धार्मिक

साईं बाबा कौन थे हिन्दू या मुसलमान……?

साईं बाबा कौन थे योगी,संत या फ़क़ीर 

हमारे देश में विभिन्नता में एकता है। देश में कई अलग अलग धर्म और अलग अलग धर्म को मानने वाले लोग भी रहते है। भारत देश में साई बाबा को मानने वालों की भी हमारे देश में बहुत संख्या है। साईं कहां से आए उन्होंने भक्तों के दिल में कैसे जगह बना ली। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि साईं केवल एक फकीर थे, वे माँसाहारी थे। कौन है ये साई?  इस सवाल का ज़वाब देंगे हम तो चलिए जानते है

साईं बाबा को लेकर बहुत भ्रम फैला है कुछ लोग इन्हें फकीर तो कुछ मुस्लमान कुछ नामदेव, पाण्डुरंग, का स्वरुप तो कुच साई को साक्षात शिव का स्वरुप बताते है। अगर हम आचार्य चतुरसेन का उपन्यास सोमनाथ पढ़े तो पता चलता है कि मुगल और अंग्रेज़ो के शासनकाल में ऐसा अक्सर होता था। की सूफी संतो के भेष में फकीरों को वहां को राजाओं की ताकत का अंदाजा लगाने के लिए भेजा जाता था। इनका काम सीमा क्षेत्र पर पहरेदारी करते हुए राजाओँ की निगरानी करना। अगर आप गौर करेंगे तो आपको सूफी संतो की मजार शहर या गांव में ही मिलेंगी, क्योंकि सीमा से उन्हें राजाओं की निगरानी करने में आसानी होती थी।

साईं को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि साईं केवल एख मुस्लिम फकीर थे , क्योंकि वह अधिकरत समय अपना मुस्लिम फकिर के साथ ही बिताते थे। वे कहते है कि साईं जिस प्रकार का पहनावा पहनते थे वह यकीनन किसी मुस्लिम समाज के फकीर ही पहना करते थे। साईं हमेशा सर पर एक कपड़ा और तन पर जामा पहने होते है जो आज भी केवल मुस्लिम सामाज के फकीर ही पहना करते है। कुछ लोगों के अनुसार साईं सच्चरित्र के अध्याय में कई जगह यह भी उल्लेख किया गया है कि साईं केवल अल्लाह मालिक है यहीं बोलते है लेकिन बाद में यह भी उल्लेख किया गया कि वे केवल सबका मालिक एक है ही बोला करते थे। अगर बात की जाए तो उनके सबसे बड़े आस्था स्थल में भी साईं के बारें में कुछ खास जानकारी सामने नहीं आती एक कथा के अनुसार साईं अपना जीवन यापन एक मस्जिद में रह कर करते थे। उनाका जन्म ब्राहम्ण परिवार में हुआ था, पर बाद में उन्हें फकिर को सौंप दिया गया था। उनके माता पिता के बारे में कुछ खास जानकारी तो नहीं मिलती पर शिरडी उनके चामात्कारिक स्थल के रुप में माना जाता है। शिरडी में वे अपनी सारी ज़िंदगी बिता दी थी, साईं ने कुछ फकिरों के साथ अपना जीवन यापन किया था इसके लिए उन्हें मुस्लिम फकिर माना जाता है। धार्मिक आस्था पर गौर किया जाए तो साईं को हमेशा सभी धर्मो को एक रखने वाले के तौर पर ही देखा गया है। साईं की भारत देश में बहुत मान्यता है। उनके धार्मिक स्थल में हिंदू मुस्लमान दोनो के पवित्र पर्व मनाए जाते है। खैर जो भी हो अगर को भी धर्मात्मा देश की एकता अखण्डता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है तो हमें भी उसका पूर्ण रुप से सम्मान करना चाहिए। साईं बाबा को मानने वाले देश में बहुत है और हमें भी किसी का धर्म का विशलेषण किए बगैर सबकी धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहिए।

रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES