पर्यटन

सफ़ेद रेगिस्तान है गुजरात का ‘रन ऑफ कच्छ’

भारत की कला संस्कृति, प्राचीन इतिहास को जानने और समझने का मौका देता है रन ऑफ कच्छ

भारत में ऐसे अनेक राज्य हैं जो अपने भीतर बेशुमार खूबसूरती तथा विविधता को समेटे हुए हैं| उन्हीं में से एक राज्य है, गुजरात| वैसे तो गुजरात में अनेक दर्शनीय स्थल हैं लेकिन गुजरात में एक ऐसा पर्यटन स्थल भी है जो पूरे विश्व में अपनी अनोखी सुन्दरता और विविधता के लिए जाना जाता है| वो जगह है ‘रन ऑफ कच्छ’| ‘रन ऑफ कच्छ’ गुजरात के कच्छ शहर में उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ दुनिया का सबसे बड़ा नमक से बना रेगिस्तान है| ऐसा कहा जाता है कि अगर गुजरात घुमने गए और ‘रन ऑफ कच्छ’  नहीं देखा तो फिर कुछ नहीं देखा| इसका कारण है सफ़ेद रेगिस्तान के रूप में प्रसिद्ध ‘रन ऑफ कच्छ’ की विविध संस्कृति| यहां हर साल आयोजित होने वाले रन उत्सव दुनियाभर में मशहूर है।

आइये जानते हैं रन ‘ऑफ़ कच्छ’ के बारे में

कच्छ का रण बहुत विशाल है, जो थार रेगिस्तान का ही एक हिस्सा है। रन ऑफ कच्छ का अधिकांश भाग गुजरात में है, जबकि कुछ भाग पाकिस्तान में है। वैसे तो ये समुद्र का ही एक हिस्सा है लेकिन 1819 में आए भूकंप के कारण यहां का भौगोलिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया और इसका कुछ भाग ऊपर उभर आया था। रन ऑफ कच्छ दो हिस्सों में बंटा हुआ है। उत्तरी रन यानि ग्रेट रन ऑफ कच्छ 257 किमी के क्षेत्र में फैला है और पूर्वी रन जिसे लिटिल रन ऑफ कच्छ कहते हैं ग्रेट रन ऑफ कच्छ से छोटा है। ये लगभग 5178 वर्ग किमी में फैला है। गर्मियों में यहां का तापमान 44-50 डिग्री तक बढ़ जाता है और सर्दियों में शून्य से नीचे तक चला जाता है।

दुनियाभर में प्रसिद्ध है रन ऑफ कच्छ उत्सव –

कच्छ में प्रतिवर्ष रण उत्सव मनाया जाता है| यह उत्सव 1 नवंबर से शुरू होकर 20 फरवरी तक चलता है। इस उत्सव को चांदनी रात में कच्छ के रेगिस्तान में आयोजित किया जाता है, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं। यहां आकर आप चांदनी रात और खुली हवा में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद ले सकते हैं। यहां बाहर से आए और स्थानीय कलाकार अपनी बहुमुखी कला के माध्यम से भारत के समृद्ध की झलक को दर्शाते हैं। भारत पाक सीमा पर आयोजित होने वाले इस रण उत्सव में आप ऊंट की सवारी का मज़ा भी ले सकते हैं। इस उत्सव का दीदार करने के लिए प्रतिवर्ष यहाँ 8 से 10 लाख लोग आते हैं।

रण ऑफ कच्छ से जुड़े दिलचस्प तथ्य

  • रण ऑफ कच्छ दुनिया का सबसे बड़ा सफेद रेगिस्तान है, जो बर्फ से नहीं बल्कि नमक से बना है। यह रेगिस्तान 30 हजार वर्ग किमी में फैला है।

  • यहाँ कूबड़ वाले ऊंट पाए जाते हैं|

  • कच्छ में लोथल और धोलावीरा हड़प्पा संस्कृति से जुड़े ऐतिहासिक स्थल है, जो पृथ्वी पर प्राचीन सभ्यता में से एक हैं। लोथल को दुनिया के सबे पुराने डॉकयार्ड के रूप में जाना जाता है, जबकि धोलावीरा भारत के सबसे पुराने टाउन प्लानिंग का अवशेष है।

