राजनीति

जानें क्यों योगी सरकार के खिलाफ बैठे दिव्यांगो ने भूख हड़ताल का किया ऐलान

योगी सरकार के खिलाफ क्यों धरने पर पैठे है दिव्यांग

योगी सरकार ना जाने किस गुरुर में डूब कर दिव्यांग युवाओं की मांग की ओर ध्यान नहीं दे रही है। और सबसे निराशाजनक बात तो यह हैं कि दिव्यांगो की इस समस्या पर ना कोई अधिकारी ध्यान दे रहा है। उत्तरप्रदेश में दिव्यांग जनो को प्रदेश की अलग अलग सरकारी नौकरी की बहाली में हो रही देर के कारण ये धरना प्रदर्शन कर रहे है, लेकिन उनकी आवाज़ कोई नहीं सुन रहा। न ही सरकार न प्रशासन।

क्या है पूरा मामला –

दरअसल पिछले महिने दिसंबर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दिव्यांग छात्र अपनी कई सूत्री मांगो को लेकर धरने पर बैठे हैं। 69000 बेसिक शिक्षक भर्ती में दिव्यांग आरक्षण के नियमों के उल्लंघन को लेकर अभ्यार्थियों का उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा निदेशालय पर पिछले दिसंबर महिने से यह धरना चल रहा है। धरने पर बैठे दिव्यांगों का आरोप है कि शिक्षा निदेशालय के अधिकारी उनकी मांगों पर नहीं ध्‍यान दे रहे हैं।

योगी सरकार से दिव्यांगो की क्या है मांग

दरअसल इन दिव्यांग आवेदकों की मांग है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा भर्ती की लिखित परीक्षा जो 6 जनवरी, 2019 को संपन्न हुई थी, जिसका रिज़ल्‍ट इस साल 12 मई को जारी किया गया।

लेकिन समस्या इस बात पर है कि इसमें विभाग द्वारा दिव्यांग आरक्षण आरपीडब्ल्यूडी एक्ट (2016 RPWD 2016 ) का पालन नहीं किया गया है।

छात्रों की मांग है कि एक्ट के अनुसार पालन किया जाए और बेसिक शिक्षक RPWD Act 2016का पालन करते हुए नियमानुसार 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। दिव्यांगों ने अपनी मांगों को लेकर सचिव बेसिक शिक्षा प्रताप सिंह बघेल को ज्ञापन भी सौंपा था।

क्या है 2016 का RPWD act RPWD पूरा नाम Rights of Persons with Disabilities ACT

16 दिसंबर 2016 को लोकसभा ने इस एक्ट का पारित किया था इसने पीडब्ल्यूडी अधिनियम, 1995 (PwD Act, 1995) की जगह ली, जिसे 24 साल पहले लागू किया गया था।

इसके तहत दिव्यांगो को उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरियों में आरक्षण, भूमि के आवंटन में आरक्षण, गरीबी उन्मूलन योजना आदि जैसे अतिरिक्त लाभ,  बेंचमार्क विकलांग व्यक्तियों और उच्च समर्थन आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए प्रदान किए गए हैं। 6 से 18 वर्ष की आयु के बीच बेंचमार्क विकलांग्ता वाले प्रत्येक बच्चे को मुक्त को मुफ्त शिक्षा का अधिकार होगा।

बेंचमारर्क विकलांग्ता वाले कुछ व्यक्तियों या वर्ग के लोंगों के लिए सरकारी प्रतिष्ठानों में रिक्तियों में आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत कर दिया गया है।

प्रयागराज में कड़कड़ाती ठंड के बीच ये निर्भीक और दृढ़ निश्चई प्रदर्शनकारी दिव्यांग युवा छात्र हर दिन सुबह 6:30 बजे से धरने पर बैठ जाते हैं, और रात 8 बजे तक धरने पर बैठे रहते है।

ईश्वर ने जिपर बेरुखी दिखाई उन पर अधिकारियों की बेरुखी तो देखिए यही प्रदर्शनकारी दिव्यांग छात्र रात भर धरने पर बैठ जाऐ तो यहां के अधिकारी कहते है कि कोई भी सामान चोरी हुआ तो उसके जिम्मेदार आप लोग होंगे,

इसलिए बेचारे दिव्यांग छात्र इस कड़कड़ाती ठंड में रैनबसेरो में सोने को मजबूर हो जाते है और राज्य उपसचिव जी का तो क्या ही कहना, दिव्यांग आवेदकों को तो वे धमकी तक दे देते है कि कैमरा बंद करो नहीं तो तुम लम्बे जाओगे, उप सचिव तो यहां पर्सनल टार्गेट करने से भी कतराते नहीं है,

केवल यही नहीं GD साहब भी आते है बस 4 लोगों से धरना समाप्त करने पर बात करके कई दिनों से भूखे पड़े दिव्यांगों की ओर नज़र उठा कर भी नहीं देखते, मानों जैसे यह धरती पर बोझ हो। अधिकारी साहब शायद आप भूल गए हैं कि कुर्सी का गुरुर इतना ना हो जाए कि असहाय और ज़रुरतमंद की परेशानी तक आपको दिखाई ना दें।

हैरानी की बात है उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जो हमेशा से ही खुद को युवाओं की सरकार बताती रही हैं, वो आज इन दिव्यांग अभ्यार्थियों की मांग पर क्यों चुप है।क्यों सरकार आगे आकर मदद नहीं करती।

69000 शिक्षक भर्ती में दिव्यांगों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है। हम सरकार से ये सीधा सवाल करते है कि ये किस प्रकार के राम राज्य की परिक्लपना है जहां किसी असहाय की आवाज़ को यूं अधिकारीयों द्वारा कुचल दिया जाता है। उत्तर प्रदेश में यूं दिव्यांगो की समस्या की अनदेखी आखिर कब तक होगी।

सरकार इन्हें स्वाभिमानी और स्वाबलंबी बनने से आखिर क्यों रोक रही है। इतनी प्रार्थना के बाद भी इन दिव्यांगो की बात नहीं सुनी जा रही, इनकी बातों को केवल अनदेखा कर दिया जा रहा है, जबकि इनकी मांग संवैधानिक है।

शिक्षकों की भर्ती में जिस एक्ट का विज्ञापन प्रभावी था उसका पालन आखिर क्यों नहीं किया जा रहा हैं, सरकार अपने पद की गरिमा और कर्तव्यों का पालन करते हुए साथ ही अपनी मगरुरई को छोड़ इन दिव्यांग आवेदकों की समस्या का समाधान करना चाहिए।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

 

 

 

 

 

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