धार्मिक

यदि आप भी कोरोना टाइम में छत्तरपुर मंदिर घूमने का प्लान बना रहें हैं तो इस खबर को पूरा जरूर पढ़े

प्रसिद्ध छत्तरपुर मंदिर जिसे श्री आद्या कात्‍यायनी शक्तिपीठ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। छत्तरपुर मंदिर दक्षिण दिल्‍ली के छत्तरपुर  इलाके में स्थित है। यह दिल्ली के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और लगभग 70 एकड़ में फैला हुआ है। इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष नवरात्रो के समय भक्तो की भारी भीड़ उमड़ती है और पूजा अर्चना को देखने के लिए  लोगो का यहां ताँता लगा रहता है। इस मंदिर में कई विशेष आयोजन भी किये जाते है जिसमे बड़े -बड़े गायक कलाकार शामिल होते है। इस मंदिर की एक और विशेषता ये है की यहां माता के श्रृंगार के लिए दक्षिण भारत से फूल मंगाए जाते है।

मंदिर के संस्थापक संत नागपाल बाबा

माता कत्यानी का सफेद मार्बल से बना हुआ यह मंदिर खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ बहुत ही अद्भुत लगता है। मंदिर की नक्काशी में  दक्षिण भारतीय वास्‍तुकला के बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलते है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। देवी दुर्गा के छठे स्‍वरूप को समर्पित यह मंदिर बेहद खूबसूरत है। इस मंदिर की स्थापना कर्नाटक के संत बाबा नागपाल जी ने की थी। पहले मंदिर स्थल पर सिर्फ एक कुटिया हुआ करती थी और अब यहां एक भव्य मंदिर है। छतरपुर मंदिर माता के छठे स्वरूप माता कात्यायनी को समर्पित है, जिसके कारण इसका नाम कात्यायनी शक्तिपीठ रखा गया है।

मंदिर जाने से पहले गौर करे सरकार की इन गाइडलाइंस पर

सबसे पहले अनलॉक यानि 8 जून से देश के सभी मंदिरो को खोल दिया गया था। कोविद 19 के कारण  सरकार ने भक्तो के लिए मंदिर में प्रवेश के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी की थी जिसके अनुसार भक्तो को इन सभी सावधानियों का ध्यान रखते हुए ही मंदिर में प्रवेश मिल सकता है।कोरोना को फैलने से रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि धार्मिक स्थलों में सोशल डिस्टेंसिंग समेत दूसरे जरूरी नियमों का पालन किया जाये। नियम निम्नलिखित है ……….

1-मंदिर में पुजारियों को भक्तों के ऊपर पवित्र जल का छिड़काव वर्जित किया गया है.

2- मंदिर के रसोईघरों, लंगरों और अन्न-दान आदि के दौरान सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन जरूरी है. भक्तों के बीच खाने-पीने की चीजें बांटते समय या खाना खिलाते समय सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन जरूरी है.

3- 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर पर रहें और धार्मिक स्थलों पर जाने से बचें.

4-सभी धार्मिक स्थानों के गेट पर हैंड सैनिटाइजर रखना जरूरी है. इसके अलावा गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य की गई है.

5- मंदिर में खांसी, बुखार, जुकाम जैसे लक्षणों वाले लोगों को मंदिर परिसर में जाने की अनुमति नहीं होगी

6-फेस सील्ड या मास्क पहनकर ही भक्त मंदिर में जा पाएंगे

7- कोरोना महामारी के बारे में जागरूक करने के लिए मंदिर परिसर में ऑडियो और वीडियो क्लिप नियमित रूप से बजाना जरूरी है

8-रिकॉर्ड किए गए भजन या भक्ति संगीत बजाये जा सकते हैं. गायकों या गायकों के समूह को अनुमति नहीं होगी

9- पूजा के दौरान बिछाई जाने वाली चटाई या दरी आदि से बचना चाहिए और भक्तों को अपनी दरी खुद लानी चाहिए.

10-लोग एक दूसरे को छू न सकें इसके लिए मंदिरों में किसी भी तरह के प्रसाद वितरण पर रोक होगी.

रूचि पाण्डे

मीडिया दरबार

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