जानें जम्मू कश्मीर में देश के अन्य राज्यों की तरह क्यों नहीं लगता राष्ट्रपति शासन

जम्मू/ नई दिल्ली, । जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इसके साथ ही तीन सालों से चला आ रहा पीडीपी-भाजपा गठबंधन खत्म हो गया है। भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद महबूबा ने राज्यपाल एन एन बोहरा को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया जा चुका है। भारत का संविधान जम्मू – कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता है और यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके पास अलग संविधान और नियम हैं। इसलिए यहां पर राष्ट्रपति शासन के बजाय राज्यपाल शासन लगाया जाता है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार अब अल्पमत में आ गई है और भाजपा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की मांग की थी, सारा दारोमदार राज्यपाल की सिफारिश पर देश के राष्ट्रपति पर होता है, जो इस पर फैसला लेते है कि राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की जरूरत है या नहीं। उल्लेखनीय है कि ऐसी स्थिति में देश के अन्य राज्यों में भारतीय संविधान की धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है लेकिन जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया जाता है। इसके पीछे जो संवैधानिक वजह है, वह यह है कि जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 92 के मुताबिक राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता के बाद देश के राष्ट्रपति की मंजूरी से छह महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया जा सकता है। राज्यपाल शासन के दौरान या तो विधानसभा को निलंबित कर दिया जाता है या उसे भंग कर दिया जाता है। राज्यपाल शासन लगने के छह महीने के भीतर अगर राज्य में संवैधानिक तंत्र दोबारा बहाल नहीं हो पाता है तो भारत के संविधान की धारा 356 के तहत जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के समय को बढ़ा दिया जाता है और यह राष्ट्रपति शासन में तब्दील हो जाता है।अब तक जम्मू-कश्मीर में 7 बार राज्यपाल शासन लगाया जा चुका है। पिछले 38 सालों में वर्ष 1977 से 2016 के बीच क्रमश: मार्च 1977, मार्च 1986, जनवरी 1990, अक्टूबर 2002, जुलाई 2008, जनवरी 2015 और जनवरी 2016 में जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया जा चुका है।