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माता सीता की वो पवित्र रसोई जहां पकाए थे चावल

माता सीता की वो पवित्र रसोई जहां पकाए थे चावल

माता सीता रसोई घर

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

भगवान राम के वनवास की यात्रा से जुड़े ऐसे बहुत से स्थान है जो अब धार्मिक स्थल के रुप में जाने जाते है। इन्ही स्थलों में से एक पवित्र स्थल शामिल है जिसे आज सीता की रसोई के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार इस रसोई में माता सीता ने चावल पकाए थे, ये पवित्र स्थल एक प्राचीन मंदिर के समीप प्राचीन गुफा में स्थित है। मैं रुचि पाण्डें आज आपको हमारे कार्यक्रम धर्म दरबार के माध्यम से माता सीता की रसोई से जुड़ी कुछ जानकारियां बताउँगी।

कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में घूरपुर और जसरा बाज़ार से पूर्व दिशा में यमुनाजी के किनारे स्थित एक बहुत प्राचीन शिव मंदिर है जिसके निकट एक गुफा है। इस छोटी पहाड़ी पर खोद कर चित्र बनाए गए जिसे यहां के स्थानीय लोग माता सीता की रसोई कहते है।

चित्रकूट में भी माता सीता की रसोई मौजूद है- मान्यता के अनुसार त्रेता युग के भगवान श्रीराम अपने 14 वर्ष के वनवास के समय वे चित्रकूट के जंगलों में ही रहते थे। चित्रकूट उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी नदी के किनारे बसा है। चित्रकूट के जंगलों को आज भी संजोकर रखा गया है। चित्रकूट के जंगलो में आज भी माता सीता की रसोई मौजूद है, जहां माता सीता 5 ऋषियों को रोज़ाना भोजन करवाया करती थी। इस मंदिर को देखने के लिए लोग देश के कोने कोने से आते है।

इसी स्थल पर भगवान हनुमान का भी एक भव्य मंदिर है , जहां हनुमान जी की मूर्ति के पीछे से एक जलधारा बह रही है जिसे हनुमान धारा भी कहा जाता है। यहां बहुत रोचक बात है कि आज तक कोई भी वैज्ञानिक इस जलधारा के उदगम केंद्र को नहीं खोज पाया है। इसी मंदिर के पीछे स्थित है माता सीता की रसोई। इस मंदिर को देख भक्त भाव विभोर हो जाते है। माता सीता की रसोई अब केवल एक पवित्र स्थल नहीं बल्कि एक मंदिर की तरह है। यहां भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के मूर्तियों से साथ चारों भाईयों की पत्नियों माता सीता , उर्मिला , मांडवी  और सुक्रिर्ति की भी मूर्तियां स्थापित है। इस रसोई में बहुत से बर्तन भी रखे है, जिनमें चकला , बेलन, हांडी और प्लेट आदि शामिल है। मान्यता है कि इसी रसोई से मां सीता 5 श्रृषियों समेत भगवान राम , लक्ष्मण और स्वयं के लिए भोजन पकाया करती थी। और रोज़ाना कम से कम 5 श्रृषियों को भोजन करवाया करती थी, इसलिए माता सीता को अन्नपूर्णा के रुप में भी पूजा जाता है।

इसी स्थान पर जानकी कुंड भी मौजूद है। मान्यता है कि इसी कुंड पर माता सीता स्नान किया करती थी। आयोध्या नगरी में चित्रकूट एक बहुत ही शांत और हरियाली भरा मनमोहक स्थान है।

 

 

 

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