खेल

भारतीय क्रिकेट के युवराज का संन्यास

युवराज सिंह ने संन्यास ले लिया है| उनके संन्यास के साथ ही भारतीय क्रिकेट के सबसे हसीन दौर का  एक अध्याय भी समाप्त हो गया है| यह दौर था संघर्ष का, जोश का, रवानी का, जीत की आदत डालने का, विरोधी टीमों को उनके लहजे में जवाब देने का| युवराज सिंह इन सभी चीजों के प्रतीक थे| एक दौर था जब युवराज के मैदान पर आते हीं गेंदबाज खौफ खाते थे| गेंदबाजों की छोटी सी गलती गेंद को आसमान के रास्ते सीमा पार भेज सकती थी| युवराज जब क्षेत्ररक्षण कर रहे होते तो उनके सामने से कोई रन चुरा ले इतनी हिम्मत किसी बल्लेबाज में नहीं हुआ करती थी|

12 दिसम्बर 1981 को चंडीगढ़ में योगराज सिंह और शबनम के घर जन्मे युवराज सिंह के पिता की ख्वाहिश थी की युवराज एक बहुत बड़े क्रिकेटर बने और देश का नाम रौशन करें| युवराज ने इस बात को अपनी ज़िन्दगी का मूलमंत्र बना लिया और जी तोड़ मेहनत की| वह दिन भी आया जब भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली की नज़र उनपे पड़ी और उनका चयन सन् 2000 में केन्या में आयोजित आईसीसी के नॉकआउट टूर्नामेंट के लिए हो गया| युवराज ने अपना पहला मैच 3 अक्टूबर 2000 को केन्या के विरूद्ध खेला| उसी प्रतियोगिता के क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिग्गज गेंदबाजों की मौजूदगी में युवराज ने 80 गेंदों पर 84 रनों की शानदार पारी खेली| भारत ने वह मैच जीता, युवराज सिंह पहली बार मैन ऑफ़ द मैच बने| इस मैच ने भारत को वो खिलाड़ी दिया जिसने आगे चलकर न जाने कितने मैच भारत की झोली में डाले| जिसमें आईसीसी द्वारा आयोजित 2007 का टी-20 विश्वकप और 2011 का 50-50 ओवर का विश्वकप भी शामिल था| इन दोनों विश्वकप प्रतियोगिताओं में युवराज ने जो खेल दिखाया उससे सिर्फ भारत ही नहीं पूरा विश्व हैरान था| 2007 का टी-20 विश्वकप, मैच था इंग्लैंड के खिलाफ, गेंदबाज थे स्टूअर्ट ब्रॉड, युवराज ने उनके 6 गेंदों पर लगातार 6 छक्के लगाकर वो इतिहास रच दिया जो टी-20 में आज तक अटूट है, इसके साथ युवराज ने उस मैच में 12 गेंदों में 50 रन बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया, जिसे अभी तक कोई तोड़ नहीं सका है| सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 30 गेंदों पर युवराज की 70 रनों की पारी ने भारत को फाइनल में पहुँचाया था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराकर पहला टी-20 विश्व कप जीत लिया| 2011 के क्रिकेट विश्वकप में भारत विश्वविजेता बना था, जिसमें युवराज का योगदान अतुलनीय रहा उन्होंने जहाँ 300 से अधिक रन बनाए वहीँ 15 विकेट भी चटकाए, जो कि अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है| युवराज ने इस टूर्नामेंट में चार मैन ऑफ़ द मैच पुरस्कार के साथ साथ मैन ऑफ़ द सीरिज का पुरस्कार भी अपने नाम किया था| उनका यह प्रदर्शन बताता है की वे ही सही मायनों में भारतीय क्रिकेट के युवराज हैं| 2011 विश्वकप की विजय ने पुरे विश्व में भारतीयों का सर गर्व से ऊँचा कर दिया था| सभी को बेशुमार खुशियाँ मिली थी और इसके पीछे एक ही शख्स था वो था युवराज सिंह| हालाँकि जब पूरा देश 2011 विश्वकप विजय की खुशियां मना रहा था तभी यह खबर आई की युवराज सिंह कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी से ग्रसित हैं| पुरे देश ने अपने हीरो के लिए दुआ की| युवराज महीनों अमेरिका में अपनी बीमारी के इलाज़ के लिए रहे| असह्य दर्द को सहा, संघर्ष किया और एक विजेता की तरह अपने देश वापस लौटे| बिमारी के बाद जब लोगों ने युवराज का करियर समाप्त समझा तब सभी को गलत बताते हुए अपने अथक और अकथ परिश्रम के कारण युवराज ने मैदान पर पुनः वापसी की| बिल्कुल भी आसान नहीं होता ऐसी बिमारियों से उठकर, जो शरीर को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ देती है, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पाँव जमाना, लेकिन ये युवराज ही थे जिनके लिए असंभव कुछ भी नहीं था| वे लौटे और फिर दुनिया के लिए मिसाल बन गए|

