राजनीति

यूपी में ब्राहम्ण वोट बैंक को रिझाने के लिए भाजपा ने खेला दांव !!

यूपी में ब्राहम्ण वोट बैंक को रिझाने के लिए भाजपा ने खेला दांव !!

यूपी

यूपी में विधानसभा चुनाव को नजदीक देखते हुए सभी पार्टियों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। लेकिन इस बार चुनाव पूर्व ही सिय़ासी दलों ने 16 फीसदी ब्राहम्णों को साधने को कोशिश तेज कर दी है। एक तरफ जहां BSP ने BJP पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाकर जगह-जगह प्रबुद्ध सम्मेलन (ब्राह्मण सम्मेलन) आयोजित किए हैं। यूपी

योगी आदित्यनाथ ने BSP की इस मुहिम की ढूँढी काट

अब योगी आदित्यनाथ ने BSP की इस मुहिम की काट ढूँढ ली है। अब BJP ने अपनी पार्टी में कुछ अहम पद सौंपने का कदम उठाया है। BJP ने वेस्ट यूपी के 19 जिलों में अब ब्राहम्ण महिलाओं को जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। यूपी

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो BJP के इस कदम से bJP अपना ब्राहम्ण प्रेम व्यक्त करने की कोशिश कर रही है। इसलिए इसे बीजेपी की इस रणनीति माना जा रहा है। चलिए आपको बताते है कि BJP ने महिला मोर्चा की वेस्ट यूपी

1) यूपी की अध्यक्ष की जिम्मेदारी मेरठ की वर्षा कौशिक को दी है।

2) गाजियाबाद से आरती मिश्रा

3) जिलाध्यक्षों की सूची में मेरठ महानगर से गीता शर्मा

4) नोएडा महानगर से शारदा चतुर्वेदी

5) गाजियाबाद महानगर से पूनम कौशिक

6) मुरादाबाद महानगर से विजय लक्ष्मी पंडित,

7) बुलंदशहर से शशि शर्मा,

8) अमरोहा से उषा शर्मा,

 9) बिजनौर से मोनिका शर्मा यादव और

10) सहारनपुर महानगर से आरती शर्मा के नाम शामिल हैं। ये सभी ब्राह्मण हैं।

उन महिलाओं के नाम जिन्हें बनाया गया जिलाध्यक्ष यूपी 

इनके अलावा बाकी जिलों में सहारनपुर जिले में रक्षा नामदेव, मुजफ्फरनगर में कविता सैनी, शामली में कुसुमलता पाल, मेरठ जिले में मंजू सेठी, हापुड़ में पालय गुप्ता, बागपत में लता सिसोदिया, गौतमबुद्ध नगर में रजनी सिंह, रामपुर में पारुल अग्रवाल, मुरादाबाद जिले में आदेश चौधरी, संभल में राखी सिरोही को महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया है।

BSP ने 2007 में अपने ब्राहम्ण एकता वाले दांव से सत्ता हासिल की थी , और उस समय मायावती की जीत के पीछे ब्राहम्णों वोट का सबसे बड़ा हाथ माना गया था। इसलिए एक बार फिर से बहुजन समाज पार्टी ने ब्राहम्णों को साथ लाने के लिए अपनी कवायद शुरु कर दी है।  इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा जगह- जगह सम्मेलन कर रहे हैं। यूपी

समाजवादी पार्टी ने भी ब्राहम्णों को लुभाने के लिए खेला दांव

अगर बहुजन समाज पार्टी और भाजपा इस बार ब्राहम्णों को लुभाने के लिए अभी से ही कवायद कर रहें है तो यहां समाजवादी पार्टी भी पीछे नही है। समाजवादी पार्टी ने भी जनेश्वर मिश्र को याद करने के साथ ही साइकल यात्रा निकाली। कांग्रेस और RLD भी ब्राह्मणों को साधने की तैयारी में जुटे हैं।

अगर देखा जाए तो 1990 के आंदोलन से पहले ब्राह्मण कांग्रेस का वोट बैंक होता था। 1990 के आंदोलन के दौरान ब्राह्मणों ने बीजेपी का दामन थामा, जिससे पार्टी सीधे 221 सीट जीतकर सूबे की सत्ता पर काबिज हो गई थी। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान हम सभी ने साफ देखा कि किस प्रकार मोदी फैक्टर और ब्राहम्णों के साथ होने से बीजेपी को भारी जीत मिली थी।

कुल मिलाकर ब्राह्मण वोटर उत्तर प्रदेश में वोट के हिसाब से एक खास हैसियत रखते हैं और ये जिस तरफ भी मुड़ जाते हैं उस पार्टी की जीत पक्की हो जाती है। यही कारण है जो 2022 के सियासी रण में कोई भी दल इनकी नाराजगी का जोखिम नहीं उठाना चाहता।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

 

शेयर करें
COVID-19 CASES