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भारत के वो मंदिर जहाँ प्रसाद के रुप में मिठाई नहीं “नूडल्स” और “वाइन” चढ़ाई जाती है !!

भारत के वो मंदिर जहाँ प्रसाद के रुप में मिठाई नहीं “नूडल्स” और “वाइन” चढ़ाई जाती है !!

काली माता मंदिर

image source –  social media 

भारतीय परंपराओं में अनेक प्रकार की परंपराओ का प्रचलन है। जिसमें कई परंपरा मंदिरो से जुड़ी है, जो इतनी विचित्र होती है कि किसी को भी आश्चर्य में डाल देती है। भारत के इन मंदिरो में पूजा से लेकर मन्नत मांगने से लेकर चढ़ावा चढ़ाने तक अलग अलग प्रकार की परंपराऐं है। जानिए कुछ ऐसे मंदिरो के बारे में, जहाँ पूजा से लेकर चढ़ावे की परंपरा बरसो से चली आ रही है पर बहुत ही विचित्र है। इन मंदिरो में चढ़ावे के तौर पर बहुत सी दिलचस्प चीज़ो का इस्तेमाल होता है-

कामाख्या देवी मंदिर 

असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर में प्रचलित एक परंपरा बेहद दिलचस्प परंपरा है। यहां जून महीने में अंबुबाची मेला लगता है। इस समय माँ कामाख्या श्रृतुमति रहती है। इन दिनों मंदिर के गर्भगृह के द्वारा अपने आप ही बंद हो जाते है। मान्यता के अनुसार इन तीन दिनों में माँ रजस्वला होती है, तीन दिन बाद माँ भगवती का श्रृंगार कर भव्य पूजा अर्चना की जाती है।

जब देवी रजस्वला होती है तब पूरे गर्भगृह में सफेद वस्त्र बिछा दिया जाता है। और जब वस्त्र पूरी तरह रक्त से रक्तवर्ण हो जाता है तो इसे भक्तो को प्रसाद के रुप में दिया जाता है। मान्यता के अनुसार इस कप़ड़े से भक्तो को शौर्य और बल की प्राप्ति होती है।

काल भैरव मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर के बाहर सजी दुकानों पर हमें फूल, प्रसाद, श्रीफल के साथ-साथ वाइन की छोटी-छोटी बोतलें भी सज़ी दिखती है। यहां भक्त काल भैरव को चढ़ाने के लिए प्रसाद के साथ-साथ मदिरा की बोतलें भी खरीदते है। बाबा के दर पर आने वाला हर भक्त उनको मदिरा जरूर चढ़ाता है। बाबा के मुंह से मदिरा का कटोरा लगाने के बाद मदिरा धीरे-धीरे गायब हो जाती है। काल भैरव मंदिर का निर्माण मराठा काल में हुआ था।

मुरुगन मंदिर 

तमिलनाडु के पनाली हिल्स में मौजूद मुरुगन मंदिर अपने प्रसाद के लिए भी विशेष रुप से जाना जाता है। मुरुगन मंदिर प्रसाद के रुप में फल फूल नहीं बल्कि गुड़ या शुगर कैंडी से बना जैम भगवान को भोग लगाया जाता है , बाद में इसे ही भक्तो को प्रसाद के रुप में दिया जाता है। आमबोलचाल की भाषा में इसे पंचअमृतम कहा जाता है। इस जैम को तैयार करने के लिए यहां एक विशेष प्रकार के प्लांट की भी व्यवस्था की गई है।

अलागार मंदिर

मदुरई में मौजूद भगवान विष्णु का ये मंदिर जिसे कालास्हागर मंदिर भी कहा जाता है। अलागार  मंदिर में भक्त भगवान विष्णु को डोसा भोग के रुप में चढ़ाते है। डोसा का पहला टुकड़ा भगवान विष्णु को चढ़ाया जाता है, जिसके बाद ये प्रसाद भक्तो में बाँटा जाता है।

करणी माता मंदिर 

राजस्थान में स्थित करणी माता मंदिर की खासियत है यहां रहने वाले 2500 काले चूहें। जिन्हें बहुत ही पवित्र माना गया है। भक्त यहां जो भी प्रसाद लाते है उसे सबसे पहले इन चूहो को भोग लगाया जाता है। इसके बाद चूहों का जूठा प्रसाद भकतों में वितरित कर दिया जाता है। मान्यता के अनुसार इस प्रसाद के भक्तो के शाररिक कष्ट दूर हो जाते है।

चाइनीज़ काली मंदिर 

कलकत्ता में मौजूद इस मंदिर को यूँ ही चाइनीज़ काली मंदिर नहीं कहा जाता, दरअसल चाइनाटाउन के लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते है जिसके बाद से ही इस मंदिर को चाइनीज़ मंदिर के रुप में जाना जाता है। यहां भक्त काली माता को भोग में नूडल्स चढ़ाते है।

 

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रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

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