विचार

लोकसभा और राज्यसभा टीवी का क्यों किया गया विलय?

लोकसभा और राज्यसभा टीवी की जगह आएगा संसद टीवी

आपने भी बचपन में एक कहावत जरूर सुनी होगी एक से भले दो लेकिन लगता हैं हमारी सरकार में बैठे लोगों ने ये कहावत या तो पढ़ी नहीं या फिर वो इसे कुछ खास तवाजो नहीं देते तभी तो वो हर 2 को मिलकर एक करने में लगे हुए हैं|

अब यहाँ आप खुद ही देख लीजिये केंद्र सरकार ने अपने 2 चैनलों लोकसभा और राज्यसभा टीवी का मर्जर करने का ऐलान कर दिया हैं| बीते दिन सोमवार को राज्यसभा सचिवालय के कार्यालय द्वारा आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की गई| इन दोनों चैनल्स लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी को मिलाकर अब एक चैनल कर दिया गया हैं और इनका संयुक्त नाम होगा संसद टीवी|

बढ़ते आर्थिक भार के कारण सरकार ने लिया फैसला

लोकसभा
Image Source-Social Media

यहाँ आपके लिए ये भी जानना जरुरी हैं की सरकार की ओर से ये फैसला बेशक अब आया हो लेकिन इस विषय पर चर्चा एक लम्बे समय से चल रही थी|

इसे भी पढ़े :-कांग्रेस में आई दरार अब दिल्ली में भी दिखे बागी तेवर!

यहाँ आपकों बता दे की नवम्बर 2019 में ही सरकार ने इन दोनों चैनलों के विलय करने के अपने फैसले पर काम करना शुरू कर दिया था| सरकार का मानना था की इन दोनों चैनलों के सञ्चालन में उन्हें काफी भारी रकम चुकानी पड रही थी|

और सरकार का मनना था की क्युकी इन दोनों ही चैनलों का फोर्मेट लगभग एक सा ही हैं इसलिए इन दो चैनलों की जगह एक ही पर्याप्त हैं ऐसे में सरकार ने अपने कोस्ट कटिंग को देख्रते हुए ये फैसला लिया था|

लोकसभा और राज्यसभा टीवी के विलय के लिए सरकार ने बनाई थी कमिटी

लोकसभा
Image Source-Social Media

इसके लिए राज्यसभा अध्यक्ष और देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बाकायदा इस काम के लिए एक कमेटी का भी गठन किया था। इस कमिटी में 6 सदस्य थे जिनमे प्रसार भारती के चेयरमैंन ए.सूर्य प्रकास, राज्यसभा  सचिवालय के ए.ए.राव, लोकसभा सचिवालय के गणपति भट, संयुक्त सचिव शिखा दरबारी जो राज्यसभा टीवी की वित्तीय सलाहकार भी हैं, राज्यसभा टीवी के सीईओ मनोज पाण्डेय और लोकसभा टीवी के सीईओ आशीष जोशी भी शामिल थे| इस कमेटी को इन दोनों चैनलों के लागत और संसदीय कार्यवाहियों पर अतिरिक्त खर्च की कटौती के बारे में राय देनी थी|

सो कमिटी ने दी जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला ले लिया लेकिन अब सरकार ने तो अपनी कोस्ट कटिग के हिसाब से अपना फैसला सुना दिया पर अब जो सवाल उठता हैं की सरकार के इस फैसले की मार कितने लोगों के रोजगार पर पड़ती हैं|

तो सबसे पहले बात करते हैं सबसे बड़े पदों की तो अब इस मर्जर के बाद लोकसभा और राज्यसभा टीवी के अलग अलग सीइओज की जगह संसद टीवी के लिए सीइओ होंगे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रवि कपूर इन्हें एक साल के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया हैं|

