धार्मिक

“तुलसी विवाह” क्यों मनाया जाता है|

तुलसी विवाह 

कार्तिक का महिना चल रहा है जिसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है। क्योंकि इस महीने में हिंदुओं के कई पवित्र त्यौहार मनाए जाते है। दिपावली हो अहोई, छठ हो या करवाचौथ इस महीने में कई पवित्र त्यौहार मनाए जाते है। कार्तिक महीने में मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व तुलसी विवाह भी इसी माह मनाया जाता है। तुलसी विवाह हर साल कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 25 नवंबर को शुरु होगी और 26 नवंबर को समाप्त हो जाऐगी। इस तुलसी विवाह का पर्व 26 नवंबर को मनाया जाऐगा। देश में कई जगह तुलसी का विवाह बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। एकादशी का शुभ दिन जानने सा पहले चलिए जानते है कि तुलसी का विवाह क्यों माना जाता है।

पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार राक्षक कुल में जन्मी एक लड़की जिसका नाम वृंदा था। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्त थी, वृंदा के बड़े होने पर उसके घर वालों ने उसका विवाह समुंद्र मंथन में जन्में राक्षक जलंधर से करवा दिया था। अब क्योंकि वृंदा एक पतिव्रता नारी थी, जिस कारण दिनबदिन जलंधर कबहुत शक्तिशाली होता गया। जलंधर जब भी किसी युध्द में जाता तो वृंदा पूजा जप करने बैठ जाया करती थी। जिससे जलंधर को कोई भी देवता हरा नहीं पा रहे थे। लेकिन जलंधर ने पूरी पृथ्वी का नाश करना शुरु कर दिया था। सभीदेवताओँ ने विष्णु के समक्ष आकर उनसे मदद करने की गुहार लगाई। तब विष्णु ने जलंधर का रुप दर कर वृंदा का पतिव्रता धर्म नष्ट कर दिया, जब वृंदा को जलंधर के इस झल के बारे में पता लगा तो वह क्रोधित हुई और भगवान विष्णु को पत्थर बन जानें का श्राप दे दिया।

भगवान को पत्थर बनता देख सभी देवों में हाहाकार मच गया तब माता लक्ष्मी ने आकर वृंदा से अपना श्राप वापस लेने के लिए विनती की , तब भगवान पहले जैसी अवस्था में आए पर वृंदा वहीं स्वंय सती हो गई। कहते है कि वृंदा के शरीर की राख से बाद में एख पौधा उपजा जिसे तुलसी के नाम से जाना गया और भगवान विष्णु ने उस पौधे को आशीर्वाद दिया की अब से कभी में बिना तुलसी के पत्तों के कोई भी प्रसाद ग्रहण नहीं करुंगा और हर साल मैं कार्तिक माह में तुमसे विवाह रचाउंगा, तब यह प्रथा है कि कार्तिक माह की एकादशी को शालीग्राम नामक पत्थर से तुलसी का विवाह रचाया जाता है। इस साल तुलसी का शुभ विवाह का शुभ दिन यानी एकादशी का दिन 25 नवंबर सुबह 2 बजकर 42 मिनट से शुरु हो कर 26 नवंबर 5 बजकर 10 मिनट तक रहेंगा। द्वादशी तिथि 26 नवंबर को सुबह 05 बजकर 10 मिनट से शुरु हो कर 27 नवंबर को  सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक रहेंगा। चलिए अब जान लिजिए पूजा की पूरी विधि

तुलसी विवाह की पूजन विधि

तुलसी के पौधे के चारो ओर मंडप बना तुलसी के ऊपर लाल चुनरी चढ़ाएं और भरपूर श्रृंगार करें।

तुलसी के पौधे को  श्रृंगार की चीजें अर्पित कर हवन करें।

श्री गणेश और शालिग्राम का पूजन करना ना भूलें।

भगवान शालिग्राम की मूर्ति और तुलसी के फेरे करवाऐं।

आरती संपन्न होने के बाद विवाह में मंगलमय गीत गाए

रूचि पाण्डे

मीडिया दरबार

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