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मोदी सरकार क्यों करना चाहती है IPC और CRPC में बदलाव|

मोदी सरकार क्यों करना चाहती है IPC और CRPC में बदलाव|

मोदी सरकार केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा है की नरेंद्र मोदी सरकार क्रिमिनल प्रोसीजर कोड,इंडियन पैनल कोड, और इंडियन एविडेंस यानी की IPC,CRPC और EA एक्ट में फेरबदल करना चाहती है| यह बात उन्होंने सोमवार को गुजरात के गांधीनगर में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च एंड एनालिसिस ऑफ़ नारोकोटिक्स ड्रग्स एंड सायकोट्रोपिक substances के उद्घाटन पर कही|

वह बोले कि थर्ड डिग्री टॉर्चर के दिन अब आ चुके है और अब पुलिस की जाँच पड़ताल में वेज्ञानिक सबूत आधार होना चाहिए| उनके मुताबिक, केंद्र सरकार crpc,ipc और EA को आधुनिक बनाने और आज के समय की जरुरत के हिसाब से करने के लिए उनमे बदलाव लाने पर योजना बना रही है| अमित शाह ने कहा भारत सरकार एक बहुत बड़ा संवाद कर रही है कि हम crpc.ipc और एविडेंस एक्ट तीनों में आमूल चुल परिवर्तन करना चाहते है और कालबाहियाँ हो गयी है,

उन चीजों को निकालकर आज की चुनौतियां का सामना करने के लिए हम नई धारणाएं जोड़ना चाहते है | मेरा बहुत पुराना सुझाव है की छह साल के उपर सजा वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक साइंस का विजिट अनिवार्य करना है|

मोदी सरकार क्यों करना चाहती है IPC और CRPC में बदलाव|

दिखने में तो यह सपना बहुत सुनहरा है लेकिन मेंनपॉवर कहाँ है| गृह मंत्री के अनुसार मैं कई बार कह चूका हूँ की थर्ड डिग्री के दिन जा चुके है पूछताछ वैज्ञानिक प्रमाण के जरिए एक कड़े इरादे वाले व्यक्ति को तोडा जा सकता है और दोषी ठहराया जा सकता है पर इसके लिए फोरेंसिक से जुडा काम सही से होना चाहिए |

उन्होंने बताया की देश के हर जिले या फिर प्रत्येक पुलिस रेंज में कम से कम एक एफएसएल मोबाइल वैन होनी चाहिए पर इसके लिए हमे योग्य छात्रों की जरूरत होगी, और यह तभी संभव हो सकेगा जब एनएफएसयू हर सूबे में अपना कॉलेज खोलेगा| हम इसके लिए और इतंजार नहीं कर सकते| आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक आधार पर जांच पड़ताल की जरुरत पर शाह ने कहा “ मैं हाल ही में आईपीएस ट्रेनी को संबोधित कर रहा था, तो मैंने उन सबको बताया की हमारी पुलिस को दो किस्म के आरोपों का सामना करना पड़ता है,

पहला की उसने कोई कारवाई नहीं की जबकि दूसरा की पुलिस विभाग की ओर से ज्यादा ही एक्शन ले लिए गया हम सामान्य कारवाई चाहते है और वह तभी सम्भव हो सकेगा, जब हम वैज्ञानिक प्रमाण को अपनी जांच में अहम आधार बनाएगें| third डिग्री के दिन गए अब हमे वैज्ञानिक शोध और तकनिकी के आधार पर दोषारोपण और जांच को सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए |

थर्ड डिग्री को अमित शाह ने पुराना तरीका कह दिया है। होना भी चाहिए। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पुलिस टॉर्चर का इस्तेमाल नहीं करती। कई खबरें अभी भी ऐसी आती हैं जहां अभियुक्त पुलिस द्वारा ज्यादती की शिकायत करते हैं। इसको लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कई कैम्पेन चलाए हैं जिसमे टॉर्चर को ख़त्म करने की बात कही गई।

सरकार अब पहले से देश के कानून में बदलाव चाहती है। जैसे कि गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी बातों से साफ किया, उन्होंने कहा हमारी पुलिस व्यवस्था पर आमतौर पर दो तरह के आरोप लगते है पहला कि कोई कार्रवाई नहीं की और दूसरा पुलिस ने कुछ ज्यादा ही एक्शन ले लिया, अब इससे बचने के लिए हम सामान्ये कार्रवाई चाहते हैं। तभी न्याय व्यव्स्था सदृढ़ हो सकेगी।

 

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रिपोर्ट :- नेहा परिहार

मीडिया दरबार

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