विचार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वी जन्म जयंती पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बाते

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वी जन्म जयंती

आज देश के सबसे रहस्यमयी नेता की जन्म जयंती है, एक ऐसे नेता जिनके नाम के आगे हमेशा नेताजी लगाया गया एक ऐसे नेता जिनके जीवन के साथ-साथ उनकी मौत भी रहस्यों से भरी रही|

इसके विपरीत अगर भारत के स्वाधीनता की लड़ाई में हम नेताजी की भूमिका की बात करे तो देश के स्वंतत्रता संग्राम में नेताजी की अहम् भूमिका रही थी|

हालाँकि उनके योगदान को समय के साथ घूमिल करने का प्रयास पहले अग्रेज़ी हुकूमतनो ने किया फिर बाद की हमारी सरकारों ने भी उनके बलिदानो को देश में उचित स्थान नहीं दिया गया|

मोदी सरकार ने नेताजी को दी सच्ची श्रधांजलि

नेताजी सुभाष चंद्र बोस
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लेकिन अब नेताजी के पराक्रम और उनकी देश के प्रति क़ुरबानी को मोदी सरकार ने भारत के युवाओं के बीच पहुचाने का संकल्प लिया है|

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 125 वी जन्म जयंती है और इस मौके पर मोदी सरकार ने इस वर्ष से नेताजी की जयंती को देश में पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है. संस्कृति मंत्रालय ने बीते मंगलवार को अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी|

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि नेताजी की 125 वीं जयंती पर देश में तीन प्रमुख कार्यक्रम होंगे. पहला कार्यक्रम कोलकाता में होगा, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उपस्थित रहकर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा दो और बड़े कार्यक्रम होंगे|

देश में आयोजित किये गए भव्य कार्यक्रम

कोलकाता के साथ दूसरा कार्यक्रम कटक में होगा, जहां पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान उपस्थित होंगे, यहाँ आपको बता दे की कटक सुभाष चंद्र बोस का जन्म स्थल है भारत की आजादी में अहम योगदान देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था|वहीं इस मौके पर तीसरा कार्यक्रम जबलपुर में होगा|

नेताजी के आजाद हिंद फ़ौज की कहानी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस
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नेताजी का नाम आते ही सबसे पहली बात जो हमारे जहन में आती है वो है उनकी आजाद हिन्द फौज अक्सर हम पढ़ते-सुनते है की नेताजी ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया आजाद हिंद फ़ौज ने देश से बाहर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और आजादी की लड़ाई में एक तरह से परोक्ष रूप से अहम भूमिका निंभाई थी

लेकिन यहाँ आपको नेताजी की आजाद हिन्द फ़ौज के बारे में कुछ जरुरी तथ्य जानने की जरुरत है की आजाद हिन्द फ़ौज का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस ने किया इसमें कोई दोराय नहीं है|

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लेकिन क्या आप जानते है की सुभाषचंद्र बोस ने इस फ़ौज का नेतृत्व किया था लेकिन इसकी स्थापना नेताजी ने नहीं की थी दरअसल आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना सबसे पहले राजा महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा 29 अक्टूबर 1915 में अफगानिस्तान में की गई थी ।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस
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उस वक्त इसका नाम आजाद हिन्द सेना था, जिसका लक्ष्य अंग्रेजों से लड़कर  भारत  को अंग्रेजी बेडियो से स्वतंत्र कराना था । इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध के समय सन 1942  मे जापान  की सहायता से  वही के शहर टोक्यो में रास बिहारी बोस ने  आजाद हिन्द फौज या इण्डियन नेशनल आर्मी  नामक सशस्त्र सेना का गठन किया|

लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रेडियो पर किए गए एक आह्वान के बाद रासबिहारी बोस ने 4 जुलाई 1943 को नेताजी सुभाष को इसका नेतृत्व सौंप दिया था।

जिसके बाद से नेताजी सुभाष चंद्र बोस को आजाद हिन्द फौज का सर्वोच्च कमांडर नियुक्त किया गया और उन्होंने 40 हजार भारतीय युवाओं को प्रशिक्षित कर इस फौज का नेतृत्व किया इतना ही नहीं सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फौज में एक महिला बटालियन भी गठित की, जिसमें उन्होंने रानी झांसी नाम के रेजिमेंट का गठन किया था और उस रेजिमेंट की कैप्टन लक्ष्मी सहगल थीं।

सुभाष चंद्र बोस के बारे में एक और बात जो शायद ज्यादातर लोगो को नहीं पता होगी वो ये कि महात्मा गाँधी जिन्हें हम राष्ट्रपिता कहकर सम्मानित करते है उन्हें यह उपाधि किसने दी थी ?

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दरसल महात्मा गांधी को सबसे पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहा था । 4 जून 1944 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में एक रेडियो संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को पहली बार ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था।

सुभाषचंद्र बोस के नारे जैसे आज भी युवाओं को देश के प्रति न्योछावर होने का सन्देश देते है आज भी देश की जनता जब अपनी हुकूमत के खिलाफ आन्दोलन करने का मन बनाती है तो जैसे उन्हें सुभाष चंद्र बोस का वो नारा याद आता है दिल्ली चलो|

 

रिपोर्ट-पूजा पाण्डेय

मीडिया दरबार

 

 

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