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लेपाक्षी मंदिर – वो रहस्मयी मंदिर जहाँ हवा में झूलते है खंभे

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

लेपाक्षी मंदिर – वो रहस्मयी मंदिर जहाँ हवा में झूलते है खंभे

 

 

 

भारत को अगर मंदिरो का देश कहाँ जाए तो इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है। यहां आपको हर गली, हर नुक्कड़, हर शहर में मंदिर देखने को आसानी से मिल ही जाऐंगे। इन्ही में से कुछ मंदिर से जुड़े है रहस्यमयी और चमत्कारी तथ्य जिन्हे आज भी देखा जा सकता है। कुछ मंदिरो से तो ऐसी पहेलियाँ जुड़ी है जिनको सुलझाना आसान नही है। ऐसा ही रहस्या से भरपूर भारत में एक मंदिर है जिसका नाम है लेपाक्षी मंदिर इस मंदिर के साथ कुछ ऐसे तथ्य जुड़े है जिनकी जानकारी आज भी बड़े से बड़े वैज्ञानिकों के पास भी नही है।

भारत के रहस्यमयी मंदिर लेपाक्षी मंदिर से जुड़ी उन जानकारियों को बताऐंगे जिनसे शायद आप अब तक अनजान है। तो देर किस बात की आइये जानते हैं लेपाक्षी मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को।

दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में मौजूद लेपाक्षी मंदिर को रहस्यमयी इसलिए भी माना जाता है। क्योंकि, इस मंदिर में लगा एक खंभा हवा में लटका हुआ है। इसलिए इस मंदिर को हैंगिंग पिलर टेम्पल के नाम से जाना जाता है।इस मंदिर में कुल 70 खंभे मौजूद है, लेकिन इन खंभो मे उस एक खंभे से जुड़ा रहस्य आज तक सामने नहीं आ पाया है। हवा में लटकते खंभे के पीछे के रहस्य को जानने के लिए बहुत से आर्किटेक्ट ,इंजीनियर बहुत से वैज्ञानिकों ने कोशिश की पर सभी के हाथ इस कोशिश में खाली ही रहें। कोई भी आज तक इस हवा में लटकते खंभे के पीछे का रहस्य नही बता पाया है।

बता दें कि, हज़ारों वर्ष पुराने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अंग्रेज़ी शासन के समय एक इंजीनियर ने इस पिलर को ज़मीन से ही काट दिया था और तभी से ये खंभा हवा में ही लटक रहा है। इस रहस्य से लोगों की आस्था भी जुड़ गई। यहाँ के निवासियों का मानना है कि लेपाक्षी मंदिर के हवा में झूलते हुए खंभे के नीचे अगर किसी को इस पिलर के कपड़ा मिले तो उसे काफी भाग्यशाली माना जाता है।

लेपाक्षी मंदिर में मुख्य रुप से भगवान वीरभद्र की पूजा की जाती है। भगवान वीरभद्र जिन्हें भगवान शिव का एक क्रूर रुप माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण करीब 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस मंदिर में भगवान शिव के अन्य रूपों जैसे त्रिपुरातकेश्वर, दक्षिणमूर्ती,  कंकालमूर्ती और अर्धनारीश्वर रूप की भी पूजा अर्चना की जाती है।  इसके साथ ही साथ इस मंदिर में खासतौर से माँ काली के स्वरुप भद्रकाली की पूजा अर्चना भी की जाती है। हालाँकि की मंदिर के प्रमुख इष्टदेव भगवान वीरभद्र ही कहलाते हैं।

लेपाक्षी मंदिर अपनी अद्भुत और भव्य बनावट और रहस्यमयी होने के कारण लोगों में बुहत चर्चित है। यहीं कारण है जो यहां हर साल हज़ारों की संख्या में लोग यहां दर्शन करने आते है। मंदिर परिसर में विशाल पैरों के निशान भी हैं, इन पदचिन्हों की पूजा के लिए श्रध्दालु यहां विशेष रुप से आते है। ऐसी मान्यता है कि, ये पैर के निशान रामायण काल से संबंधित हैं। कुछ लोग इसे राम का मानते हैं तो कुछ लोग इसे सीता का मानते हैं। मान्यता के अनुसार इस स्थान को रामायण काल से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर जटायु ने भगवान राम को रावण का पता बताया था।

 

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