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शिवरात्रि 2021: भगवान शिव के श्रृंगार के पीछे का रहस्य !!

शिवरात्रि 2021 से पहले जानिए भगवन शिव के श्रृंगार का अर्थ

भगवान शिव (शिवरात्रि 2021) ऐसे देव हैं जिनकी पूजा-आराधना से सभी प्रकार के कष्टों का नाश हो जाता है। महादेव थोड़ी सी श्रद्धा भक्ति के साथ की गई पूजा से तुरंत प्रसन्न हो जाते है एवं पूजा-आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

भगवान शिव का श्रृंगार अन्य देवताओं की तुलना में सबसे निराला है, जो अपनी अलग-अलग प्रकृति को दर्शाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिवजी के हर आभूषण का विशेष प्रभाव तथा महत्व बताया गया है। आइए जानते है क्या महत्व है शिव के श्रृंगार का-

सिर पर धारण करते हैं गंगा-

शिवरात्रि 2021
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गंगाजी को भोलेनाथ का प्रथम और मुख्य शृंगार माना गया है। शिवजी के गांगेय, गंगेश्वर, गंगाधिपति, गंगेश्वरनाथ आदि नाम पवित्र गंगा को धारण करने के कारण ही हैं।

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पृथ्वी की विकास यात्रा के लिए जब गंगा जी को स्वर्ग से धरती पर लाया गया, तो पृथ्वी की क्षमता गंगा के आवेग को सहने में असमर्थ थी। ऐसे में सदाशिव ने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान देकर यह सन्देश दिया कि आवेग की अवस्था को दृढ़ संकल्प के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है।

वहीं चन्द्रमा को शिवजी का मुकुट कहा गया है

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शास्त्रों के अनुसार शिवजी के त्रिनेत्रों में एक सूर्य, एक अग्नि और एक चंद्र तत्व से निर्मित है। चंद्र आभा, प्रज्जवल, धवल स्थितियों को प्रकाशित करता है, जो मन के शुभ विचारों के माध्यम से उत्पन्न होते हैं। चंद्रमा का एक नाम ‘सोम’ है, जो शांति का प्रतीक है। इसी लिए सोमवार शिवपूजन, दर्शन और उपासना का दिन माना गया है।

भगवान शिव द्वारा धारण किया गया तीन गुणों का प्रतीक हैं त्रिशूल-

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शिवजी के श्रृंगार में त्रिशूल का विशिष्ट स्थान है। (शिवरात्रि 2021)  त्रिशूल के तीन शूल सत, रज और तम गुण से प्रभावित भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतीक माने गए हैं। (शिवरात्रि 2021) त्रिशूल के माध्यम से युग-युगांतर में सृष्टि के विरुद्ध सोचने वाले राक्षसों का संहार किया है।

भस्म धारण करने के पीछे ये हैं कारण

भस्म से नश्वरता का स्मरण होता है। (शिवरात्रि 2021) मतलब प्रलयकाल में जब पूरी दुनिया का विनाश हो जाता है, केवल भस्म यानी (राख) ही शेष बचती है। यही दशा शरीर की भी होती है। वेद में रुद्र को अग्नि का प्रतीक माना गया है। अग्नि का कार्य भस्म करना है इसलिए भस्म को शिव का श्रृंगार माना गया है।

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महादेव के पैरों में कड़ा धारण करने के पीछे की हैं मान्यता 

यह अपने स्थिर तथा एकाग्रता सहित सुनियोजित चरणबद्ध स्थिति को दर्शाता है। योगीजन भी शिव के समान ही एक पैर में कड़ा धारण करते हैं, अघोरी स्वरुप में भी यह देखने को मिलता है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

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