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जानें उस देश के बारे में जो अपराधियों को गोल्डन पासपोर्ट देता है ?

जानें उस देश के बारे में जो अपराधियों को गोल्डन पासपोर्ट देता है ?

गोल्डन पासपोर्ट

 

 

क्या कोई देश पैसा कमाने के लिए नागरिकता बेचने का धंधा कर सकता है?

क्या कोई देश अपराधियों, भगोड़ों और पुलिस से भाग रहे लोगों को नागरिकता बेचकर पैसा कमाने की स्कीम निकाल सकता है?

किसी देश के कानून को देखे तो ऐसा करना सरासर गलत होगा। लेकिन एक देश ऐसा भी है जो इन नैतिकता और कानूनी वैधता को लांघते हुए ऐसा कर रहा है। आज की स्टोरी में हम आपको बताऐंगे एक ऐसे देश के बारे में जो पैसा कमाने के लिए अपने देश की नागरिकता तक बेच दे रहा है। क्या है पूरा मामला जानिए इस रिपोर्ट में-

दक्षिण प्रशांत महासागर में एक द्वीपीय देश है, रिपब्लिक ऑफ़ वैनुआटू। मानचित्र पर ऐसा दिखता है, मानो कई छोटी -2 चींटियां अपने रास्ते पर चल रही हो। दरअसल ये चींटियों की भांति दिखने वाले छोटे छोटे 80 द्वीप है। ये क्षेत्र 1100 किलोमीटर के इलाके में फैला है। यहां  करीब 3 लाख आबादी रहती है और इसकी राजधानी है, पोर्ट विला।

वैनुआटू को पहले हेबराइड्स कहते थे

वैनुआटू को पहले हेबराइड्स कहते थे। पहले यहां ब्रिटेन और फ्रांस मिलकर अपना प्रशासन चलाते थे। इनकी शासन व्यवस्था करीब 74 साल तक रही थी। फिर 1980 में ये कोलोनियल पावर से आजाद हुआ और इसका नाम वैनुआटू पड़ गया। वैनुआटू सरकार एक रिपब्लिक है। यहां शासन व्यवस्था का स्टाइल है, नॉन एक्ज़िक्यूटिव प्रेज़िडेंसी मतलब कि यहां सर्वोच्च ओहदा राष्ट्रपति का है, पर उनके पास कार्यपालिका या नीति निर्माण की पावर नहीं होती है।वैनुआटू सरकार की  ये पावर होती है, प्रधानमंत्री के पास। पार्लियामेंट के लोग अपने ही बीच से प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं. वो प्रधानमंत्री अपनी कैबिनेट चुनता है और इन्हीं की मदद से वो शासन चलाता है।

वैनुआटू सरकार पैसा लेकर अपने देश की नागरिकता बेच देती है

अब चलिए आपको बताते है इस देश की अजीबोगरीब स्कीम के बारे में – दरअसल इस देश की एक विवादित स्कीम है जिसे गोल्डन पासपोर्ट स्कीम कहा जाता है। वैनुआटू सरकार पैसा लेकर अपने देश की नागरिकता बेच देती है। जिसके बदले वैनुआटू सरकार एक से डेढ़ करोड़ रुपयों की मांग करती है। केवल 2 से ढ़ाई महीनो में ही वैनुआटू की नागरिकता भी मिल जाती है।

वैनुआटू की नागरिकता मिलने के बाद कौन से अधिकार नागरिक को मिलते है, चलिए ये बताते है आपको-

1)इस सिटिज़नशिप स्कीम के तहत, व्यक्ति को वैनुआटू में रहने और बसने का क़ानूनी अधिकार मिलता है।

2) नागरिकता खरीदने वाले व्यक्ति के बच्चे और आने वाली पीढ़ियां भी वैनुआटू के नागरिक माने जाते हैं।

3) व्यक्ति को यहां बिज़नस करने, निवेश करने का हक़ होता है।

4) व्यक्ति से इनकम टैक्स नहीं लिया जाता।

5) उसको कैपिटल गेन और बाकी तरह के संपत्ति कर भी नहीं देने होते।

6) सबसे महत्वपूर्ण बात इस वीजा की ये है कि इस स्कीम के तहत नागरिकता पाने वाले इंसान को यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन और रूस समेत करीब 113 देशों में वीज़ा फ्री यात्रा कर सकता है।

इस देश की गोल्डन वीज़ा बेचने की लिस्ट काफी लंबी है। पिछेल साल 2020 में ही इस देश ने करीब 2200 पासपोर्ट बेचे। जिन लोगों ने ये पासपोर्ट खरीदे अब ज़रा उनके बारे में भी जान लिजिए

 

  1. पहला नाम है, रईस काजी और अमीर काजी। ये दोनों भाई दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले हैं। इन्होंने क्रिप्टोकरंसी में निवेश करने से जुड़ा ऐफ्रीक्रिप्ट नाम का एक प्लेटफॉर्म खोला था। इसमें कई लोगों ने निवेश किया था। अप्रैल 2021 में इन भाइयों ने निवेशकों से कहा कि उनकी वेबसाइट को हैक कर लिया गया। इन भाइयों पर आरोप है कि वे 27 हज़ार करोड़ रुपयों की कीमत के बिटकॉइन्स लेकर फरार हो गए है। इन दोनो भाइयों ने भागने से पहले ही वैनुआटू द्वीप की नागरिकता हासिल कर ली थी।
  2. अगला शख्स है गिआनलूइगी – ये इटली का बड़ा नामी जामी कोरबारी है। इस पर आरोप है कि इसने लंदन के पॉश इलाके में प्रॉपर्टी डिलिंग में खुद को ब्रोकर की तरह पेश किया था। तोरजी का नाम ग्लोबल एंटी लाउंड्रिग की वॉचलिस्ट में शामिल है। इसने साल 2020 में वैनुआटू की नागरिकता खरीद ली थी।
  3. साल 2020 में वैनुआटू की नागरिकता खरीदने वाला भारतीय शख्स विनय मिश्रा , जो पश्चिम बंगाल के पूर्व महासचिव रह चुके है। विनय मिश्रा पर भ्रष्टाचार का आरोप है। पश्चिम बंगाल में विवादित मामला कैटल ऐंड कोल स्मगलिंग केस में विनय मिश्रा की अहम भूमिका थी। इस केस की CBI जाँच के आदेश दिए गए। इसने भी साल 2020 में नागरिकता खरीदी और भारतीय नागरिकता छोड़ दी।

सोचिए, इतनी सरल प्रक्रिया के रास्ते कोई अपराधी अपना पुराना नाम बदलकर नई पहचान पा सकता है. उसे EU समेत 113 देशों में वीज़ा फ्री प्रवेश मिल सकता है. अब सोचिए. अगर किसी ड्रग्स स्मगलर या मानव तस्कर को ये सुविधाएं मिल जाएं, तो उसे अपने अमानवीय कारोबार का नेटवर्क बढ़ाने में कितनी आसानी हो जाएगी. वैनुआटू पसिफ़िक में बसा है. पसिफ़िक क्षेत्र ड्रग्स के कारोबार का बड़ा अड्डा है. ऐसे में अगर कोई अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स गिरोह वैनुआटू की नागरिकता ख़रीद ले, तो उसे एक सुरक्षित बेस मिल जाएगा. ये सारी स्थितियां बेहद चिंताजनक है।

 

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रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

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