  • इस रेगिस्तान में आपको लोमड़ी और राजहंस की दुलर्भ प्रजातियां देखने को मिलेंगी।

  • भुज के पास भुजोड़ी नामक गांव है, जहां लगभग 1200 वानकर समुदाय के शिल्पकार यहां रहते हैं। ये लोग यहां कपड़ा और हस्तशिल्प ईकाईयों में काम करते हैं। यहां जाकर आपको बुनकरों, ब्लॉक प्रिंटर और टाई-डाई कलाकारों से मिलने और उनके शिल्प के बारे में जानकारी लेने का मौका मिलता है।

  • बहुत कम लोगों को ये पता है कि निरोना गांव के पास सुम्ब्रासर नाम की छोटी सी जगह एक ब्रिटिश महिला के कारण काफी पॉपुलर हो गई है। 30 साल पहले जूडी ट्रेडर नाम की ये ब्रिटिश महिला रन ऑफ कच्छ आई थी और उसे इस जगह से प्यार हो गया। तब से लेकर आज तक जूडी यहां की स्थानीय कला को बढ़ावा देने की पहल कर कला रक्षा ट्रस्ट चलाती है।

 कच्छ का खानपान

खाद्य पदार्थों में मुख्य व्यंजन हैं- खमन डोकला, गथिया, अनथिया, मुथिया, रायता, दही वड़ा, कचौरी, भजिया, बैंगन से बनी भाजी, लौकी और भिंडी से बनी उंगली आदि। सामान्य भोजन, डाबेली, पुरी से बदलाव के रूप में। मिठाइयों की कई वैरायटी हैं जैसे- अददिया, गुलाब पाक, सोन पापड़ी, मोहन थाल, पेड़ा, हलवा, गुलाब जामुन, जलेबी, इत्यादि। धानिया के बीज या धान की दाल, सुपारी या पान सुपारी के साथ भोजन के बाद परोसा जाता है।

रन ऑफ कच्छ में क्या खरीद सकते हैं

कच्छ में बुटीक और दुकानों सहित कुछ बेहतरीन जगहें हैं,जिसमें हथकरघा कपड़े, हाथ से पेंट किए गए लकड़ी के बक्से, कपड़े मिलते हैं। यह खरीदारी करने के लिए अपेक्षाकृत कम महंगी जगह है। कच्छी शिल्प खरीदने के लिए भी भुजोडी (भुज से 8 किलोमीटर), निरोना, भुज, अंजार और होदका जैसे गांव अच्छे स्थानों में से हैं। स्थानीय रबारी, अरी, अहीर, मुतवा और बन्नी समुदायों द्वारा प्रचलित ललित कढ़ाई प्रभावशाली हैं। कच्छ में शॉपिंग करने का आपको एक अलग ही अनुभव हासिल होगा। यहां आप दुकानों पर तेल से बनी रोगन आर्ट,कॉपर बैल्स,मिरर वर्क के एम्ब्रॉयडिड गारमेंट्स,चंकी सिल्वर ज्वेलरी,गोल्ड ज्वेलरी,अजरख ब्लॉक प्रिंटिंग शॉल,बांधनी साड़ी व दुपट्टा इन सभी चीजों की खरीददारी कर सकते हैं, जो आपको भारत में कहीं नहीं मिलेंगी।

कच्छ के कुछ दर्शनीय स्थल  

धोलावीरा

धोलावीरा की दूरी अहमदाबाद से 7 घंटे की है, वहीं भुज से धोलावीरा जाने में पांच घंटे बीस मिनट का समय लगता है। धोलावीरा गुजरात के कटुच जिले में खादिरबेट गांव की एक जगह है। इस जगह पर प्राचीन इंडस घाटी सभ्यता और हड़प्पा संस्कृति के अवशेष मिलते हैं।

विजय विलास पैलेस

कच्छ के रण में विजय विलास पैलेस एक बेहद आकर्षक दर्शनीय स्थल है। इसका निर्माण 1929 में राव विजयराजजी ने कराया था| महल को 2 एकड़ के निजी समुद्र तट के साथ 450 एकड़ में फैली हरी-भरी हरियाली में बसाया गया है।

काला डूंगर

काला डूंगर कच्छ का सबसे ऊँचा स्थान है| सूर्यास्त के समय यहाँ का नजार विहंगम होता है|