मैदान पर युवराज

युवराज सिंह ने भारत की तरफ से 304 वनडे मैच खेले जिसमें उन्होंने 14 शतकों और 52 अर्धशतकों सहित 8701 रन बनाए| वहीँ 40 टेस्ट में युवराज सिंह ने 3 शतकों और 11 अर्धशतकों सहित 1900 रन बनाए| युवराज सिंह ने 58 टी-20 में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 8 अर्धशतकों सहित 1,177 रन बनाए|

विदाई भाषण

10 जून 2019 को जब मुंबई में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में युवराज सिंह बोल रहे थे तो थोड़े भावूक नज़र आ रहे थे और पूरा देश भी अपने हीरो की विदाई पर भावूक था| युवराज ने अपने विदाई भाषण में अपने गुरु, माता, पिता अपने सीनियर खिलाडियों और अपने दोस्तों सबका जिक्र किया और सबको धन्यवाद दिया| युवराज ने अपने करियर के दौरान आए उन सारे हसीन पलों को याद किया जिसने उन्हें और पूरे भारत को खुशी दी थी| इसमें 2002 में जीती गई नेटवेस्ट सीरीज, इंग्लैंड की टेस्ट सीरिज, पाकिस्तान में टेस्ट में लगाया गया उनका शतक जिसमें उन्होंने 169 रन की पारी खेली थी, 2007 का टी-20 विश्वकप, 6 गेंदों पर रिकॉर्ड 6 छक्के, और 2011 क्रिकेट विश्व कप विजय प्रमुख थे|

संन्यास के बाद का प्लान

युवराज सिंह ने कहा की आज वे जो कुछ भी हैं वो क्रिकेट की बदौलत ही हैं| क्रिकेट उनके लिए खेल से बढ़कर है| युवराज ने कहा की संन्यास के बाद उनका मुख्य ध्यान कैंसर पीड़ितों और वंचित बच्चों के उत्थान पर होगा| खिलाड़ी तो बहुत आते हैं लेकिन युवराज सिंह जैसे खिलाड़ी विरले ही आते हैं| उनकी रिक्तता को भरना आसन नहीं होता|

दिग्गजों की प्रतिक्रिया

युवराज के संन्यास के बाद क्रिकेट जगत के तमाम धुरंधरो के साथ ही अन्य क्षेत्रों के भी दिग्गज हस्तियों ने अपने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से युवराज सिंह के चमकदार करियर के लिए उन्हें बधाई दी है तथा उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं|

 युवराज के क्रिकेट जीवन की कुछ बेहतरीन उपलब्धियां :-

  • 2007 टी-20 विश्वकप में इंग्लैण्ड के गेंदबाज ब्राड के छ गेंदों पर छ छक्के लगाने का रिकोर्ड
  • 12 गेंदों में टी-20 का सबसे तेज अर्धशतक बनाया था|
  • किसी भी विश्वकप में 300 रन और 15 विकेट लेने वाले पहले आलराउंडर| यह कारनामा उन्होंने 2011 क्रिकेट विश्वकप में किया था| जिसमे उन्हें मैन ऑफ़ द सीरिज का ख़िताब मिला था |
  • युवराज सिंह को 2012 में अर्जुन पुरस्कार( खेल जगत का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार) से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था |
  • 2014 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था |

 

 

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