पर्यटन

मयोंग असम में काला जादू का केंद्र |

मयोंग असम में काला जादू का केंद्र

मयोंग
Source Social Media

यूं तो भारत विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का स्वामी देश माना जाता है , जहाँ कई सामज में बहुत सी विचित्र परंपराऐं मानी जाती है। और कुछ जगहें तो ऐसे ही जिनके नाम मात्र सुन लेने से इंसानों की रुह काँप उठती है। अगर आप को यह सब सुनने में झूठ फरेब या अंधविश्वास लग रहा है तो आप गलत है क्योंकि भारत में आज भी मौजूद है एक ऐसा गांव जहां जाने से भी लोग डरते है। आज भी असम औरर बंगाल में कई ऐसे इलाके है , जिन्हें जादू – टोने का केंद्र कहा जाता है। आज हम आपका अपने इस कार्यक्रम के माध्यम से परिचय करवाऐंगे एक ऐसे गांव से जिसे जाना ही जाता है उसके काले जादू के लिए।

सिर्फ नाम सुन ही दूर भागते है लोग

Source Social Media

 

असम में एक छोटा गाँव है जिसे मायोंग के नाम से जाना जाता है। यहां जादू टोना इस कदर फैला है कि कोई भी बाहरी यहाँ जाने से भी डरता है। असम में यह क्षेत्र वहीं स्थित है जहाँ इस गांव के आसपास एक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भी है , जहाँ लोग अपनी छुट्टियाँ बिताने आते है। इस गांव में काले जादू का खौफ इतना है कि इस क्षेत्र मं लोग जाने से भी कतराते है। ये गांव प्रसिध्द शक्ति पीठ मंदिर कामाख्या मंदिर से केवल 40 50 किमी की दूरी पर ही मौजूद है। माना जाता है कि विश्व में काले जादू की शुरुआत भी इस गांव से हुई थी।

मायोंग को लेकर एक कहानी बहुत प्रचलित है जिसके अनुसार 1332 ईस्वी में असम पर कब्जा जमाने के लिए मुगल बादशाह मोहम्मद शाह ने अपने घुड़सवारों के साथ चढ़ाई की थी। उस समय असम में हजारों तांत्रिक मौजूद थे और उन्होंने मायोंग को बचाने के लिए एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी। जिसे पार करते ही शाह की पूरी सेना गायब हो गई। यह तथ्य इस गांव को और भी मायावी बनाने का काम करता है। इसे काले जादू का गढ़ माना जाता है। यहां के हर घर में आज भी जादू किया जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि पूरे विश्व में काले जादू की शुरुआत इसी जगह से हुई है। असम का ये छोटा सा गांव मायोंग गुवाहाटी से लगभग 40 कि.मी. दूर है। इस गांव का इतिहास महाभारत से जुड़ा है।

महाभारत के भीम के बेटे घटोत्कच का गांव

Source Social Media

स्थानीय निवासियों का मानना है कि ये गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है। इस क्षेत्र का वो राजा माना जाता है। इस गांव का नाम मायोंग जो संस्कृत के माया से बना है। हालांकि अब यहां काला जादू किसी को परेशान करने के लिए नहीं किया जाता। लोग यहां अब इसका उपयोग सिर्फ बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं। यहां अक्सर बीमार इंसान की पीठ पर थाली टिका कर मंत्र उच्चारण के साथ मिट्टी मारी जाती है, कहा जाता है ये यहां बीमारियों को दूर करने का पारंपरिक तरीका है। यहां दो कुंड है एक अष्टदल कुंड व दूसरा योनि कुंड।

योनि कुंड पर हिंदू व अष्टदल कुंड पर बौद्ध अपनी तंत्र विद्या को सिद्ध करने के लिए साधना किया करते थे। यहां के संग्रहालय में 12वीं शताब्दी की कई पांडुलिपियां मौजूद हैं। ये तंत्र के वे कीमती दस्तावेज हैं जिनका मूल्य केवल इस भाषा को समझने वाले ही बता सकते हैं। एक जानकार के अनुसार इन लिपियों में उड़ने के लिए, किसी को मारने के लिए व वश में करने के लिए काला जादू किस तरह किया जाए ये सारी जानकारियां मौजूद हैं।

मायोंग में बूढ़े मायोंग नाम की एक जगह है जिसे काले जादू का केंद्र माना जाता है। यहां पर भगवान शिव व पार्वती के अलावा गणेशजी भी की तांत्रिक प्रतिमा है। जिसके सामने प्राचीन समय मे नर बलि दी जाती थी। इसके अलावा यहां योनि कुंड भी है जिसके आसपास कई मंत्र लिखे हैं। इसी जगह पर सबसे अधिक काले जादू के प्रयोग किए गए। स्थानीय लोग मानते हैं कि काले जादू की मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से लबालब रहता है।

मायोंग आज भी केवल अपने तंत्र मंत्र के लिए जाना जाता है,और यही कारण है जो इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण बनाता है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें,

मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES