राजनीति

महिला वोटर क्यों है बंगाल में चौथे चरण के चुनाव में खास ?

महिला वोटर को अपने पक्ष में कैसे करेंगे राजनीतिक दल ?

देश में पाँच राज्यों में होने वाले चुनाव जहाँ 6 अप्रैल को संपन्न हो गए है तो वहीं पश्चिम बंगाल में अभी चौथे चरण का चुनाव 10 अप्रैल को होना है। जिसमें कुल 44 सीटों पर मतदान होना है।

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राज्य के पाँच जिलों की 44 सीटों पर होने वाले मतदान इस बार पूरी तरह से महिला वोटर पर ही निर्भर नज़र आ रहें है और यहि कारण है कि इस बार बंगाल में चौथे चरण के चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल, अब वो चाहें बीजेपी हो या टीएमसी सभी महिलाओं को अपने पक्ष में करने की दिशा में आगे बढ़ रहें है। बंगाल में कैसे महिला मतदाता इस बार चुनाव में है ज़रुरी इसी पर हम करेंगे चर्चा-

बंगाल की 44 सीटो पर 10 अप्रैल को चुनाव

महिला वोटर
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बंगाल में इस बार जिन पाँच जिलों की 44 सीटों पर चुनाव होने है उनमें दक्षिण परगना की 11 सीट, हावड़ा की 9 अलीपुरद्वार की 5 और हुगली की 10 और कूच बिहार की 5 सीट शामिल है।

यदि आकंड़ो पर ध्यान दें तो बंगाल के जिले दक्षिण परगना में पुरुष के मुकाबले महिला वोटर की संख्या अधिक है, दक्षिण परगना में जहाँ पुरुष मतदाताओं की संख्या 15 लाख सढ़सट हज़ार एक सौ इकसठ है तो वहीं महिला वोटर की संख्या 15 लाख 70 हज़ार तीन सौ बयानवें हैं, यानी दक्षिण परगना की सभी विधानसभा सीटों पर पुरुष कम और महिलाऐं अधिक निर्णायक भूमिका में खड़ी है। या यूं कह लो चौथे चरण के मतदान में उम्मीदवारों के किस्मत के ताले की चाबी महिलाओं के पास ही है।

महिला वोटर की संख्या पुरुष के मुकाबलें अधिक

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हालांकि बंगाल की महिलाऐं अब सभी राजनीतिक दलों के द्वारा किए गए कार्य और वादों को परख रही है लेकिन ,अगर पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजो की ओर ध्यान दें तो इससे पहले ममता दीदी की अगुवाई वाली टीएमसी को ही महिला वोटर का साथ मिला था, और इसी को ध्यान में रखते हुए अब बीजेपी ओर लेख्ट कांग्रेस गठबंधन की निगाहे भी महिला वोटर पर ही है।

अगर पूरे राज्य के आकंडो पर ध्यान दें तो 17 दशमलव एक आठ करोड़ मतदाताओं में से तीन करोड़ एक पाँच करोड़ मतादाता केवल महिलाऐं ही है , और अगर कोई भी राजनीतिक दल इन वोटर की अनदेखी करता है तो इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

भाजपा की ओर महिला वोटर का बढ़ा झुकाव

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अगर ज़मीनी मुद्दो की बात करें तो पहले बंगाल में महिलाऐं लेफ्ट कांग्रेस के समर्थन में थी पर 2007 में सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर हुए आंदोलन के बाद से ही वह टीएमसी के साथ हो गई, लेकिन यहां भी एक बड़ा बदलाव आया लोकसभा चुनाव के बाद से ही बंगाल में महिलाऐं भाजपा की ओर होने लगी है।

पूरे बंगाल ने देखा कि भाजपा को इसका अच्छा खासा फायदा भी मिला है। कुछ महिलाओं का मानना है कि ममता दीदी देश में अकेली महिला मुख्यमंत्री है|

ऐसे में वे हमारे मुद्दों को बेंहतर समझती है और संसद में भी उठाती है, तो वहीं कुछ महिलाओं का मानना है कि इतने सालों से बंगाल की जनता ने ममता दीदी को मौका दिया इस बार बीजेपी को वोट देकर देख लेना चाहिए। यानी बंगाल में कुछ महिलाऐं ऐसी भी है जो एक नया प्रयोग करने में विश्वास रखती है।

बंगाल की महिलाओं के सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ रही है परख

]यहां एक बात और खास है वो ये कि बंगाल की महिला देश के अन्य राज्यों की महिलाओं के जैसी नहीं है जो पति के कहने पर ही वोट दें , वहां की महिलाऐं अपनी एक सोच रखती है, और सत्ता की कुर्सी पर अगला हकदार बैठाने के लिए अगला नेता चुनने की समझ भी।

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लेकिन ये बात सच है कि महिलाओं के लिए जो सुरक्षा सबसे अधिक ज़रुरी होती है, वे उसपर विचार कर रही है , जैसे सामाजिक सुरक्षा , आर्थिक सुरक्षा औररर एक अपराध मुक्त राज्य। जो भी राजनीतिक दल इन कसौटियों पर खरा उतरेंगा महिलाऐं उसे ही सत्ता पर बैठाऐंगी।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

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