राजनीति

दिनेश त्रिवेदी होंगे बंगाल में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार !

दिनेश त्रिवेदी TMC से इस्तीफा देकर शामिल हुए बीजेपी में

बंगाल में जारी सियासत के बीच पूर्व टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी शनिवार को बीजेपी में शामिल हो गए। इस मौके पर बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।

दरअसल सुबह से ही अटकलें तेज़ थीं कि पश्चिम बंगाल की कोई मशहूर हस्‍ती आज बीजेपी में शामिल हो सकती है। सभी जगह ममता बनर्जी के नजदीकी और कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के नाम की चर्चा थी।

ममता पर कसा तंज बताया राजनीति को मानती है खेल

दिनेश त्रिवेदी
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बीजेपी में शामिल होने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने खुशी जताते हुए यह कहा कि मुझे इस दिन का इंतजार था। मैं चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रहूंगा भले ही मैं कहीं से चुनाव लडूं या नहीं।

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यहां दिनेश त्रिवेदी ने टीएमसी पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि बंगाल ने टीएमसी को खारिज कर दिया। बंगाल विकास चाहता है, भ्रष्‍टाचार या हिंसा नहीं। बंगाल अब वास्‍तविक बदलाव चाहता है। राजनीति गंभीर मसला है कोई ‘खेला’ नहीं जिसे खेलते हुए ममता अपने आदर्श भूल गई हैं।

2001 में मिली थी राज्यसभा सीट

दिनेश त्रिवेदी
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चलिए जानते है कि कौन है दिनेश त्रिवेदी ?  साल 2001 से 2006 के बीच दिनेश त्रिवेदी ने ममता बनर्जी का विश्वास हासिल किया था। बता दें कि यह ममता बनर्जी के साथ तब खड़े थे|

जब ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का वो सबसे बुरा दौर था। 2001 में ममता ने उन्हें राज्यसभा में भेज दिया था। यहां भी दिनेश त्रिवेदी ने अपने राजनीतिक मंझे हुए दिमाग का लोहा मनवाते हुए राज्यसभा सीट के लिए बड़ी जीत सुनिश्चित की थी।

साल 2006 में जब ममता बनर्जी सिंगुर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 26 दिन लंबी भूख हड़ताल पर बैठी थीं, उस वक्त त्रिवेदी दिल्ली में उनके समर्थन में माहौल बना रहे थे।

इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी उनके साथ खड़े थे, लेकिन ममता बनर्जी का उन पर विश्वास उस वक्त बढ़ा, जब साल 2009 में त्रिवेदी ने सीपीएम के कद्दावर नेता तड़ित तोपदार को सीपीएम और सीटू के गढ़ कहे जाने वाली बैरकपुर संसदीय सीट पर जबरदस्त मात दी।

दिनेश त्रिवेदी की इस सफलता से गदगद ममता ने कहा था कि यह दिनेश त्रिवेदी की जीत है। उस वक्त दिनेश त्रिवेदी जॉर्ज फर्नांडिज और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ममता के संपर्कों के लिए सेतु का काम करते थे।

भाजपा की हिंदु वोट बैंक जुटाने की कोशिश

चलिए अब ज़रा समझते है कि दिनेश त्रिवेदी का ममता दीदी का साथ छोड़ने पर कैसे सियासी बिसात पलट सकती है। दरअसल दिनेश त्रिवेदी बंगाल में अपनी एक साफ सुथरी छवि वाले नेता की पहचान रखते है जिससे उनके पास बंगाल की जनता का अच्छा खासा जनमत है।

वहीं दूसरी तरफ दिनेश त्रिवेदी स्वर्ण जाति से आते है, इससे भाजपा को एक और फायदा ये है कि भाजपा दिनेश त्रिवेदी के साथ बंगाल में हिंदु वोट बैंक को जुटाने में समर्थ होंगी। बंगाल में दिनेश त्रिवेदी के होने से यकिनन भाजपा को फायदा होगा।

माना जा रहा है कि दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को और ज्यादा मजबूत कर सकता है। तृणमूल कांग्रेस इस खाली हो चुकी राज्यसभा सीट के सहारे एक बड़ा दांव खेल सकती है|

ऐसी चर्चाएं हैं कि टीएमसी इस सीट के लिए पार्टी में कोई मुस्लिम चेहरा खोज रही है, AIMIM चीफ और सांसद असद्दुदीन ओवैसी की पश्चिम बंगाल में एंट्री और ममता बनर्जी के करीबी रहे पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की नई पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट की वजह से मुस्लिम वोट ममता से छिटक सकता है|

ऐसे में कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी की राज्यसभी सीट को लेकर बनाई गई ये रणनीति उन्हें फायदा पहुंचा सकती है। वहीं अगर भाजपा के लिए देखे तो दिनेश त्रिवेदी उनकी पार्टी के लिए मुश्किलें भी बढ़ा सकते है।

पलट सकती है बंगाल में सियासी बिसात

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अपने अच्छे-खासे पोर्टफोलियो और मोदी-शाह की जोड़ी के साथ ‘घनिष्ठ’ संबंधों के चलते भाजपा में दिनेश त्रिवेदी को किस तरह से फिट किया जाएगा, इस फॉर्मूला पर अभी केवल कयास लगाए जा सकते हैं|

दिनेश त्रिवेदी को विधानसभा चुनाव में उतारना ममता बनर्जी को ‘गुजराती’ थाली परोसने जैसा होगा. हो सकता है कि भाजपा यह खतरा उठाते हुए त्रिवेदी को बैरकपुर सीट से चुनावी मैदान में उतार दे|

ऐसे में अगर वह जीतते हैं और भाजपा सत्ता में आती है, तो त्रिवेदी को उनके पोर्टफोलियो को ध्यान में रखकर बंगाल कैबिनेट में एक बड़ा मंत्रालय देना ही होगा। अगर वह चुनाव हार जाते हैं, तो भी भाजपा को अपनी सहूलियत के लिए उन्हें कहीं न कहीं और किसी न किसी खांचे में फिट करना ही होगा|

वहीं दूसरी तरफ भाजपा की ओर से ऐसे भी कयास लगाए जा रहें है कि हो सकता है भाजपा दिनेश त्रिवेदी या फिर शुभेंदु अधिकारी में से किसी एक को बंगाल मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर आगे कर सकता है।

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क्योंकि दोनों ही बंगाल के बड़े औऱ कद्दावर नेता माने जाते है, और दोनों को ही बंगाल की जनता खूब पसंद भी करती है, अब यहां ये देखना दिलचस्प होगा की भाजपा किसे अपना आने वाला मुख्यमंत्री चुनेगी?

या कही सभी के द्वारा लगाई जा रही अटकलों के विपरित भाजपा एक दम अलग ही मोड़ ले आऐगी। लेकिन जो भी इस बार का बंगाल चुनाव किसी थ्रिलर मूवी से कम नहीं है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

 

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