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‘योवेरी मुसेवेनी’ जिसने 1986 सशस्त्र विद्रोह के बल पर युगांडा की सत्ता की हासिल

योवेरी मुसेवेनी  1986 में सशस्त्र विद्रोह के बल पर सत्ता में काबिज हुए

योवेरी मुसेवेनी से जिन्होंने 1986 में सशस्त्र विद्रोह के बल पर सत्ता में राजनीतिक कानूनों की अवहेलना कर इस क्षेत्र में लंबे समय से सेवा कर रहे नेताओं को धूल चटा दी।

1986 से जब सशस्त्र विद्रोह के बल पर सत्ता में आए योवेरी मुसेवेनी ने राजनीतिक कानूनों तवज्जो ना देकर सभी बाकी नेताओं को परास्त कर एक लम्बें अरसे से युगांडा पर राज किया।

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करीब 76 साल के मुसेवेनी ने शांति और बड़े विकास परिवर्तनों के ज़रिए एक लम्बें समय से यहां पर राज किया है। यह एक ऐसे शासक हैं जिन्होंने व्यक्तित्व पंथ को प्रोत्साहित करने, संरक्षण देने और स्वतंत्र संस्थानों से समझौता करने के साथ ही विरोधियों को दरकिनार करने के मिश्रण के माध्यम से सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाबी हासिल की है। अब मुसेवेनी अपनी उम्र के आखरी पड़ाव पर है।

बढ़ती उम्र के साथ भी योवेरी मुसेवेनी कि कर्म निष्ठा में नहीं आई कमी 

लेकिन अभी भी अगर मुसेवेनी से पद त्यागने पर प्रश्न किया जाता है तो जवाब में यहीं कहा जाता हैं कि खुद के द्वारा खड़े साम्राज्य को कैसे छोड़ दू। मुसेवेनी जो एक मुक्तिदाता के रुप में देश में शांति लाने वाले आदमी की छवि रखते हैं|

जिन्होंने 26 जनवरी 1986 को राष्ट्रीय प्रतिरोध सेना द्वारा देश को आजाद कराने, युद्धों और जानलेवा हत्याओं को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देश में वह एक पिता और दादा के रुप में भी हैं,और युगांडा की जनता को वे अपने बच्चों की तरह ही रखते हैं।

उनके प्रशंसक बताते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ वह अपने काम के प्रति उतने ही लगन के साथ काम करता है।   कार्यालय में अपने छठे निर्वाचित कार्यकाल के लिए अपने अभियान में भी खुद की जीत की इच्छा रखता है।

वह देश की यात्रा कर रहे है। कारखानों का शुभारंभ कर रहे है, सड़कें और नए बाजार खोल रहे है। मुसेवेनी अपने किसी भी चैलेंजर से हारने की इच्छा नहीं रखते वे सभी से मुकाबला लेने के लिए तैयार रहते हैं।

मुसेवेनी हमेशा अपनी शक्ति दिखाने के लिए उत्सुक रहते हैं। पिछले अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान व्यायाम को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पुश अप करते हुए फिल्माया गया था।

इतना ही नहीं मुसेवेनी कई बार छात्रों के खुश करने के लिए ऐसे कृतों का सहारा लेते रहते हैं। राष्ट्रपति मुसेवेनी के करीबी मानते है कि उनकी निष्ठा और निस्वार्थतता के कारण ही वे 35 साल बाद भी सत्ता में यूं ही बने हैं औऱ कर्म निष्ठा ऐसी की देश के लिए वह जान तक देने को तैयार रहते है।

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2005 के बाद योवेरी मुसेवेनी का पद संभालना क्यों नहीं रहा सही 

लेकिन कई लोगों का मानना हैं कि फिर भी 1995 के संविधान के मूल खंड के तहत राष्ट्रपति को 2005 के बाद फिर से यह पद नहीं संभालना चाहिए था।

2004 में जब उनके सांसदों ने राष्ट्रपति पद की सीमा को हटाने के लिए संविधान में संशोधन करना चाहिए तब उन्होंने अपने अधिकार की चुनौतियों को कम सुनिश्चित करने के लिए देश के कुछ प्रमुख संस्थानों की स्वतंत्रता को कमजोर कर दिया है।

उन्होंने न्यायपालिका तक को नहीं बख्शा गया, इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल के वर्षों में “कैडर जजों” की भर्ती को लेकर देखा जा सकता है, राष्ट्रपति मुसेवेनी पर आरोप लगाया गया कि वे सभी जज सरकार के प्रति वफादार हैं। मंदिरों को रंगमंच में बदल दिया गया।

यह राष्ट्रपति इस कदर क्रूर हैं कि यह अपने विरोध में खड़े होने वालों का खात्मा तक करवा देता हैं जैसा उसने एक गायक बॉबी वाइन के साथ किया , 35 वर्षों से युगांडा में शासन कर रहें मुसेवेनी को अब अपने खिलाफ किसी का भी खड़ा होना पसंद नही आता। अब यहां यह देखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि युगांडा में फैली इस तानाशाही का अंत आखिर कब होता हैं।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

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