इस एक फैसले से जाएगी कितनो की नौकरियाँ

लोकसभा
Image Source-Source Social

यानि यहाँ तो सरकार ने अपनी कोस्ट कटिंग का इंतजाम कर लिया हैं अब बात करते हैं इन चैनलों के दुसरे कर्मचारियों की तो अभी राज्यसभा टीवी में फ्रीलांसर, एडहॉक और पे रोल पर करीब 300 एम्पलॉइज हैं, वहीं लोकसभा टीवी की बात करे तो लोकसभा टीवी में  करीब 100 एम्प्लोइज़ काम करते हैं।

अब आप खुद अनुमान लगाइए की जब चैनलों के सीइओज 2 से एक हो गए तो ऐसे में एन्प्लोइज़ का क्या ही होगा ऐसे में पूरी पूरी संभावना हैं की करीब 200 एम्पलॉइज को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

बहरहाल ये मामला फिलाहल तो काफी छोटा हैं क्युकी यहाँ कर्मचारियों की संख्या कम हैं लेकिन जरा सोचिये सरकार जिस तेजी से अपनी कोस्ट कटिंग में लगी हुई हैं आने वाले समय में ऐसे कितने नए बेरोजगार देश को मिल सकते हैं|

सरकार ने बजट में दिए थे कॉस्ट कटिंग के सन्देश

देश में लगातार सरकार घाटे में जा रही कंपनियों को निजी हांथो में सौपन का काम कर रही हैं इस बार के बजट में भी सरकार ने ये साफ कर दिया की वो अब किसी भी सरकारी कंपनी के घाटे का अतिरिक्त भार खुद पर नहीं लेने वाली लेकिन सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा मुसीबत उन लोगों के लिए बढ़ जाती हैं जो इन कम्पनियो में कार्यरत हैंऑ

यानि आज के समय मे पहले तो सरकारी नौकरी हैं नहीं और अगर आपके किन्ही पुन्य कर्मों के प्रताप से आपकों सरकारी नौकरी मिल भी जाती हैं तो उसकी अब पहले की तरह गारंटी नहीं हैं ऐसे में हो सकता हैं की जिस ऑफिस से आपका ज्वोइंग लेटर आया हो कल को वही से आपकी नौकरी से निकाले जाने का सरकारी नोटिस आ जाये|

इस फैसले का क्या होगा लोकसभा और राज्यसभा टीवी के कर्मचारियों पर असर

लेकिन इतने पर भी कहने वाले कहते हैं की अब भईया सरकार इसमें क्या ही कर सकती हैं अगर कंपनिया घाटे में जाएगी तो सरकार भी आखिर कब तक उसका पैसा भरती रहे|

इसे भी पढ़े :-जी 23 नेताओं ने जम्मू कश्मीर से कांग्रेस को दिया ये सन्देश

अब ये बात भी सही हैं आखिर हम सरकार को चुनते किस लिए हैं बिजनेस चलाने के लिए ही न, तो सरकार तो बिजनेस चलाने और उसके प्रॉफिट पर ही ध्यान देगी न आम लोगों की नौकरी का क्या है, जैसे सरकारी नौकरी के लिए दिन रात पढाई कर के ली थी वैसे ही अब प्राइवेट कंपनियों के दफ्तरों के चक्कर काटके कही न कही मिल ही जाएगी माना पोस्ट ऊपर निचे हो सकता हैं|

लेकिन आप कंपनी का प्रॉफिट देखिये ना और उस कंपनी के प्रॉफिट से फिर देश की तरक्की आखिर इससे बड़ा हमारे लिए और क्या हो सकता हैं|

अब आप ही इसपर विचार कीजिये और मुझे फिलहाल के लिए दीजिये इज़ाज़त कल फिर मिलूगी आपसे अगली स्पेशल रिपोर्ट के साथ तब तक चैनल को सब्स्क्रिब्ब कर लीजिये और विडियो पसंद आई हो तो लाइक का बटन जरूर दबा दीजियेगा हमसे जुड़ने के लिए धन्यवाद

 

रिपोर्ट -पूजा पाण्डेय

मीडिया दरबार

 

 

शेयर करें
COVID-19 CASES