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बिहार में चुनाव के बीच एक युवती को जलाकर मारा, प्रशासन बना मूक

बिहार में चुनाव के बीच एक युवती को जलाकर मारा, प्रशासन बना मूक

बिहार विधानसभा चुनाव की चुनावी तारीखों के बीच बिहार के वैशाली में एक युवती को केरोसीन डालकर जला दिया गया, प्रशासन की कोई प्रतिक्रया नहीं।

Source Social Media

बिहार विधानसभा चुनाव में विजेता की जीत का बिगुल तो बज गया लेकिन इस जीत के परदे के पीछे एक मामले को दफन भी कर दिया गया है। जहाँ एक तरफ राज्य में जीत की ख़ुशी मनाई गयी तो वहीँ दूसरी तरफ मतदान तारीखों के बीच एक बिहार के वैशाली में 20 साल की युवती को जला कर मार दिया गया। 30 अक्टूबर यानी आज से करीब 17 दिन पहले सतीश राय, विजय राय और चन्दन कुमार ने इस युवती पर किरोसीन तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया।  दरअसल इन तीनों आरोपियों ने पहले युवती के साथ छेड़खानी की थी और जब उसने उन्हें ये सब करने से इनकार किया और कहा की वो यह बात अपनी माँ को बताएगी तो युवती पर केरोसीन तेल डालकर उसे जला दिया गया।  युवती के साथ यह दर्दनाक सुलूक 30 अक्टूबर को चुनाव प्रक्रिया के बीच किया गया था जिसके बाद दिवाली से एक दिन पहले यानी 15 नवम्बर को इस युवती ने एक प्राइवेट अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया।  युवती की माँ शैमुना खातून ने बताया की, घटना के 2 दिन बाद भी पुलिस एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं थी।  4 महीने बाद युवती की शादी होने वाली थी।  बताया यह भी जा रहा है की आरोपी, युवती पर शादी का दबाव डाल रहा था जिस से इनकार करने की सजा उसे दे दी गयी।  लगभग तीन महीने से आरोपी, युवती को परेशान कर रहा था।  गुलनाज अपनी माँ के साथ सिलाई करने का काम करती थी।  जिन आरोपियों को अपराधी बताया जा रहा है उनका नाम युवती ने मृत्यु से पहले साफ़ सीधा अपने बयान में लिया है।  युवती का परिवार अपनी बच्ची को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर आ पहुंचा जिनके साथ कई लोगों ने इस धरना प्रदर्शन में परिवार का साथ दिया।  गौरतलब है की 17 दिनों बाद भी आरोपी बिना डर के खुले घूम रहे हैं क्योंकि पुलिस ने अभी तक इनमें से एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।  कई महिला संगठनों ने युवती को इन्साफ दिलाने की मांग की है जिसके साथ साथ परिवार को 20 लाख रुपये की मदद और एक सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गयी है।  लेकिन युवती के परिवार ने सिर्फ एक मांग की है उन्होंने कहा है की “हमें हमारी बहन और बच्ची के कातिलों को फांसी पर चढ़ाना है, और जब तक प्रशासन ये कदम नहीं उठाता हमारी बच्ची के शव के साथ हम यहीं चौक पर बैठे रहेंगे।  मगर अफ़सोस की बात तो यह है की यह पूरा मामला देश के सामने तब पहुंचा जब सोशल मीडिया पर युवती की विडियो वायरल हुई।  ट्विटर पर #justiceforgulnaazट्रेंडिंग पर पहुँच गया। लेकिन फिर भी किसी नेशनल मीडिया चैनल ने इस खबर को नहीं दिखाया। इस मामले के बाहर आने के 2 दिन बाद भी बीबीसी के अलावा यह खबर किसी बड़े न्यूज़ चैनल पर नहीं देखने को मिली है।  क्योंकि देश की मीडिया फिलहाल मुख्यमंत्री शपथ समारोह को कवर करने में जुटी है।  लेकिन मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह को आयोजित करने से पहले के इस सफ़र में जिस युवती को ज़िंदा जला के मार दिया गया उसका उल्लेख भी दूर दूर तक नहीं है। इतने संजीदगी भरे मामले पर पर्दा डाल दिया गया लेकिन बिहार में फिलहाल जीत की ख़ुशी मनाना ज्यादा ज़रूरी है।  क्योंकि इस मामले पर कोई कदम न उठाने की वजह से सरकार इस बात का सन्देश दे रही है की चुनाव जैसी संवेधानिक प्रक्रिया के बीच अगर बिहार की एक बच्ची अपनी जान गंवाती भी है तो वो जीत से बड़ी बात थोड़ी है। इस पूरी घटना पर प्रशासन से लेकर मीडिया तक सबने चुप्पी साधी हुई है, जो यह मानने को विवश करता है की बिहार में ऐसी घटनाओं पर प्रशासन मूक बना बैठा रहेगा, क्योंकि प्रतीत ऐसा ही हो रहा है की मुहं के साथ साथ बिहार प्रशासन की आँखें भी बंद हैं।

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