अंतर्राष्ट्रीय

वो देश जहाँ 5 या 6 सालों में नहीं बल्कि हर 6 महिने में होता है राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का चुनाव !!

 

रिपोर्ट-रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

वो देश जहाँ 5 या 6 सालों में नहीं बल्कि हर 6 महिने में होता है राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का चुनाव !!

 

ना चार, ना पाँच,  हर 6 महिने में होता है इस देश में राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव

778 सालों से जुने जा रहें है शीर्ष नेता

इस देश में स्थापित है दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र

इस देश ने दी थी द्वितीय विश्व युध्द में लाखो लोगों को शरण

आमतौर पर देखा गया है कि दुनिया भर में जिन देशों में लोकतंत्र बहाल है, उन देशों में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लिए चुनाव 4 साल , 5 साल या 6 सालों में एक बार होता है। लेकिन एक देश ऐसा भी है जहाँ राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव हर 6 महीने में ही होता है।

आज हम आपको एक ऐसे देश के बारे में बताऐंगे जहां दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र स्थापित है और वहां हर 6 महीने के भीतर ही राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव होता है। ये देश है यूरोप का सैन मैरीनो जहाँ हर 6 महीने में ही चुनाव होता है। यहां दो राष्ट्रध्यक्ष चुने जाते है जिन्हे कैप्टन- रिजेंट कहा जाता है। बतां दे कि कैप्टन रिजेंट के चुनाव में जनरल काउंसिल के सदस्य ही वोट डालते है, जिनकी संख्या कुल 60 होती है।

 

दुनिया के सबसे छोटे देशों में शामिल

सैन मैरीनो जो दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश माना जाता है। इस देश की आबादी करीब 34,000 है। पहली बार यहां कैप्टन रिजेंट का चुनाव सन् 1243 में हुआ था, जिसके बाद से 778 सालों से देश में राष्ट्राध्यक्ष के चुनाव हर 6 महीने में हो रहे हैं। यहां की संसद को अरेंगो कहा जाता है। इस देश में संविधान सन् 1600 में लागू हुआ था। तब से इस देश में यही चुनावी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, इसमें हर 6 महीने में राष्ट्रध्यक्ष का चुनाव होता है और विपक्षी नेता को देश के शीर्ष नेता के रुप में चुना जाता है।

 

इस देश की संसद को अरेंगो कहा जाता है।

इस देश की संसद अरेंगो के सदस्यो का चुनाव प्रत्यक्ष रुप से होता है। जहां हर 5 सालो में इन सदस्यो का चुनाव किया जाता है। पहले इस देश में राष्ट्रध्यक्ष की चुनावी प्रक्रिया बहुत अनोखी थी जिसमें कैप्टन रिजेंट के चुनाव के समय संसद सदस्यों का चुनाव देश के हर परिवार के मुखिया करते थे। सैन मैरीनों दुनिया के सबसे छोटे देशों में गिना जाता है। इस का क्षेत्रफल केवल 61 वर्ग कि.मी ही है। इस देश की सीमा इटली की सीमा के साथ लगती है, इस कारण पड़ोसी होने के चलते यहां इतावली ही बोली जाती है।

द्वितीय विश्व युद्ध में दी लाखों की शरण

द्वितीय विश्व युध्द के दौरान इस देश ने इटली की मदद करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी, इस देश ने लाखो लोगो के रहने के लिए शरण दी थी। इस देश में, मोंटेगार्डिनो और सेरावेल्ले जैसे शहर शामिल है। 2009 तक इस देश को टैक्स हेवेन कंट्री’ के नाम से भी जाना जाता था यानी जहां टैक्स दूसरे देशों की तुलना में बेहद कम लगता है या नहीं लगता है। लेकिन इसी साल सैन मैरीनो ने आर्थिक पारदर्शिता के नियम को अपनाया, जिसके बाद यह टैक्स हैवेन के ग्रे लिस्ट से बाहर हो गया।

 

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