राष्ट्रीय

बिहार में कोरोना जांच में गड़बड़ी ?

बिहार सरकार पर शुरू से कोरोना महामारी के दौर में भीषण लापरवाही का आरोप लगता रहा हैं, और होता भी क्यों ना लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में जहाँ पुलिस लोगो को प्यार से या डंडे के जोर से नियंत्रण में ला रही थी तो वही बिहार में पूरे जोश में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई जा रही थी। सख्ती के नाम पर बिहार के मुख्यमंत्री ने दुसरे राज्य में काम कर रहे, अपने लोगो को ये कह कर डांट दिया कि जो जहाँ है वो वही रहें, यहाँ ना आवे। राज्य में ना ही टेस्टिंग की संख्या को बढाया गया और ना ही समय रहते राज्य में टेस्टिंगलैबस का इंतज़ाम किया गया। नतीजा ये हुआ की बिहार के सभी जिले कोरोना की चपेट में आ गए।बीते दिनों बिहार में कोरोना जांच में तेज़ी आई है और अब अब हर दिन औसत टेस्ट की संख्या 70-80 हज़ार तक आ रही है। लेकिन इसमें से कितने टेस्ट एंटीजन किट से हुए है और कितने आरटी पीसीआर से हुए, ये जानकारी आपको बिहार सरकार उपलब्ध नहीं कराती है। बस सरकार ने बता दिया है आपको मानना है तो मानिए नहीं मानना तो मत मानिए। अब अगर मौतों के आंकड़े की बात करे तो उसकी सत्यता का प्रमाण तो आप मांग ही नहीं सकते हैं।

कुछ समय पहले तक पटना से कोरोना जांच के सैंपल मुंबई या हरियाणा के गुरुग्राम भेजे जा रहे थे क्यूंकि वहां इतने लैबस ही नहीं है, जो सबका जांच कर पाए। उसके बाद भी रिपोर्ट आने में 4-5 दिनों का समय लग जाता है। जरा सोचिये स्थिति कितनी भयावह है। अगर किसी को कोरोना के प्राणघातक लक्षण है तो उसकी रिपोर्ट आने में ही इतना समय लग जाएगा कि उसके बाद उसके बचने की संभावनाए कम हो जायेगी। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बैंगलोर जैसे शहर जहाँ टेस्टिंग, मेडिकल की तमाम सुविधाएं मौजूद है वहां भी मौतों का आंकड़ा रोकने में सरकारें नाकाम रही हैं। तो बिहार में जहाँ समय पर जांच भी मुहैया नहीं हो रही है, बिना जांच डॉक्टर इलाज मुहैया नहीं करा रहे है, बिना इलाज खुद का समाज आपकी मदद नहीं कर रहा है, वहां की कल्पना क्या करे और अगर करे भी तो कैसे करे?

लेकिन अचानक से आई टेस्टिंग की बढती संख्या में कितनी सच्चाई है? अगर आज भी पटना के किसी भी सरकारी या प्राइवेट जांच केंद्र से टेस्ट के लिए कहें तो मरीज को कम से कम सात दिनों का वेटिंग टाइम दिया जाता है। अगर आम जनता को सात दिनों का वेटिंग टाइम और फिर 4-5 दिनों तक रिपोर्ट का भी इंतज़ार करना पड़ रहा है, तो टेस्ट हो किसका रहा है। सरकारी अस्पतालों में तो एंटीजन किट से टेस्ट करा जा रहा है, और उसका परिणाम भी 2-3 घंटो में मरीजो को दिया जा रहा है। जी हां!! 2-3 घंटो में, सोचिये जिस किट से दुनियाभर में 5 मिनट में ही पता चल जाता है कि किसी को कोरोना है या नहीं, उस किट से भी बिहार में जांच में इतना समय लग रहा है। अब इस एंटीजन किट से कोरोना की जांच कितनी सटीक रहती है, वो तो जग-जाहिर हैं।कोरोना जांच के लिए मेडिकल एक्सपर्ट्स से अनुसार RT-PCR जांच ही सही तरीका है। तंज़ानिया नाम के देश में पपीता, बकरा, सब्जियां इत्यादि भी कोरोना किट की जांच से कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। तभी से इस एंटीजन टेस्ट की सत्यता पर संदेह खड़ा हो गया था उसके बावजूद हमारे देश में सरकारें इस किट से जांच कर अपनी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लेना चाहती हैं। अब बात करते है बिहार सरकार की जो ये तक नहीं बता रही कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में हो रही जांच में किस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर आपकी अस्पतालों में मजबूत जान-पहचान है तो आप पता कर सकते है, फिर वही जानकारी सारे अखबार और चैनल वाले चला देते है क्यूंकि सच के बारे में पता लगाने का और कोई जरिया नितीश कुमार सरकार ने छोड़ा ही नहीं है। बीते दिनों किसी सूत्र से पता चला कि बिहार में लगभग 95 फीसदी तक जाँच एंटीजन टेस्ट किट से किये जा रहे है। इसका मतलब औसतन 80000 हज़ार तक हो रहे टेस्टों में से 76000 टेस्ट एंटीजन टेस्ट किट से हो रहे है। जबकि ICMR की दिशा निर्देशों के अनुसार RT-PCRजांच के बाद ही किसी मरीज को कोरोना संक्रमित घोषित किया जायेगा। तो क्या 4000 RT-PCR में ही 3000-3800 कोरोना मरीज सामने आ रहे है, अगर ऐसा है तो स्थिति बेहद खतरनाक है। और यदि वह सूत्र से आई जानकारी गलत है तो बिहार सरकार सही जानकारी क्यों नहीं देती है। बीते दिनों एक विडियो वायरल हुआ जिसमे एक विधायक ही अपनी माँ के इलाज के लिए खुद भटक रहे थे और वह विधायक यह कह कर अपनी स्थिती का वर्णन कर रहे थे कि जब मैं विधायक हो कर अपनी माँ के इलाज के लिए  पटना राजधानी में भटक रहा हूँ, तो आप आम लोगो और बाकी शहरों की कल्पना भी नहीं कर सकते है। इस विडियो पर नितीश कुमार या बिहार की उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रतिक्रिया देते भी कैसे? ये तो हकीकत है लेकिन बिहार में चुनाव है और ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता है। हाँ, अगर सुशांत सिंह राजपूत के मामले में बोलना हो तो जरुर आपको नितीश कुमार दिखाई दे जायेगे। इन सब बातो के बावजूद भी बिहार में चुनाव की तैयारी जोर पर है। और इस बार नारा दिया गया है कि बिहार के विकास में, मै छोटा सा भागीदार हूँ, मै भी नितीश कुमार हूँ।

रोहित मिश्रा – मीडिया दरबार

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