राजनीति

बंगाल की राजनीति में वो वक्त जब लगा ममता दीदी नहीं रही इस दुनिया में!

31 साल पहले क्या हुआ था बंगाल में ममता बनर्जी के साथ ?

बंगाल में चुनाव अपने चरम पर है, जहाँ सभी पार्टियाँ जीत के लिए हाथ पांव मारती नज़र आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ टीएमसी और भाजपा के बीच काँटे की टक्कर देखने को मिल रही है, ममता बनर्जी नंदीग्राम से नामांकन भरने के बाद से ही चोटिल है|

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वह व्हील चेयर पर ही चुनाव प्रचार और रैलियां करती नज़र आ रही है, पर क्या आप जानते है कि बंगाल की राजनीति में एक वक्त ऐसा भी आया था जब पूरे बंगाल में यह अफवाह फैल गई थी कि ममता बनर्जी की मौत हो गई है|

31 साल पहले जब ममता दीदी कांग्रेस पार्टी में थी तब उनपर एक हमला हुआ था जिसके बाद पूरे बंगाल में उनकी मौत की अफवाह फैल गई थी।

ममता बनर्जी 1990 में हुई थी चोटिल

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वक्त था सन् 1990 का जब ममता दीदी कलकत्ता के हज़ारा में 16 अगस्त को दीदी पर एक हमला हो गया था इस हमले में ममता दीदी का सर भी फूट गया था औऱ वह बुरी तरह से चोटिल हो गई थी|

उस समय दीदी पर हुए हमले का आरोप CPM की युवा विंग DEMOCRATIC YOUTH  FEDRATION OF INDIA  के कार्यकर्ताओं पर लगा। बंगाल के अखबार उस समय ममता दीदी से जुड़ी हेडलाइन से भरे थे, जिसमें ममता दीदी की हत्या, या उन्हें बुरी तरह से अपंग करने की साज़िश की खबरे लिखी गई थी।

लालू आलम को बनाया गया था दोषी

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हमले की जाँच शुरु हुई, शक के आधार पर लालू आलम को गिरफ्तार किया गया , और मुख्य आरोपी भी माना गया। लालू आलम को साल 2019 में जाकर बंगाल कोर्ट ने इन आरोपो से मुक्त किया।

बरी होने के बाद लालू आलम ने एक अखबार को अपना बयान दिया जिसमें उन्होंने बताया कि, साल 1990 में दीदी पर हुए हमले के बाद से बंगाल में दीदी की मौत की खबर फैली, और सीपीएम नेता घबरा गए, उन्होंने जल्दबाज़ी में मेरा नाम आरोपी के नाम पर आगे कर दिया, ताकि मामले को जल्द से जल्द रफादफा किया जा सके।

लालू ने बताया कि कैसे उनकी फोटो के साथ छेड़छाड़ कि गई और पुलिस वालों के पास कोई भी नेगेटिव ना होते हुए भी मेरे नाम की चार्जशीट दाखिल कर ली, और मुझ पर मुकदमा चलाया गया।

11 साल बाद मेरे बड़े भाई दो सीपीएम में नेता हुआ करते थे उन्होंने बीजेपी का हाथ थाम लिया, और जिस वजह से उनकी एक फोटो कॉपी की दुकान भी ले ली गई,, और जब वे 28 साल बाद बरी हो कर आए तो उन्होंने ममता दीदी से अपनी दुकान मांगी। साल 1990 में दीदी पर हुए हमले के बाद से ही उनकी छवि बंगाल में एक कद्दावर नेता के रुप में निखरी।

क्या ममता बनर्जी अपनी छवि कर पाऐंगी मजबूत 

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इस बार के चुनाव में भी ममता दीदी चोटील है , हालांकि इस बार हुए हमले की जाँच अभी पूरी नहीं हो पाई है , लेकिन यहां ये देखना बहुत दिलचस्प है कि क्या इस बार भी ममता बनर्जी चोटिल होने के बाद बंगाल में अपनी छवि और भी मजबूत कर पाऐंगी या नहीं ?

रिपोर्ट – रूचि पाण्डे

मीडिया दरबार 

 

 

 

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