राष्ट्रीय

दिल्ली सरकार का बड़ा ऐलान; होटल और साप्ताहिक बाज़ार फिर से लग सकेंगे, उपराज्यपाल ने किया खारिज !!

कोरोना महामारी से बचाव के लिए लगे लॉकडाउन की वजह से सभी लोगों का कारोबार पिछले 5 महीनों से लगभग थम-सा गया था, जिसमे छोटे से ले कर बड़े सभी किस्म के रोज़गार वाले लोग शामिल थे. तालाबंदी का सबसे ज़्यादा अगर प्रभाव किसी पर पड़ा था तो वो थे सड़क किनारे रेहड़ी, ठेले और फेरी लगाने वाले लोग. इतने महीनों से दुखी रेहड़ी-पटरी वाले लोगों के लिए दिल्ली सरकार ने बीते गुरूवार को राजधानी के होटल और फेरी वालों की साप्ताहिक बाज़ार लगाने जैसे बड़े दिशा-निर्देश जारी किये थे, जिसपर बाद में माननीय उपराज्यपाल अनिल बैजल ने रोक लगा दी और एक बार फिर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उपराज्यपाल के बीच की वैचारिक लड़ाई दिल्लीवासियों के सामने आ गई.

दरअसल, देशव्यापी पूर्ण तालाबंदी की वजह से काफी बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी वाले मज़दूर रोज़ी-रोटी की तंगी से परेशान हो कर अपने गृह प्रदेश की और पलायन कर गए. तालाबंदी के दौरान वाहन सेवा का सुचारू रूप से ना चल पाने के कारण मजदूरों को भूखे, प्यासे, पैदल ही सैकड़ों मील का सफ़र तय करना पड़ा था. सामाज के इन शोषित लोगों की समस्या कहाँ ख़त्म होने को थी, उन्हें अपने गृह प्रदेश जा कर भी राशन पानी की तंगी से दो चार होना पड़ा. एक टेलीफोनिक सर्वेक्षण से ये मालूम हुआ था कि, मध्य भारत के लगभग साढ़े 3 हज़ार में से 42.3 प्रतिशत ऐसे मज़दूर थे जिनके घर तालाबंदी के बीच ही राशन पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था. जिसके कारण लॉकडाउन के मध्यकाल में ही फेरी लगाने वाले मजदूरों की आत्महत्या जैसे मामले भी देखने को मिले.

ठहरी हुई अर्थव्यवस्था को फिर से गति देने और गरीब, मज़दूर एवं छोटे व्यक्तिगत व्यवसाय वाले लोगों का जीवन आसानी से चलाने में मदद करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री, अरविन्द केजरीवाल ने 30 जुलाई को अनलॉक 3 के कुछ दिशा निर्देश ऑनलाइन कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये सांझा किया था जिनमे मुख्यतौर पर साप्ताहित बाज़ार लगाने और रात का कर्फ्यू ख़त्म करने जैसे नए नियम बनाए गए थे. इनके अलावा मुख्यमंत्री केजरीवाल ने होटल और हॉस्पिटैलिटी जैसी सेवाओं को भी सामान्य-तौर से चलाने की इजाज़त दे दी थी.

दिल्ली सरकार का कहना था कि, “सड़क के किनारे रेहड़ी, ठेले और फेरी लगाने वाले लोगों को अभी ट्रायल वीक के तौर पर उन्हें सुबह 10 बजे से शाम के 8 बजे तक अपना काम शुरू करने का निर्देश दिया है. अगर ट्रायल वीक में सब कुछ ठीक रहा तो, रेहड़ी-पटरी वाले लोग इसके बाद भी अपना काम सामान्य रूप से कर सकेंगे और उपर्युक्त सभी नियम 1 अगस्त यानि आज से लागू हो जायेंगे.”  मगर 31 जुलाई की शाम को उपराज्यपाल, अनिल बैजल ने इस फैसले को ख़ारिज कर दिया. उनका मानना है कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण रोग के मामले सामन्य ज़रूर हुए हैं मगर पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुए.  मुख्यमंत्री केजरीवाल के फैसले को ख़ारिज करने के उपरान्त, आम आदमी पार्टी का कहना है कि केंद्र को दिल्ली सरकार के फैसलों में अपनी दखलअंदाजी बंद कर देनी चाहिए.

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