राष्ट्रीय

फेक न्यूज़ पर सुप्रीम कोर्ट ने लगायी केंद्र सरकार को फटकार

फेक न्यूज़ पर सुप्रीम कोर्ट ने लगायी केंद्र सरकार को फटकार

तबलीगी जमात से जुडी फेक न्यूज़ दिखाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा है और कहा है की जल्द से जल्द जानकारी का एफिडेविट कोर्ट में जमा किया जाए

Source Social Media

न्यूज़ चैनल अगर कोई खबर दिखाता है तो उस पर भरोसा किया जाता है। क्योंकि मीडिया की ज़िम्मेदारी है आप तक सही और सटीक खबर पहुंचाना, पर कैसा लगेगा जब यह पता चलेगा की ये न्यूज़ चैनल्स जो खबरें आपको दिखा रहे हैं वो फेक न्यूज़ है, और उस फेक न्यूज़ से किसी धर्म, संगठन की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गयी है।  सुप्रीम कोर्ट में जमीअत उलमा-इ-हिन्द ने तबलीगी जमात के खिलाफ न्यूज़ चैनल्स द्वारा फैलाई जा रही घृणा की विचारधारा के खिलाफ याचिका दायर की गयी है।  जिस याचिका की सुनवाई में केंद्र सरकार से सवाल पूछे गए हैं।  सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे ने केंद्र से न्यूज़ चैनल्स के हिंसात्मक कंटेंट को लेकर सवाल किये हैं, उन्होंने पूछा है की क्या केंद्र के पास ऐसा कंटेंट दिखाने वाले चैनल्स को बंद करने का अधिकार है ? और अगर है तो ऐसे कंटेंट पर रोक क्यूँ नहीं लगाई जा रही।  क्यों NBA  जैसी निजी संस्थाओं से हमें इस कंटेंट के सन्दर्भ में सवाल पूछने पड रहे है।  केंद्र सरकार इस पर कोई कदम क्यों नहीं उठाती।  उन्होंने कहा की अगर आपके पास इस सवाल का जवाब है तो बताइये नहीं तो हमें किसी अन्य एजेंसी का गठन करना पडेगा।  सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा की आपके केबल टीवी एक्ट के एफिडेविट से हम असंतुष्ट है इसलिए हमें यह जानना है की आप कैसे एक केबल टीवी को सभी शर्तों के अधीन न्यूज़ दिखाने के लिए नियुक्त करते हैं।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा की “पिछले कुछ महीनों में यह देखा गया है की मीडिया का एक भाग जर्नलिस्टिक पौलिसी के अंतर्गत न रहकर अपनी मर्ज़ी का कंटेंट दर्शकों के सामने पेश करते आ रहे हैं।  क्योंकि यह अधिकार जनता का है की वो कौन सी खबर किस चैनल पर देखना पसंद करेंगे।  लेकिन इन मीडिया चैनल्स पर जो कंटेंट जा रहा है वो बिना फैक्ट चेक किये जा रहा है जिस वजह से जनता तक गलत जानकारी पहुँच रही है।  जिस वजह से सरकार की तरफ से लगभग 743 सोशल मीडिया चैनल्स को ब्लाक कर दिया है।  साथ ही कोरोना के सन्दर्भ में फेक न्यूज़ फैलाने वाली वेबसाइट्स भी बंद कर दी गयी है।  सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा संवेदनशील कंटेंट दिखाने वाले चैनल को बैन करने के बारे में भी केंद्र से सवाल किया है और कहा है की उनपर कार्यवाही करने के अधिकार उनके पास है या नहीं? केंद्र की तरफ से प्रधान पब्लिक प्रोसिक्यूटर तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में हाज़िर हुए थे।  उन्होंने केबल टीवी एक्ट का ज़िक्र किया जिसमें सेक्शन 19 और 20 के तहत किसी भी न्यूज़ चैनल को ऐसा संवेदनशील कंटेंट दिखाने की अनुमति नहीं है जिस से किसी भी संगठन या धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचे और देश की अखंडता को नुक्सान हो।  ऐसे उदाहरण देखे गए हैं जहाँ मीडिया संगठनों पर राजनैतिक दल किसी कंटेंट को जनता के बीच प्रचलित करने के लिए दबाव बनाते हैं, और मीडिया चैनल्स भी अपनी टीआरपी के लिए फेक कंटेंट जनता तक पहुंचाना शुरू कर देते हैं।  कोरोना काल में तबलीगी जमात से जुडी कई फेक खबरें लोगों को उनके मोबाइल की नोटीफिकेशन में नज़र आती रही जिन ख़बरों का कोई वजूद नहीं होता था लेकिन उस संगठन से जुडी गलत जानकारी फैलाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए ऐसी अनेकों ख़बरें जनता के बीच उनके मोबाइल के ज़रिये फॉरवर्ड हुई है।  अभी तक केंद्र की तरफ से इस सवाल का उचित जवाब नहीं मिला है क्योंकि जो एफिडेविट कोर्ट में पेश किया गया है उससे न्यायालय सहमत और संतुष्ट नहीं है।  अब देखना यही है की कितनी जल्दी सरकार का जवाब मिलता है और कितनी समय अवधि में फेक न्यूज़ चलाने वाले चैनल्स के खिलाफ कोई उचित कार्यवाही की जाती है।

जयंती झा 

मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES