए जाने की जानकारी ट्वीट कर दी थी, उन्होंने कहा था कि एक साल पूरे होने से पांच दिन पहले मुझे आधिकारिक रूप से सूचित किया गया कि मैं अब आजाद हूं।

इससे पहले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारुक अब्दुल्ला को इस साल मई महीने में सरकार ने हिरासत से रिहा कर दिया था। दोनों को लगभग 7 महीने तक PSA के तहत नजरबंद रखा गया था।

वहीं, पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद-370 को केंद्र की मोदी सरकार ने निरस्त कर दिया था। इस फैसले से पहले राज्य के सैकड़ों नेताओं को हिरासत में लिया गया था। हालात सामान्य होने के साथ अधिकतर लोगों को रिहा किया जा चुका है।

आइए अब जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा अनुच्छेद-370 हटने के बाद वहां की स्थिति में आखिर क्या-क्या बदलाव आएं-

जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा हटाकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया, जिसके बाद दोनों प्रदेशों में उपराज्यपाल भी नियुक्त कर दिए गए। यहां तक की इस साल के केंद्रीय बजट में अलग से जम्मू-कश्मीर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया और वहीं, लद्दाख के लिए भी 5754 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया।

साथ में ही अब दोनों ही प्रदेशों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और ढांचागत निर्माण के लिए आदेश जारी हो चुके हैं, तो वहीं, प्रदेश में बाहर से निवेश लाने के लिए हरी झंडी दे दी गई है। साथ ही वहां की नौकरशाही में बदलाव किया गया है और बाहरी लोगों को भी कश्मीर आकर बसने, जमीन-जायदाद खरीदने, नौकरी और कारोबार करने की इजाजत दे दी गई है। लेकिन दूसरी तरफ इसकी सच्चाई कुछ और ही है, यहां पर कई सवाल उठते हैं कि क्या कागजों पर हुए इन आदेशों से कश्मीर घाटी में हालात बदले हैं? क्या वाकई कश्मीर की आवाम को अनुच्छेद-370 हटने से कुछ फायदा हुआ है? क्या इन आदेश से दोनों ही प्रदेशों में कोई बुनियादी बदलाव आया है?

क्या सही में जम्मू-कश्मीर में वहां के लोगों को बोलने की कोई आजादी नहीं है? तो क्या सही में जम्मू-कश्मीर में खौफ का माहौल बना हुआ है? क्या अनुच्छेद-370 हटने के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवाद की घटनाओं में कमी आई? तो यहां पर कह सकते हैं कि नही, बल्कि आतंकवादियों ने इसके बाद चार गुणा अधिक घुसपैठ करने की कोशिश की। तो इनसे निपटने के लिए सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी में सुरक्षा इतनी कड़ी कर रखी है कि वहां पर बाहर से आए पयर्टकों का जाना तो नामुमकिन ही है।

वहीं, कश्मीर की नौकरशाही,  न्यायपालिका और स्थानीय निकायों में कश्मीरी मुसलमानों का दबदबा जस का तस बरकरार है। स्थानीय अखबारों के पत्रकार अब ऑनलाइन मीडिया के जरिए सरकार के कदमों और कोशिशों के खिलाफ अधिक मुखर होते नजर आ रहे हैं और वे दमन व अत्याचारों की खौफनाक दास्तां तो खैर बता ही रहे हैं। लेकिन यहां पर एक सवाल और है कि आखिर कश्मीरी हिंदुओं को उनका हक कब मिलेगा? क्या कभी वे चैन और सुकून से प्रदेश में रह पाएंगे? इस तरह से कहा सकता है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटा लेने के बाद ज्यादा कुछ जमीनी स्तर पर हुआ नहीं है, हां एक बात कह सकते हैं कि सरकार जरुर कश्मीर घाटी में अमन लाने की कोशिशों में लगी हुई है, जो फिलहाल सुरक्षाबलों के साय में ढका हुआ है

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अमित कुमार, मीडिया दरबार

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