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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद , और यूएन में सुधार की मांग को लेकर पीएम उठाया प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद , और यूएन में सुधार की मांग को लेकर पीएम उठाया प्रश्न

Source Social Media

कल दुनिया की 5 उभरती हुई सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का शिखर सम्मेलन हुआ जिसमें पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर पाकिस्तान और चीन को आड़े हाथ लिया, और अपने सीमा विवाद का समाधान करने के लिए भी कहा, इस शिखर सम्मेलन में क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने जिससे भारत , चीन और पाकिस्तान को त्रिपक्षीय रिश्तों पर असर पड़ेगा

इस हफ्ते तक ऐसा दो बार हो चुका है। जब भारत और चीन आमने सामने आए है। इससे पहले sco यानी शंघाई सहयोग संगठन और अब दूसरी बार ब्रिक्स देशों के 12 वें शिखर सम्मेलन में भारत औऱ चीन वर्चुअल मीटींग में आमने सामने आए है। इस बीच rcep सबसे बड़ी ट्रेड डील भी हुई जिसका भारत ने बहिष्कार किया था। लेकिन कल यानवी मंगलवार को हुई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत कई अहम मुद्दों को उठाकतर चीन और पाकिस्तान को आडे हाथ लिया है। क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने जिससे वैश्विक स्तर भी उनकी बात का है अर्थ गहरा जानने से पहले आप जान लिजिए की ब्रिक्स क्या है, और ब्रिक्स को यह नाम कैसे मिला औऱ यह संगठन कैसे कार्य करता है. ब्रिक्स का अर्थब्रिक्स दुनिया में पाँच उन उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है जो विश्व शक्ति बनने के प्रयास में जुटे है।

ब्रिक्स का अर्थ

इसमें शामिल देशों में ब्राज़ील , भारत, रुस, चीन और साउथ अफ्रिका है। ब्रिक्स एक स्वत: सहमति से बनाया गया गठन है। यह किसी भी प्रकार की संधि से नहीं जुड़ा है। ब्रिक्स पाँचो सदस्य देशों का एक मंच है। ब्रिक्स पाँचो सदस्य देशों का एक मंच है। ब्रिक्स का उद्देश्य सदस्य पाँचो देशों के बीच विकास के मौकों में वृध्दि के लिए न्यायसंगत और पारस्परिक रुप से व्यापक स्तर पर संबंध स्थापित करना है। प्रधानंमत्री मोदी ने इस सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दों को उठाकर बिना पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम लिए उसे आड़े हाथ लिया। साथ ही पीएम ने यूएन की सिक्योरिटी काउंसिल में बदलाव की बात भी छोड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में यूएन में मल्टिलेटरल सिस्टम एक सेकट के रुप मे ही उभर रहा है। आज के समय में ग्लोबल गवर्नेंस के संस्थानों की क्रेडिबिलिटी और प्रभावशालीनता पर भी असर पड़ रहा है।

यूएन में सुधार की ज़रुरत

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 75 वी वर्षगांठ पर कहा कि भारत को आज भी संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों पर विश्वास है। लेकिन समय के साथ अब ज़रुरत है कि संयुक्त राष्ट्र के साथ अन्य अंतर्राष्ट्रिय संगठनों जैसे imf, who, wto  संगठनों में भी बदलाव की ज़रुरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्षगांठ के मौके पर दिव्यतीय विश्व युध्द में शहीद हुए 25 लाख भारतीय वीर सैनिकों को श्रृध्दांजलि दी है। पीएम मोदी ने कहा की आतंकवाद भी इस समय विश्व में सबहसे बडी समस्या बन कर उभर रहा है। अब समय आई गया है कि हम सब को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो कर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले औऱ आतंकवाद का समर्थन करने वालों को भी दोषी ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद वैश्विक अर्थव्यस्था में रिकवरी हम सभी सदस्यों देशों ने अहम भूमिका निभाई है। कोविड के बाद वैश्विक स्तर पर रिकवरी के लिए ब्रिक्स में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना ज़रुरी है। ब्रिक्स के सदस्यों देशों में करीब 42 प्रतिशत आबादी केवल इन्ही देशों की है। हमारे देश ग्लोबल इकॉनोमी के मुख्य इंजन है।

अब भारत के इन सभी आवाहनो पर पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश दिया है साथ ही पाकिस्तान के सबसे बड़े समर्थक रहें चीन को भी यह समझा दिया है कि अगर चीन पाकिस्तान के ज़रिए अपना दित नहीं साध सकता क्योंकि ब्रिक्स के अदंर सदस्य देशों के बीच भी अधिक से अधिक जनसंख्या बसती है जिससे चीन आर्थिक रुप से भारत पर अधिक दबाव नहीं डाल सकता । ब्रिक्स समम्लेन में प्रधानमंत्री द्वारा उठाए मुद्दों पर कितनी गहराई से कदम उठाया जाएगा यह देखना अहम होगा।

 

 

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