राष्ट्रीय

विपक्ष की वोट बैंक की राजनीती का जरिया बना किसान आन्दोलन

विपक्ष के नेता पहुँचे गाजीपुर बॉर्डर

तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानो का आन्दोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है| गाजीपुर बॉर्डर पर अब विपक्ष ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है|गुरूवारको 8 विपक्षी दलोंके नेता किसानों से मिलने गाजीपुर बॉर्डर पहुचे थे|यहाँ प्रदशर्न कर रहे किसानों से मिलने पहुचे विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रोका पुलिस ने विपक्षी नेताओ को किसानो से मिलने नहीं दिया|

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इसके बाद विपक्षी दल के नेताओं को वापिस लौटना पड़ा| पुलिस विपक्षी दल के नेताओं को वहां से दूसरी जगह लेकर गयी| उनविपक्षी दल के नेताओं में टीएमसी नेता सौगात रॉय, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल,एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले,डीएमके के एम कनिमोई भी शामिल थी|

पुलिस ने विपक्ष के नेताओं को रोका

इन विपक्षी दल नेताओं में से अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल का कहना है की हम यहाँ इसलिए आये थे ताकि हम इस मुद्दे पर संसद मेंचर्चा कर सके| अकाली दल की सांसद ने कहा कि स्पीकर हमे इस मुद्दे को उठाने नहीं दे रहे है| अब सभी पक्ष इस बात का विवरण देंगे की यहाँ क्या हो रहा है|

अब सवाल यहाँ यह उठता है कि जो विपक्षी दलों के नेता गाजीपुर बॉर्डर पहुचे थे वो लोग वहां पर क्या सिर्फ राजनितिक स्टंट बाजी के लिए गए थे या उनका सही में किसानो से सरोकार है?

क्या सच में शिरोमणि अकाली दल और हरसिमरत कौर बादल किसानो की मदद करना चाहती है?

यहाँ आपको बता दे की शिरोमणि अकाली दल लम्बे समय से बीजेपी की सहयोगी पार्टी रही थी और केंद्र में सरकार का हिस्सा भी थी औरखुद हर्सिमारत कौर मंत्री भी,जब यह तीनो कृषि विधेयक बीलordinance के द्वारा देश में लागु किया गया था तब शिरोमणि अकाली दल केंद्र की सरकार का हिस्सा थी, लेकिन एका-एक ऐसा क्या राजनितिक समीकरण बदला की शिरोमणि अकाली दल ने अपने 27 साल पुराने राजनितिक साथी का साथ छोड़ अपना एक नया राजनितिक रास्ता बना लिया?

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लेकिन केंद्र सरकार की कृषि संशोधन विधयकों के विरोध जिसके के खिलाफ सबसे पहले आवाज़ किसान नेताओ के अलावा कांग्रेस ने उठायी थी, जिससे खबरा कर या हो सकता हैं की शिरोमणि अकाली दल को पंजाब राज्य में राजनितिक नुकसान होने का अंदेशा हो गया हो?

जब अकाली दल ने छोड़ा बीजेपी का साथ

इस राजनितिक दबाव के कारण शिरोमणि ने इन तीनो विधेयक का विरोध किया और परिणाम स्वरूप केंद्र सरकार में शिरोमणि अकाली दल कोटे से मंत्री ओर बादल परिवार की बहु हरसिमरत कौर ने केंद्र सरकार में अपने फ़ूड प्रोसेसिंग मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था उनके इस कदम के बाद भी कई सवाल उठे थे क्योंकि सरकार में रहते हुए इन्होने या इनकी पार्टी ने कभी भी इन कानूनों का विरोध नहीं जताया लेकिन पंजाब के किसानो के आन्दोलन के बाद अपनी वोट बैंक को बचाने के लिए हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया|

अब एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल सवालों के घेरे में है| केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद हरसिमरत कौर ने ट्वीट किया था की “मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेशों ओर बिल के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है| किसान की बेटी ओर बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है”|

अकाली दल, TMC, NCP, DMK समेत कई विपक्षी दल पहुँचे गाजीपुर बॉर्डर

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आज तडके शिरोमणि अकाली दल अपने साथी विपक्षी नेताओ टीएमसी नेता सौगात रॉय, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले, डीएमके के एम कनिमोई क्योंगाजीपुर बॉर्डर पहुचे| ऐसे में कई सवाल जो सामने आते है वो है की अकाली दल का वोट बैंक किसानो से ही है, ऐसे में किसानो को समर्थन देना क्या अकाली दल की एक चाल है? आज समझने की जरूरत हैं की अकाली दल और अन्य राजनितिक पार्टिया क्यों इतना मुखर हो कर इन किसान बिल का विरोध कर रहे हैं|

एक जिम्मेवार विपक्ष होने के नाते से विपक्षी दलों को किसानो को यह समझाने की जरूरत हैं की देश को खाद्य निर्भर और किसानो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ओपन मार्किट और e-nam जैसी सुविधाओ को बढ़ाने की जरूरत हैं? आप सिर्फ रिफॉर्म्स का इसलिए विरोध नहीं कर सकते की इस रिफॉर्म्स से किसान अगर आत्मनिर्भर बनेगा तो विपक्षी नेताओ कोकिसानो के नाम पर राजनितिक लाभ कैसे होगा?

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हमें समझने की जरूरत यह भी है एक मजबूत लोकतंत्र के लिए एक जिम्मेवार,मजबूतऔर परिपक्व विपक्ष का होना बहुत जरूरी हैं क्यूंकि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष ओर विपक्ष राष्ट्र निर्माण में एक दुसरे के साथी ओर सहभागी होते हैं?

लेकिन यह भारत के लोकतंत्र के हाल के दिनों की विडंबना हैं की सिर्फ राजनितिक हित ओर अपनी खिसकती राजनितिक जमीन को बचाने के लिए विपक्ष शायद ठीक तरह से किसानो को इस बिल से अवगत नहीं करा रहा हैं? खैर यह बाते अब पीछे छुट चुकी हैं ओर इस किसान आन्दोलन को हर राजनितिक पार्टी अपने लिए एक संभावना के मंच के तौर पर देख रही हैं जिसके ऊपर सवार हो कर हर राजनितिक पार्टी अपनी राजनितिक नैया पार लगाना चाहती हैं !

रिपोर्ट – नेहा परिहार

मीडिया दरबार

 

         

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