राष्ट्रीय

जानिये क्या है ऑपरेशन westerned के राज !!

समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष, जया जेटली के उपर कथित भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते गुरूवार को उनकी सजा पर रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद तीनों आरोपियों ने राहत की सांस ली. वहीँ हाईकोर्ट ने सीबीआई से इस मामले में फिर से जवाब देने का आदेश दिया है.

दरअसल, 29 जुलाई, बुद्धवार को राउज एवेन्यु की अदालत ने समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष, जया जेटली सहित 2 अन्य दोषियों को रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार के मामले में 4 सालों का कारागार और 1-1 लाख रूपए की भरपाई करने की सजा नियुक्त की थी. साथ ही 2 दोषियों की पहचान जया जेटली के पार्टी सहयोगी गोपाल पचेरवाल और मेजर जनरल एसपी, मुरगई के रूप में हुई है.

मामला पूरी तरह से देखने और जांच करने के बाद, सीबीआई ने कोर्ट से बुधवार को तीनों आरोपियों को 7 सालो की जेल कराने का आग्रह किया था. राउज एवेन्यु की विशेष अदालत ने तीनों (जया जेटली, गोपाल पचेरवाल और मुरगई) को दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा सुनाई और साथ ही तीनों को 1-1 लाख रूपए देने का निर्देश भी दिया था.

अदालत के सीबीआई जज, विरेन्द्र भट्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, इन तीनो आरोपियों  ने राष्ट्र के रक्षा प्रणाली से समझौता करने का प्रयास किया है जो कि किसी अज्ञानता में ना आ कर बल्कि उनके द्वारा जान-बूच कर ऐसा किया गया है. रक्षा सौदे में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार मान्य नहीं है. ट्रायल कोर्ट ने इन तीनो दोषियों को बीते गुरुवार, शाम 5 बजे आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था मगर उससे पहले ही इन तीनो ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और नीचली अदालत के खिलाफ़ अपनी अर्जी दायर कर दी. इस पर उच्च न्यायालय ने अगले दिन इनकी गुहार को सुनकर नियुक्त सजा पर रोक लगा दी.

तो आइये जानते है कि आखिर क्या है पूर्व अध्यक्ष, जया जेटली से जुड़ा पूरा मसला ! 

दरअसल, आज से तकरीबन 20 वर्षो पहले तहलका न्यूज़ पोर्टल ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया था. वो रक्षा सौदे से जुड़ा भ्रष्टाचार का मसला कोई और नहीं, समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष, जया जेटली से ही जुड़ा हुआ था.  हुआ क्या था उस वक़्त, तहलका न्यूज़ पोर्टल के एक पत्रकार westerned international नामक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधि, मैथ्यू सैम्युअल बन कर जया जेटली से डील करने गए. जया जेटली पत्रकार को कंपनी का प्रतिनिधि समझ कर 2 लाख रूपए की फिरौती मांगने लगी और उनकी सारी बाते इस दौरान रिकॉर्ड हो गई. इस तरह से साल 2001 में जया जेटली और रक्षा सौदे में उनसे जुड़े गोपाल पचेरवाल और मुरगई के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था. इन तीनो के अलावा, सीबीआई की नज़र एक और चेहरे पर थी, सुरेन्द्र कुमार सुरेखा जो कि इस मामले की साजिश से जुड़ाव रखते थे मगर बाद में वह सरकारी वकील बन गए.

अब सवाल यह है कि आखिर जॉर्ज फर्नाडिस ने उस वक़्त इस्तीफ़ा क्यों दिया ?               

बता दें, 2001 में अटल विहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार में जॉर्ज फर्नांडिस केंद्रीय रक्षा मंत्री थे और जया जेटली के पति, अशोक जेटली उस वक़्त रक्षा मंत्री, जॉर्ज फर्नाडिस के विशेष सहायक थे. जिसके चलते जया जेटली और फर्नाडिस का अक्सर मिलना-जुलना लगा रहता था. जब जया जेटली रक्षा सौदे में फिरौती के मामले में रंगे हाथो पकड़ी गई थी तब जॉर्ज फर्नाडिस रक्षा मंत्री थे. जिसके कारण विपक्ष दलों ने फर्नाडिस पर आरोपों की बौछार करना शुरू कर दिया. जिसके चलते रक्षा मंत्री, जॉर्ज फर्नाडिस को लाख-हाथ पैर मारने के बावजूद, आखिर में अपने पद से इस्तीफा देना ही पड़ा.

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