मांडवी बीच

मांडवी बीच एक बेहद ही शांत और रमणीय स्थल है| यह रुक्मावती नदी के तट पर स्थित है और कच्छ की खाड़ी में अरब सागर से 1 किमी दूर है। मांडवी बीच को हनीमून मनाने वालों, पारिवारिक समारोहों के लिए एक शानदार डेस्टीनेशन है।

श्री स्वामीनारायण मंदिर

स्वामीनारायण मंदिर भी यहाँ स्थित हैं| अपनी विशेष निर्माण और स्थापत्य कला शैली के लिए विश्व विख्यात इस मंदिर में हर साल दुनिया भर से लाखों भक्त आते हैं|

कच्छ संग्रहालय

कच्छ संग्रहालय गुजरात का सबसे पुराना संग्रहालय है,जिसकी स्थापना 1877 में महाराव खेंगरजी ने की थी। इसमें क्षत्रप के शिलालेखों का सबसे बड़ा मौजूदा संग्रह है,जो पहली शताब्दी ईस्वी के आसपास था।

कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य

कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य गुजरात राज्य में कच्छ के रण में स्थित है। लगभग 7,505 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले, कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ जंगली जानवरों सरीसृप और एविफ़ुना भी हैं। ग्रेटर फ्लेमिंगो का प्रजनन स्थल होने के अलावा यह स्थल हाइना, सांभर, सियार, चिंकारा, जंगली सूअर, नीलगाय, भारतीय हर और दल के हाथी के आवास के रूप में प्रसिद्ध है। अभयारण्य में आने वाले पर्यटक लघु भारतीय कीवेट, भारतीय साही और भारतीय लोमड़ियों की विभिन्न प्रजातियों को भी देख सकते हैं।

नारायण सरोवर

नारायण सरोवर कच्छ के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक स्थलों में से एक है। यह सरोवर हिंदू धर्म के 5 पवित्र झीलों अर्थात मन सरोवर, पम्पा सरोवर, बिन्दु सरोवर, नारायण सरोवर और पुष्कर सरोवर का संयोजन है। यह झील सूखे की घटना से जुड़ी है इस सूखे को खत्म करने के लिए, भगवान विष्णु झील में नारायण के अवतार में प्रकट हुए। नारायण सरोवर के आसपास के मंदिरों के समूह को नारायण सरोवर मंदिर कहा जाता है। इस स्थल के मुख्य मंदिर श्री त्रिकमरायजी,लक्ष्मीनारायण,गोवर्धननाथजी,द्वारकानाथ,आदिनारायण,रणछोड़रायजी और लक्ष्मीजी को समर्पित हैं।

कब जाएं रन ऑफ कच्छ

रन ऑफ कच्छ की यात्रा करने का सही समय जनवरी में मक्रर संक्रांति के बाद है। इस समय यहां का मौसम बेहद सुहावना होता है और भीड़ भी कम मिलती है। कच्छ के सफेद रेगिस्तान की यात्रा के लिए पूर्णिमा की रात सबसे अच्छा समय है। यदि आपको पूर्णिमा की रात की बुकिंग नहीं मिलती तो एक या दो दिन पहले या बाद की यात्रा की योजना बनाएं। तब भी आपको पूर्णिमा की रात जैसा आनंद का अनुभव होगा।  रन ऑफ कच्छ जाने का सही समय है अक्टूबर भी है ।

कैसे पहुंचे

रण ऑफ कच्छ से भुज से नजदीक है। भुज सभी प्रमुख शहरों के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है| भुज से रण ऑफ कच्छ की दूरी मात्र 80 किमी है| आप चाहें तो भुज से कच्छ के लिए गुजरात टूरिज्म की बस की सुविधा ले सकते हैं, जो सीधे आपको रन ऑफ कच्छ पहुंचाएगी। अगर आप ट्रेन से कच्छ जाना चाहते हैं तो दिल्ली से भुज एक्सप्रेस और हजरत एक्सप्रेस चलती है, जबकि मुंबई से भुज एक्सप्रेस और कच्छ एक्सप्रेस चलती है। भुज एयरपोर्ट बैंगलोर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, त्रिवेंद्रम और गोवा से जुड़ा हुआ है|

(पंकज कुमार, मीडिया दरबार)

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