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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस दौरे की आड़ में योगी यह बात छुपा ले गए ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस दौरे की आड़ में योगी यह बात छुपा ले गए ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आज 1475 करोड़ की सौगात लोगों को दी। मोदी उत्तर प्रदेश में अपने लोकसभा क्षेत्र का दौरा ऐसे समय में कर रहे हैं, जब इस राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. बता दें कि उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं| पीएम मोदी आज 744.02 करोड़ रुपये की 78 परियोजनाओं का लोकर्पण किया.

ही उन्होंने 838.91 करोड़ रुपये की 206 योजनाओं की सौगात काशी की जनता को दी . इसमें स्वास्थ्य, विकास, जल निगम, ऊर्जा, सिंचाई आदि की परियोजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान और भारत की दोस्ती के प्रतीक रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर सहित कई परियोजनाओं की भी सौगात दी।

पीएम पांच घंटे के काशी प्रवास में जनसभा को संबोधित करने के साथ ही दो अलग-अलग संवाद में भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज करीब पांच घंटे का समय वाराणसी में बिताएंगे। इस दौरान जापान और भारत की दोस्ती के प्रतीक रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर सहित कई परियोजनाओं की सौगात दी।

पीएम  नरेंद्र मोदी

पीएम  नरेंद्र मोदी पांच घंटे के काशी प्रवास में जनसभा को संबोधित करने के साथ ही दो अलग-अलग संवाद में भी शामिल हुए। अब बताते है आपको कौन कौन सि योजनाये शुरू करने वाले है पीएम  मोदी की- 86 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय सुविधा एवं सहयोग केंद्र रुद्राक्ष, 62.89 करोड़ रुपये का राजकीय चिकित्सालय पांडेयपुर में 50 शैया, महिला चिकित्सालय का अनावासीय भवन, 29.63 करोड़ रुपये का बीएचयू में रीजनल इंस्टीट्यूट आफ ऑफ थेल्मोलॉजी,

62.04 करोड़ रुपये का 33.91 किलोमीटर लंबे पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण, 50.17 करोड़ रुपये का वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर आरओबी, 20.25 करोड़ रुपये से राजघाट से अस्सी तक क्रूज वोट के संचालन का काम, चार पार्कों का सौंदर्यीकरण और 84 घाटों पर सूचना पट्ट, 14.21 करोड़ रुपये से मछोदरी स्मार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल व स्किल डेवलपमेंट सेंटर का विकास, 21.17 करोड़ रुपये से गोदौलिया चौराहे पर मल्टीलेवल पार्किंग सहित अन्य परियोजनाएं हैं।

इसी के साथ मुख्यमंत्री योगी ने ट्वीट कर कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गंगा नदी पर पर्यटन विकास के लिए रो-रो वैसल्स और वाराणसी-गाजीपुर राजमार्ग पर थ्री-लेन फ्लाईओवर ब्रिज का उद्घाटन किया जाएगा। ये टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के साथ ही ‘नए भारत का नया उत्तर प्रदेश’ बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

पीएम नरेंद्र मोदी का वाराणसी से प्रेम किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल वहां के सांसद हैं, बल्कि वाराणसी को लेकर बेहद संवेदनशील भी हैं. कोरोना के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से अपने संसदीय क्षेत्र से दूर रहे.

हालांकि इस दौरान भी उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वाराणसी और वहां के लोगों के साथ अपना जुड़ाव बनाए रखा| जैसे की मोदी जी ने बनारस में बीएचयू में 100 बैड की सुविधा, गौदोलिया में मल्टी लेवल पार्किंग, गंगा नदी पर रो- रो वैसल, वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर तीन लेन के फ्लाईओवर समेत कुछ और परियोजनाओं का उद्घाटन किया.

साथ ही कई सौ करोड़ की नई परियोजनाओं की शुरुआत भी की तो मोदी जी को एक बार और राज्यों के बारे में भी सोचना है.जहाँ एक तरफ आधुनिक बनारस की नीव रखी जा रही है वहीँ दूसरी तरफ युपी में बेरोजगारी को लेकर युवा प्रदशर्न कर रहे है| अब हमारा सवाल यही उठता है की क्या प्रधामंत्री जो को एक बार बेरोजगारी और उन बेरोजगार लोगों से नहीं मिलना चाहिए|

आइये बताते है आपको पूरा मामला क्या है- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का चार साल में चार लाख नौकरियों का विज्ञापन तो अक्सर कहीं न कहीं दिख ही जाता है लेकिन जो नहीं दिखता वो है प्रदेश के बेरोज़गार युवाओं का दर्द, नौकरी और वैकेंसी को लेकर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन। बीते कई दिनों से लखनऊ के SCERT यानी स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग में पूरे उत्तर प्रदेश से इकट्ठा हुए अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं।

धरना प्रदर्शन और बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मिलने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन इन अभ्यार्थियों की एक भी सुनने को तैयार नहीं है। प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का मामला पहले भी कई बार सुर्खियों में रहा है। प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में BTC और बीएड वाले शामिल होते हैं।

बीएड वाले पहले प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए योग्य नहीं थे लेकिन अब बीटीसी के साथ बीएड वाले भी आगे की भर्ती के लिए पात्र हैं। बीटीसी और बीएड करने वाले उम्मीदवारों को UPTET यानी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होती है। इस परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवारों को टेट सर्टिफिकेट मिलता है। इस सर्टिफिकेट को हासिल करने वाले अभ्यर्थी ही सरकार द्वारा निकाली गई शिक्षकों की भर्ती के लिए योग्य होते हैं।

सरकार जो भर्ती निकालती है उसकी भी परीक्षा होती है, उस परीक्षा को यूपी में सुपरटेट कहा जाता है। सुपर टेट को पास करने वाले उम्मीदवारों की काउंसलिंग कर उन्हें प्राइमरी शिक्षक के पद पर नियुक्त किया जाता है।

अब इसी भर्ती और वैकेंसी के लेकर पूरा बवाल मचा हुआ है। ऑल बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित कुमार एक आरटीआई का हवाला देते हुए बताते हैं कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, सीट खाली हैं, योग्य अभ्यर्थी भी हैं। लेकिन सरकार वैकेंसी नहीं निकाल रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया था कि पूरे देश भर में शिक्षकों के 10 लाख 60 हजार पद खाली हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार के बाद सबसे ज्यादा यूपी में से 2 लाख 17 हजार पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा योगी सरकार ने खुद 51 हजार शिक्षकों के पद खाली होने की बात कही थी। पिछले साल मई में सरकार ने 69000 शिक्षक भर्ती मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया था, इसमें कहा गया था कि शिक्षकों के करीब 51 हजार पद खाली हैं, जिसका विज्ञापन अभी जारी नहीं हुआ है।

वहीं, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से आए RTI के जवाब का हवाला देते हुए अभ्यर्थी प्राथमिक स्कूलों में 1.7 लाख शिक्षकों के खाली पद होने का दावा कर रहे हैं। ये आंकड़ा 2019-20 का है। जाहिर है प्रदेश में रोज़गार की हक़ीक़त सरकारी दावों की तस्वीर से उलट नज़र आती है।

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रिपोर्ट : नेहा परिहार

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